भोपाल। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने का मामला अब जबलपुर हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने भाजपा के तीनों निर्वाचित राज्यसभा सांसदों, चुनाव आयोग और निर्वाचन अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर हाईकोर्ट का नोटिस
जबलपुर हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की एकल पीठ ने कांग्रेस नेता एवं पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन की चुनाव याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए भाजपा के राज्यसभा सांसद तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को नोटिस जारी किया है। साथ ही चुनाव आयोग और निर्वाचन अधिकारी से भी जवाब तलब किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को इसलिए पक्षकार बनाया गया है क्योंकि इस याचिका पर आने वाले अंतिम निर्णय का उनके निर्वाचन पर भी प्रभाव पड़ सकता है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को निर्धारित की गई है।
याचिका में क्या है मीनाक्षी नटराजन का दावा?
सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता और अधिवक्ता आर्यन गुप्ता ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया है कि उनका नामांकन पत्र गलत और अनुचित आधारों पर निरस्त किया गया था। इसलिए भाजपा प्रत्याशी महेश केवट का निर्वाचन निरस्त किया जाए और मामले में न्यायिक हस्तक्षेप किया जाए।
महेश केवट ने क्या कहा?
भाजपा के राज्यसभा सांसद महेश केवट ने कहा कि उन्हें अभी तक किसी प्रकार का नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी भी नहीं मिली है।
क्या था पूरा राज्यसभा चुनाव विवाद?
मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को उम्मीदवार बनाया था, जबकि कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा था। संख्याबल के आधार पर दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना थी। लेकिन नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भाजपा ने मीनाक्षी नटराजन के हलफनामे पर आपत्ति दर्ज कराई। भाजपा का आरोप था कि उन्होंने हैदराबाद की एक अदालत में लंबित आपराधिक प्रकरण की जानकारी अपने शपथ पत्र में नहीं दी। निर्वाचन अधिकारी ने इस आपत्ति को स्वीकार करते हुए उनका नामांकन निरस्त कर दिया। इसके बाद भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध राज्यसभा सदस्य निर्वाचित घोषित हो गए।
सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला?
नामांकन निरस्त होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने पहले सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए उन्हें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव याचिका दायर करने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने जबलपुर हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की, जिस पर अब अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अगली सुनवाई 11 सितंबर को
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। अब इस चुनावी विवाद की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी, जहां अदालत मामले के कानूनी पहलुओं पर आगे विचार करेगी।