भोपाल में आयोजित ‘सशक्त उद्यमी–समृद्ध मध्यप्रदेश’ सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश को देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। अंतरराष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य सरकार ने उद्योगों के लिए निवेश-अनुकूल वातावरण, वित्तीय सहायता और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में अपने संकल्प को दोहराया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आगामी वैश्विक निवेशक सम्मेलन अगले वर्ष जनवरी में भोपाल में आयोजित किया जाएगा, जहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि औद्योगिक विस्तार केवल निवेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजगार, निर्यात और क्षेत्रीय संतुलित विकास का भी मजबूत आधार बनेगा।
एमएसएमई और बड़े उद्योगों को मिली वित्तीय मजबूती
सम्मेलन के दौरान राज्य सरकार ने एक क्लिक के माध्यम से 760 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयों को प्रोत्साहन राशि जारी की, जिससे उद्यमियों को पूंजीगत सहायता और विस्तार योजनाओं को गति मिलेगी। इसके साथ ही मध्यप्रदेश निवेश प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत बड़े उद्योगों को 1,274 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उद्योगों को केवल निवेश की मंजूरी ही नहीं, बल्कि उत्पादन, तकनीकी उन्नयन और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए भी आवश्यक सहयोग प्राप्त हो। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की वित्तीय सहायता राज्य में औद्योगिक उत्पादन और रोजगार सृजन को नई ऊर्जा प्रदान कर सकती है।
कृषकों और युवाओं को केंद्र में रखकर तैयार हुआ विकास मॉडल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार की आगामी वर्षों की प्राथमिकताओं का विस्तृत खाका भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 को गरीब कल्याण वर्ष और वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में समर्पित किया गया था। अब वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ घोषित किया गया है, जिसके अंतर्गत कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण, किसानों को शून्य ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने तथा ऋण भुगतान की समय-सीमा को अधिक व्यावहारिक बनाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही वर्ष 2027 को ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में कौशल विकास, रोजगार, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि प्रदेश का युवा आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बन सके।
महिला उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों को मिल रही नई पहचान
राज्य सरकार ने महिला उद्यमिता को आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश में चार लाख इकतालीस हजार से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं, जो आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पिछले दो वर्षों में महिला उद्यमिता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं। इसी क्रम में प्रदेश के बीस पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त होना भी स्थानीय उद्योगों और हस्तशिल्प के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे इन उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों में विशिष्ट पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों की आय बढ़ने की संभावना भी मजबूत हुई है।
विदेशी निवेश और वैश्विक भागीदारी से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश अब विदेशी निवेशकों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, जापान, चीन, आयरलैंड और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों की कंपनियां राज्य में निवेश की दिशा में सक्रिय हैं। विभिन्न निवेश समझौतों के अंतर्गत बड़ी मात्रा में निवेश परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं, जिससे विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं। सरकार का लक्ष्य निवेश को केवल समझौतों तक सीमित न रखकर वास्तविक उत्पादन, रोजगार और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निवेश और अधोसंरचना विकास की वर्तमान गति बनी रहती है तो मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश गंतव्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।