भोपाल, 5 अगस्त 2026 | मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर कमजोर पड़ी हैं। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुककर हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो रही है, जबकि व्यापक तेज बारिश का दौर सीमित रहा है। IMD के आंकड़ों के अनुसार 4 अगस्त को पूरे प्रदेश में औसतन केवल 3 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जबकि उस दिन सामान्य वर्षा 13.2 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। बारिश की इस सुस्ती का असर मौसमी आंकड़ों पर भी दिखाई दे रहा है। एक जून से 4 अगस्त तक प्रदेश में 406.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है, जबकि इस अवधि की सामान्य बारिश 495.2 मिलीमीटर है। इस तरह मध्य प्रदेश सामान्य से 18 प्रतिशत पीछे है।
आज दतिया-भिंड समेत इन 5 जिलों में भारी बारिश
मौसम विभाग के कृषि-मौसम बुलेटिन में 5 अगस्त के लिए पांच जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है:
- दतिया
- भिंड
- छतरपुर
- पन्ना
- सतना
इन जिलों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक, आकाशीय बिजली और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवा चल सकती है। यह चेतावनी 5 अगस्त सुबह 8:30 बजे से 6 अगस्त सुबह 8:30 बजे तक की अवधि के लिए प्रभावी है।
भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, जबलपुर, रीवा, सागर, ग्वालियर और दूसरे जिलों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश तथा गरज-चमक की गतिविधियां हो सकती हैं। प्रदेश के दोनों मौसम उपखंडों में बुधवार को बारिश का वितरण ‘स्कैटर्ड’ यानी कुछ स्थानों तक सीमित रहने का पूर्वानुमान है।
6 अगस्त से अधिक जिलों में पहुंचेगी बारिश
IMD के पांच दिन के पूर्वानुमान के अनुसार 5 अगस्त को पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर बारिश होगी। 6 अगस्त से इसका दायरा बढ़कर ‘फेयरली वाइडस्प्रेड’ यानी अनेक स्थानों तक पहुंच सकता है। 6, 7 और 8 अगस्त को प्रदेश के दोनों हिस्सों में कई स्थानों पर बारिश का अनुमान है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 7 अगस्त को कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे प्रदेश में एक साथ तेज बारिश होगी; भारी बारिश स्थानीय और सीमित क्षेत्रों में हो सकती है।
| तारीख | बारिश का संभावित वितरण | प्रमुख चेतावनी |
|---|---|---|
| 5 अगस्त | कुछ स्थानों पर | पांच जिलों में भारी बारिश |
| 6 अगस्त | अनेक स्थानों पर | कहीं-कहीं भारी बारिश |
| 7 अगस्त | अनेक स्थानों पर | पश्चिमी MP में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश |
| 8 अगस्त | अनेक स्थानों पर | कहीं-कहीं भारी बारिश |
प्रदेश में सामान्य से साढ़े तीन इंच कम पानी
मौजूदा मानसून सीजन में प्रदेश में करीब 16 इंच बारिश हुई है। इस समय तक लगभग 19.5 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। इस हिसाब से मध्य प्रदेश सामान्य से करीब 88.4 मिलीमीटर या लगभग 3.5 इंच पीछे है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रदेश में “सामान्य की आधी बारिश भी नहीं हुई” कहना सही नहीं होगा। अब तक निर्धारित सामान्य वर्षा का लगभग 82 प्रतिशत पानी बरस चुका है। कमी 18 प्रतिशत की है, 50 प्रतिशत से अधिक की नहीं। IMD की तकनीकी वर्गीकरण व्यवस्था में सामान्य से 19 प्रतिशत कम से 19 प्रतिशत अधिक बारिश को ‘नॉर्मल’ श्रेणी में रखा जाता है। इसलिए 18 प्रतिशत कमी के बावजूद पूरा मध्य प्रदेश फिलहाल राज्य स्तर पर ‘नॉर्मल’ श्रेणी में है, हालांकि वास्तविक वर्षा सामान्य आंकड़े से नीचे है।
पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी ज्यादा
