Bhopal | मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। प्रदेश के चार और ऐतिहासिक स्थलों को यूनेस्को (UNESCO) की टेंटेटिव लिस्ट यानी अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। इससे मध्य प्रदेश की समृद्ध पुरातात्विक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ी है। यूनेस्को की अस्थायी सूची में धार की बाघ गुफाओं की भित्ति चित्रकारी, सीहोर का गिन्नौरगढ़ किला, मुरैना का बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह और विदिशा की उदयगिरि गुफाओं को शामिल किया गया है।
UNESCO की Tentative List में शामिल हुए ये 4 स्थल
मध्य प्रदेश की जिन चार धरोहरों को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में जगह मिली है, उनमें अलग-अलग कालखंडों की कला, स्थापत्य और ऐतिहासिक परंपराओं की झलक देखने को मिलती है।
धार की बाघ गुफाएं
धार जिले की बाघ गुफाएं प्राचीन बौद्ध भित्ति चित्रकला के लिए प्रसिद्ध हैं। इन गुफाओं की चित्रकारी चौथी से छठी शताब्दी के बीच विकसित हुई बौद्ध कला परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है। यहां मौजूद भित्ति चित्र प्राचीन भारतीय चित्रकला की समृद्ध परंपरा को दर्शाते हैं।
सीहोर का गिन्नौरगढ़ किला
सीहोर जिले में स्थित गिन्नौरगढ़ किला मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक किलों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह गोंड शासन, प्राचीन किलेबंदी और जल प्रबंधन व्यवस्था से जुड़े इतिहास को सामने लाता है। किले की स्थापत्य विशेषताएं मध्य प्रदेश के मध्यकालीन इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
मुरैना का बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह
मुरैना जिले का बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह अपनी प्राचीन मंदिर स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। यहां मौजूद मंदिर प्रारंभिक मध्यकालीन नागर वास्तुकला की विशेषताओं को प्रदर्शित करते हैं। यह क्षेत्र मध्य भारत की धार्मिक और स्थापत्य परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
विदिशा की उदयगिरि गुफाएं
विदिशा की उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन भारत की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर हैं। यहां मौजूद शैलकृत गुफाएं और धार्मिक प्रतिमाएं गुप्तकाल के धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं।
भारत की 78 टेंटेटिव धरोहरों में 19 मध्य प्रदेश से
यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में भारत की कुल 78 धरोहरों में से 19 स्थल मध्य प्रदेश से जुड़े बताए जा रहे हैं। इन स्थलों को सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया में मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की भूमिका रही है।
World Heritage Site बनने की दिशा में पहला चरण
किसी ऐतिहासिक या सांस्कृतिक स्थल का यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना उसे विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया का शुरुआती चरण माना जाता है। इसके बाद संबंधित स्थल के संरक्षण, प्रबंधन और Outstanding Universal Value यानी असाधारण सार्वभौमिक महत्व से जुड़े पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है। मध्य प्रदेश के इन चार स्थलों का टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना प्रदेश की पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, टेंटेटिव लिस्ट में शामिल होना अपने आप में UNESCO World Heritage Site का दर्जा मिलना नहीं है; इसके लिए आगे की नामांकन और मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी करनी होती है।