भोपाल: मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों को पूरी तरह पेपरलेस करने की तैयारी तेज हो गई है। स्वास्थ्य विभाग अक्टूबर-नवंबर 2026 तक पूरे प्रदेश में e-Hospital योजना शुरू करने की तैयारी कर रहा है।इस योजना के लागू होने के बाद सरकारी अस्पतालों में रजिस्टर, फाइलों और कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम हो जाएगी। मरीजों से जुड़ी सभी जानकारियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी, जिससे इलाज की प्रक्रिया अधिक आसान, तेज और पारदर्शी हो सकेगी।
सरकारी अस्पतालों में खत्म होगी कागजी व्यवस्था
अभी मध्यप्रदेश के अधिकांश जिला अस्पतालों और सिविल अस्पतालों में ओपीडी पंजीकरण की सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध है, लेकिन अस्पताल में भर्ती प्रक्रिया, बिलिंग, ऑपरेशन थिएटर, फार्मेसी और स्टोर से जुड़े कई काम अभी भी कागजों के सहारे संचालित हो रहे हैं।इस वजह से मरीजों को कई बार लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है। वहीं अस्पतालों में पुराने रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर तुरंत उपलब्ध कराने में भी कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।e-Hospital योजना लागू होने के बाद मरीजों की पूरी स्वास्थ्य जानकारी डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगी, जिससे डॉक्टरों को इलाज के दौरान बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
पहले प्रयास में आई थी तकनीकी दिक्कत
सरकारी अस्पतालों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की पहल पहले भी शुरू की गई थी। यह योजना केंद्र सरकार की संस्था राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से शुरू की गई थी।हालांकि, पुराने सॉफ्टवेयर पर अधिक लोड आने और तकनीकी समस्याओं के कारण यह परियोजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। इसके बाद कई मेडिकल कॉलेजों ने अपनी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग सॉफ्टवेयर सिस्टम का इस्तेमाल शुरू कर दिया था।अब स्वास्थ्य विभाग ने नए सिस्टम के साथ इस योजना को दोबारा लागू करने की तैयारी की है।
सेडेक सॉफ्टवेयर से तैयार होगा नया डिजिटल सिस्टम
स्वास्थ्य विभाग अब सेडेक (SEDEC) सॉफ्टवेयर की मदद से e-Hospital व्यवस्था को लागू करेगा। यह एक क्लाउड आधारित डिजिटल सिस्टम होगा, जिसमें अस्पताल की सभी प्रमुख सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा।
इस डिजिटल सिस्टम में शामिल होंगे
ओपीडी (OPD) पंजीकरण
आईपीडी (IPD) यानी भर्ती प्रक्रिया
लैब जांच रिपोर्ट
रेडियोलॉजी सेवाएं
ऑपरेशन थिएटर (OT) प्रबंधन
फार्मेसी व्यवस्था
बिलिंग सिस्टम
मेडिकल स्टोर और दवाओं का स्टॉक
ABHA ID से जुड़ा रहेगा मरीज का पूरा रिकॉर्ड
नई व्यवस्था में मरीज की आभा आईडी (ABHA ID) के माध्यम से उसका पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा।इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मरीज का इलाज इतिहास, जांच रिपोर्ट, दवाओं की जानकारी और अन्य मेडिकल रिकॉर्ड जरूरत पड़ने पर कहीं से भी देखे जा सकेंगे।यदि मरीज भविष्य में किसी दूसरे अस्पताल में इलाज कराने जाता है, तो डॉक्टर उसके पुराने रिकॉर्ड को आसानी से समझ सकेंगे।
मरीजों को मिलेंगी ये बड़ी सुविधाएं
e-Hospital योजना लागू होने के बाद मरीजों को कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी।
घर बैठे बन सकेगी ओपीडी पर्ची
मरीजों को अस्पताल पहुंचकर लंबी लाइन में खड़े होने की जरूरत कम होगी। वे ऑनलाइन ओपीडी पंजीकरण करा सकेंगे।
रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध होगी
जांच रिपोर्ट डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होगी, जिससे मरीज और डॉक्टर दोनों आसानी से उसे देख सकेंगे।
दवाओं की उपलब्धता पर नजर
फार्मेसी और स्टोर सिस्टम ऑनलाइन होने से अस्पतालों में दवाओं के स्टॉक की बेहतर निगरानी हो सकेगी।
रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा
कागजी फाइलों के खोने या खराब होने की समस्या खत्म होगी और मरीजों का डेटा सुरक्षित रहेगा।
अस्पतालों में बढ़ेगी पारदर्शिता
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि डिजिटल सिस्टम लागू होने से अस्पतालों में पारदर्शिता बढ़ेगी। मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी आसान होगी और कामकाज में तेजी आएगी।अधिकारियों के अनुसार, इससे अस्पतालों में भीड़ कम करने, समय बचाने और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रशासन को स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर नजर रखने में आसानी होगी।
अक्टूबर-नवंबर 2026 तक लॉन्च करने की तैयारी
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के वरिष्ठ संयुक्त निदेशक ने बताया कि सेडेक के साथ e-Hospital सिस्टम पर काम चल रहा है। इसे अक्टूबर-नवंबर 2026 तक पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है।उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से अस्पतालों में पेपर वर्क कम होगा और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम
मध्यप्रदेश सरकार का e-Hospital योजना शुरू करने का फैसला स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सरकारी अस्पतालों की सेवाएं अधिक आधुनिक होंगी और मरीजों को कम समय में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।आने वाले समय में यह योजना प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को तकनीक आधारित, पारदर्शी और मरीज केंद्रित बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।