बारिश की सबसे बड़ी कमी पूर्वी मध्य प्रदेश में बनी हुई है। यहां 4 अगस्त तक 422.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 544.3 मिलीमीटर है। यानी पूर्वी हिस्से में वर्षा 22 प्रतिशत कम है और यह IMD की ‘डिफिशिएंट’ श्रेणी में आता है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 394.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है, जबकि सामान्य वर्षा 457.4 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। यहां बारिश की कमी 14 प्रतिशत है।
| क्षेत्र | वास्तविक वर्षा | सामान्य वर्षा | अंतर |
|---|---|---|---|
| पूरा मध्य प्रदेश | 406.8 मिमी | 495.2 मिमी | -18% |
| पश्चिमी मध्य प्रदेश | 394.5 मिमी | 457.4 मिमी | -14% |
| पूर्वी मध्य प्रदेश | 422.8 मिमी | 544.3 मिमी | -22% |
इन जिलों में सबसे ज्यादा वर्षा घाटा
जिलावार आंकड़ों में रीवा सबसे अधिक पिछड़ा हुआ है। यहां सामान्य से 66 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मुरैना में 51 प्रतिशत, दतिया में 46 प्रतिशत, मैहर में 45 प्रतिशत, नर्मदापुरम में 40 प्रतिशत और सिंगरौली में 37 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
| जिला | सामान्य से अंतर |
|---|---|
| रीवा | -66% |
| मुरैना | -51% |
| दतिया | -46% |
| मैहर | -45% |
| नर्मदापुरम | -40% |
| सिंगरौली | -37% |
55 में से 45 जिले अपने सामान्य आंकड़े से नीचे
IMD की 55 जिलों वाली वर्षा तालिका के प्रतिशत अंतर की गणना के अनुसार 45 जिलों में अब तक हुई बारिश उनके संबंधित सामान्य आंकड़े से कम है। आठ जिलों में बारिश सामान्य आंकड़े से कुछ अधिक और दो जिलों में लगभग बराबर है। यह गणना जिलेवार IMD तालिका के संचयी ‘प्रतिशत अंतर’ पर आधारित है।
सामान्य आंकड़े से ऊपर चल रहे जिलों में बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और पांढुर्णा शामिल हैं। इंदौर और मऊगंज का संचयी आंकड़ा लगभग सामान्य के बराबर है। हालांकि IMD की आधिकारिक ‘अधिक वर्षा’ श्रेणी में फिलहाल बुरहानपुर और खरगोन आते हैं। अन्य जिलों में आंकड़ा सामान्य से थोड़ा अधिक है, लेकिन वह तकनीकी रूप से ‘नॉर्मल’ सीमा के भीतर है।
किन मौसमी प्रणालियों से बढ़ सकती है बारिश?
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार मानसूनी द्रोणिका उत्तर भारत से होकर गुजर रही है। इसके साथ उत्तर हरियाणा, उत्तर-पूर्वी राजस्थान, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, उत्तर-पश्चिम बिहार और सौराष्ट्र के आसपास अलग-अलग ऊंचाइयों पर चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र पर एक पश्चिमी विक्षोभ भी मौजूद है। इन प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव और वातावरण में मौजूद नमी से 6 अगस्त के बाद मध्य प्रदेश में बारिश का वितरण बढ़ सकता है। बारिश की वापसी को केवल एक पश्चिमी विक्षोभ से जोड़ना पूरी तस्वीर नहीं होगी।
किसानों और आम लोगों पर क्या असर?
आज भारी बारिश की चेतावनी वाले जिलों में खेतों के निचले हिस्सों में पानी भर सकता है। किसानों को सोयाबीन, मक्का, दाल, तिल और सब्जियों वाले खेतों में जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी गई है। भारी बारिश और तेज हवा के दौरान खाद, कीटनाशक या खरपतवारनाशक का छिड़काव टालना चाहिए।
आकाशीय बिजली के दौरान खुले खेत, ऊंचे पेड़, बिजली के खंभे और धातु की संरचनाओं से दूर रहें। जलभराव वाली सड़क, पुलिया या बहते नाले को वाहन से पार करने का प्रयास न करें। स्थानीय स्तर पर मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए जिला प्रशासन और IMD के नाउकास्ट को प्राथमिकता दें।