नेपाल के दार्चुला जिले में भारी बारिश के बीच बड़ा भूस्खलन हुआ है। अपी हिमाल ग्रामीण नगरपालिका के भट्टाड़ क्षेत्र में पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा दरककर चौलानी नदी में जा गिरा, जिससे नदी का प्रवाह आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है। घटना के बाद नदी के निचले इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। सुरक्षा कर्मियों को मौके पर तैनात किया गया है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
नदी पूरी तरह ब्लॉक हुई तो बढ़ सकता है खतरा
दार्चुला जिला प्रशासन के मुताबिक, भूस्खलन के कारण नदी का पानी प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगर दोबारा बड़ा भूस्खलन हुआ और मलबा नदी में गिरता रहा, तो चौलानी नदी पूरी तरह अवरुद्ध हो सकती है। ऐसी स्थिति में नदी के पीछे पानी जमा होने के बाद अचानक पानी का तेज बहाव नीचे की ओर आ सकता है, जिससे आसपास के इलाकों में फ्लैश फ्लड यानी अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
15 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया
शुक्रवार दोपहर पहाड़ी दरकने की घटना के बाद एहतियाती कदम उठाते हुए भट्टाड़ गांव के 15 परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है। इसके अलावा क्षेत्र में मौजूद तीन जलविद्युत परियोजनाओं के कर्मचारियों को भी सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर
नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और अनावश्यक रूप से खतरे वाले क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दी गई है। सुरक्षा कर्मी प्रभावित क्षेत्र में तैनात हैं और स्थानीय लोगों को संभावित खतरे के बारे में लगातार आगाह कर रहे हैं। सुदूरपश्चिम प्रदेश के मुख्यमंत्री खगराज भट्ट ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से बाढ़ और आपदा सहायता के लिए आपातकालीन संपर्क व्यवस्था भी जारी की गई है।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से लगा है दार्चुला
नेपाल का दार्चुला जिला उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की सीमा से लगा हुआ है। ऐसे में नेपाल के पहाड़ी इलाकों में होने वाली इस तरह की घटनाओं पर सीमा से लगे भारतीय क्षेत्रों में भी नजर रखी जाती है। भारी बारिश और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही हिमालयी क्षेत्र की चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र का पर्यावरण तेजी से अस्थिर हो रहा है। बढ़ते तापमान की वजह से ग्लेशियरों के पीछे हटने और पर्माफ्रॉस्ट यानी लंबे समय से जमी मिट्टी के पिघलने की प्रक्रिया तेज हो रही है। इससे पहाड़ों की ढलानें कमजोर हो सकती हैं और भूस्खलन, ग्लेशियर टूटने तथा मलबे के खिसकने जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। कई बार भूस्खलन से नदियों का प्रवाह अस्थायी रूप से रुक जाता है, जिसके बाद अचानक पानी छोड़ने से फ्लैश फ्लड की स्थिति बन सकती है।
फिलहाल प्रशासन की नजर नदी के बहाव पर
चौलानी नदी के आंशिक रूप से बाधित होने के बाद प्रशासन की प्राथमिकता नदी के प्रवाह और पहाड़ी की स्थिति पर नजर बनाए रखना है। फिलहाल प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित आपात स्थिति के लिए तैयार हैं।