भोपाल | मध्यप्रदेश समाचार: मध्यप्रदेश में केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो रही है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने का सिलसिला शुरू होगा। इस सीट को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा तेज है। हालांकि, पार्टी ने अभी तक किसी भी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। राजनीतिक चर्चाओं में तमिलनाडु भाजपा की पूर्व विधायक वनथी श्रीनिवासन के साथ मध्यप्रदेश के कई नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में सबकी नजर भाजपा नेतृत्व के फैसले पर टिकी है।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीट
केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन अप्रैल 2024 में मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य चुने गए थे। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक निर्धारित था, लेकिन अक्टूबर 2026 में उनके इस्तीफे के बाद यह सीट रिक्त हो गई। अब इस सीट पर उपचुनाव के जरिए नए सांसद का चयन किया जाएगा। चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा उम्मीदवार का चयन इस उपचुनाव का सबसे अहम पहलू माना जा रहा है।
भाजपा में किन नेताओं के नाम चर्चा में?
राज्यसभा उपचुनाव के लिए भाजपा में कई संभावित दावेदारों के नाम चर्चा में हैं। इनमें तमिलनाडु भाजपा की पूर्व विधायक वनथी श्रीनिवासन का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।
मध्यप्रदेश के जिन नेताओं के नामों की चर्चा हो रही है, उनमें शामिल हैं:
- अरविंद भदौरिया, पूर्व मंत्री
- राहुल कोठारी, प्रदेश महामंत्री
- आशीष अग्रवाल, राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक
- विनोद गोटिया, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष
- शैलेंद्र बरुआ, प्रदेश उपाध्यक्ष
- रंजना बघेल, पूर्व मंत्री
राजनीतिक अटकलों के मुताबिक, पार्टी किसी ऐसे नेता को भी मौका दे सकती है जो मध्यप्रदेश से बाहर का हो। हालांकि, ये सभी संभावित नाम हैं। भाजपा की ओर से आधिकारिक घोषणा होने तक किसी को भी उम्मीदवार मानना उचित नहीं होगा।
229 विधायकों के वोट से कैसे तय होगा चुनाव?
मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे, जिसके चलते चुनावी समीकरण 229 विधायकों के आधार पर देखा जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में मतदान आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत के जरिए होता है। उम्मीदवार की जीत के लिए आवश्यक मतों का कोटा लागू चुनावी नियमों और मतदान की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है। भाजपा और कांग्रेस के विधायकों की संख्या इस चुनाव में महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा विधायकों की पात्रता, मतदान में भागीदारी और अन्य राजनीतिक परिस्थितियां भी नतीजे को प्रभावित कर सकती हैं।
निर्मला सप्रे की भूमिका पर भी नजर
बीना से विधायक निर्मला सप्रे की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी चर्चा है। वह खुद को कांग्रेस में बताती हैं, लेकिन भाजपा के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उनके खिलाफ दलबदल से जुड़ा मामला भी चर्चा में है। ऐसे में उनकी विधानसभा सदस्यता और मतदान की पात्रता से जुड़े आधिकारिक निर्णय चुनावी समीकरणों के आकलन में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। उनकी भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी और विधानसभा रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
कब बने थे एल. मुरुगन राज्यसभा सांसद?
एल. मुरुगन सितंबर 2021 में पहली बार तमिलनाडु से राज्यसभा सदस्य बने थे। इसके बाद 3 अप्रैल 2024 को उन्होंने मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यभार संभाला। उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित था, लेकिन अक्टूबर 2026 में इस्तीफा देने के बाद सीट रिक्त हो गई। अब उपचुनाव के जरिए इस सीट पर नए सदस्य का चयन होगा। भाजपा उम्मीदवार के नाम की घोषणा के बाद चुनावी मुकाबले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की कितनी सीटें हैं?
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, एल. मुरुगन के इस्तीफे से पहले भाजपा के सात और कांग्रेस के तीन सांसद थे, जबकि एक सीट रिक्त हो गई। उपचुनाव के बाद इस सीट पर नए सदस्य का चयन किया जाएगा। फिलहाल राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों की नजर नामांकन प्रक्रिया और भाजपा के आधिकारिक फैसले पर है।