नई दिल्ली - भारत अपने रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर को नई तकनीकी ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि देश पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के साथ-साथ छठी पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तकनीकी चुनौतियां स्वाभाविक हैं, लेकिन भारत का लक्ष्य स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भरता के जरिए भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार होना है।
पांचवीं पीढ़ी के बाद छठी पीढ़ी पर फोकस
भारत फिलहाल स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) कार्यक्रम पर काम कर रहा है। मई 2026 में आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में AMCA के कोर इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग सेंटर की आधारशिला रखी गई थी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह केंद्र AMCA और अन्य भविष्य के स्वदेशी प्लेटफॉर्म के विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाएगा। AMCA कार्यक्रम का कुल अनुमानित परिव्यय करीब 15,000 करोड़ रुपये बताया गया है।
अब सरकार की नजर अगली पीढ़ी की लड़ाकू तकनीकों पर भी है। राजनाथ सिंह ने हालिया संबोधन में कहा कि भारत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में तेजी से बदल रहे युद्ध के स्वरूप के अनुरूप देश की स्वदेशी तकनीकी क्षमता तैयार करना है।
इंजन और प्रोपल्शन तकनीक पर भी जोर
स्वदेशी फाइटर जेट विकसित करने के साथ भारत के सामने सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक एयरोस्पेस प्रोपल्शन भी है। सरकार स्वदेशी विमान इंजन और ड्रोन इंजन जैसी क्षमताओं को विकसित करने पर जोर दे रही है। 18 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में HAL के कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा था कि विमान डिजाइन, एवियोनिक्स, प्रोपल्शन, कंपोजिट मटेरियल और फ्लाइट-कंट्रोल सिस्टम जैसी क्षमताओं को देश में विकसित करना जरूरी है। उन्होंने अगली पीढ़ी की प्रोपल्शन तकनीक, AI, ऑटोनॉमस सिस्टम और मानव रहित हवाई प्रणालियों पर भी ध्यान देने की बात कही।
तकनीक तय करेगी भविष्य की हवाई ताकत
राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में तकनीकी क्षमता को भविष्य के युद्ध के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि आधुनिक युद्ध तेजी से तकनीक आधारित हो रहा है और आने वाले समय में AI, ड्रोन, साइबर टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और स्पेस आधारित क्षमताओं की भूमिका बढ़ेगी। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारत को ऐसी तकनीक विकसित करने की जरूरत है जो देश को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाए। इसी उद्देश्य से रक्षा अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाने तथा निजी क्षेत्र, स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अगले दशक के लिए तैयार हो रहा एयरोस्पेस इकोसिस्टम
भारत केवल लड़ाकू विमान बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि पूरे एयरोस्पेस इकोसिस्टम को देश में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। HAL के जरिए तेजस और HTT-40 जैसे विमानों का उत्पादन, ध्रुव NG हेलीकॉप्टर और AMCA जैसी परियोजनाएं इसी दिशा का हिस्सा हैं। सितंबर 2026 में राजनाथ सिंह ने कहा कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल से अगली पीढ़ी की स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमताओं के विकास को गति दी जा सकती है।
इस पूरी रणनीति में पांचवीं पीढ़ी के AMCA से लेकर छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान, नई प्रोपल्शन तकनीक, ड्रोन और AI आधारित सिस्टम तक कई क्षेत्रों को शामिल किया जा रहा है। हालांकि छठी पीढ़ी के विमान की विस्तृत डिजाइन, समयसीमा और परिचालन क्षमता से जुड़ी अंतिम जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।