नई दिल्ली | दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। हवा की गुणवत्ता खराब होने के बीच प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों ने निगरानी और रोकथाम के उपाय तेज कर दिए हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 21 अक्टूबर को दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को लागू किया था। इसके तहत धूल नियंत्रण, सड़कों की सफाई और निर्माण स्थलों पर प्रदूषण रोकने जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है। सर्दियों में तापमान, हवा की गति, पराली जलाने और वाहनों से निकलने वाले धुएं जैसे कारकों के कारण प्रदूषण बढ़ सकता है। हालांकि, 6 नवंबर तक वायु गुणवत्ता के गंभीर श्रेणी में पहुंचने के दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। उपलब्ध सरकारी पूर्वानुमान में अगले कुछ दिनों के लिए दिल्ली की हवा खराब से मध्यम श्रेणी में रहने की संभावना जताई गई थी।
1 नवंबर से वाहनों को लेकर सख्ती
दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण के उपाय किए जा रहे हैं। 1 नवंबर से दिल्ली में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों में पंजीकृत गैर-BS-VI वाहनों पर प्रतिबंध से जुड़े नियम लागू होने की जानकारी सामने आई है। इसके तहत वाहन चालकों को यात्रा से पहले संबंधित सरकारी आदेशों और वाहन श्रेणी के अनुसार लागू नियमों की पुष्टि कर लेनी चाहिए। इसके अलावा, दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के बिना वाहनों को ईंधन न देने की नीति भी लागू की जा रही है। वाहन चालकों को अपना प्रदूषण प्रमाणपत्र वैध रखने की सलाह दी गई है। ध्यान दें कि सभी निजी और व्यावसायिक वाहनों पर एक जैसा प्रतिबंध नहीं है। नियम वाहन के पंजीकरण स्थान, उत्सर्जन मानक, वाहन श्रेणी और लागू सरकारी आदेश पर निर्भर कर सकते हैं।
पराली जलाने पर रोक के लिए निगरानी
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारणों में पराली जलाना भी शामिल है। इसे रोकने के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में निगरानी तथा प्रवर्तन गतिविधियां चलाई जा रही हैं। खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय के लिए विभिन्न टीमें काम कर रही हैं। इसके साथ ही प्रदूषण के हॉटस्पॉट क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, सड़कों पर धूल कम करने और कचरे को खुले में जलाने से रोकने पर भी जोर दिया जा रहा है।
निर्माण कार्य और धूल नियंत्रण पर जोर
सर्दियों में हवा की गुणवत्ता बिगड़ने पर निर्माण गतिविधियों से निकलने वाली धूल भी समस्या बढ़ा सकती है। GRAP के पहले चरण के तहत एजेंसियों को सड़कों की मैकेनिकल सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और कचरे का नियमित उठाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण कार्यों पर व्यापक प्रतिबंध अपने आप लागू नहीं हो जाता। ऐसे प्रतिबंध प्रदूषण के स्तर और CAQM की ओर से लागू किए गए GRAP के संबंधित चरण के अनुसार प्रभावी होते हैं।
क्या पार्किंग शुल्क बढ़ेगा और वर्क फ्रॉम होम लागू होगा?
प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने और कार्यालयों में कामकाज के तरीकों में बदलाव जैसे उपाय GRAP के उच्च चरणों में शामिल हो सकते हैं। लेकिन पार्किंग शुल्क दोगुना करने और सरकारी व निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने के निर्देश को फिलहाल लागू नियम मानने से पहले संबंधित अधिकारियों की अधिसूचना देखना जरूरी है। CAQM के GRAP ढांचे के अनुसार, प्रदूषण की स्थिति गंभीर होने पर चरणबद्ध तरीके से अतिरिक्त प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं। इसलिए नागरिकों को नई पाबंदियों के बारे में आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करना चाहिए।
GRAP के चार चरण क्या हैं?
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर के अनुसार GRAP के तहत कार्रवाई की जाती है:
- चरण 1 — खराब हवा: AQI 201 से 300
- चरण 2 — बहुत खराब हवा: AQI 301 से 400
- चरण 3 — गंभीर हवा: AQI 401 से 450
- चरण 4 — अत्यंत गंभीर हवा: AQI 450 से अधिक
प्रदूषण बढ़ने पर CAQM स्थिति, मौसम के पूर्वानुमान और AQI की समीक्षा कर आगे के प्रतिबंध लागू करने का फैसला कर सकता है।
दिल्ली-एनसीआर के लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
दिल्ली और आसपास के शहरों में रहने वाले लोगों को रोजाना AQI की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। प्रदूषण अधिक होने पर खुले में लंबे समय तक व्यायाम करने से बचें, बच्चों और सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों का विशेष ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।