भोपाल। राजधानी भोपाल में 12 से 14 अक्टूबर 2026 तक श्रीराम के जीवन-दर्शन, आदर्शों, रामराज्य, सुशासन और रामायण की वैश्विक परंपराओं पर अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक सम्मेलन आयोजित होगा। अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव के तहत रविंद्र भवन में होने वाले इस सम्मेलन में देश-दुनिया के शोधार्थी और अध्येता विभिन्न विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत करेंगे।
श्रीराम दर्शन पर होगा वैश्विक संवाद
मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास की ओर से ‘अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक सम्मेलन-अध्यात्म, मर्यादा और सुशासन: श्रीराम दर्शन का वैश्विक समागम’ आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य श्रीराम के व्यापक दर्शन, रामायण की बहुआयामी परंपरा और उसके सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों पर प्रमाण-आधारित संवाद को बढ़ावा देना है।
रामराज्य और सुशासन से लेकर वैश्विक रामकथा तक
सम्मेलन में रामराज्य की संकल्पना, श्रीराम का आदर्श नेतृत्व और सुशासन जैसे विषयों पर शोध प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही रामायणकालीन औषधियां, वनस्पतियां और जल संरचनाएं, लोककथाओं में श्रीराम, वाल्मीकि और तुलसी के रामकाव्य का समालोचनात्मक अध्ययन भी सम्मेलन के विषयों में शामिल है। दक्षिण-पूर्व एशिया सहित दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रामकथा और श्रीराम से जुड़ी परंपराओं पर हुए शोध को भी सम्मेलन में सामने लाया जाएगा। रामायण को वैश्विक साझा विरासत के संदर्भ में देखने वाले शोध भी प्रस्तुत किए जा सकेंगे।
आधुनिक कला और इतिहास में श्रीराम पर भी शोध
सम्मेलन में आधुनिक समय में श्रीराम की अभिव्यक्ति को भी शोध का विषय बनाया गया है। आधुनिक लेखन, चित्रपट और कलाओं में श्रीराम के चित्रण के साथ पुरातत्व, मंदिरों और अभिलेखों में श्रीराम से जुड़े अध्ययन भी शामिल किए गए हैं। इसके अलावा रामायणकालीन वास्तुकला, अभियांत्रिकी, आयुध और विमानन प्रणाली जैसे विषयों पर भी शोध आलेख आमंत्रित किए गए हैं। सामाजिक समरसता, राजनीतिक दृष्टि और लंका में रामायण के प्रभाव जैसे विषय भी सम्मेलन का हिस्सा होंगे।
समिति करेगी शोध कार्यों का चयन
संस्कृति संचालक एवं श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एनपी नामदेव के अनुसार सम्मेलन के लिए प्राप्त शोध कार्यों का समिति के माध्यम से परीक्षण और चयन किया जाएगा। चयनित और उपयुक्त शोध आलेखों को सम्मेलन के बाद संगोष्ठी पुस्तिका के रूप में प्रकाशित किया जा सकता है। प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी दिए जा सकते हैं। शोधार्थी संस्कृति विभाग की वेबसाइट culturemp.in पर उपलब्ध लिंक के जरिए गूगल फॉर्म भरकर पंजीयन कर सकेंगे।
12 अक्टूबर की रात 12 बजे तक भेज सकेंगे शोध
आयोजकों के अनुसार शोध आलेख भेजने की अंतिम समय-सीमा 12 अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे तक है। अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव का आयोजन 12 से 18 अक्टूबर तक किया जाएगा। इसी क्रम में 12 से 14 अक्टूबर तक रविंद्र भवन में अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक सम्मेलन आयोजित होगा। सम्मेलन के जरिए श्रीराम के जीवन-मूल्यों, मर्यादा, नेतृत्व और सुशासन के साथ रामायण की विभिन्न वैश्विक परंपराओं पर प्रमाण-आधारित विचार-विमर्श को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।