नई दिल्ली: UPI के जरिए होने वाले चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित चार्ज के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल नई व्यवस्था पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार, UPI स्टीयरिंग कमेटी, NPCI समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई CJI जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। याचिका में 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी UPI भुगतानों पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की वैधता को चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वकील अंजन दत्ता की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने अदालत को बताया कि प्रस्तावित चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होंगे। सरकार की ओर से कहा गया कि करीब 96% ट्रांजैक्शन इस चार्ज से प्रभावित नहीं होंगे। वहीं आवश्यक सेवाओं से जुड़े लेनदेन के लिए चार्ज की अधिकतम सीमा 5 रुपये रखी गई है।
सरकार ने चार्ज को लेकर क्या कहा?
ASG एन. वेंकटरमन ने अदालत में कहा कि यह चार्ज न तो टैक्स है और न ही सरकार की ओर से ली जाने वाली कोई फीस है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को इन चार्ज से कोई राशि नहीं मिल रही है। सरकार के मुताबिक यह पेमेंट एग्रीगेटर्स और बैंकों के बीच सेटलमेंट से जुड़ा चार्ज है। सरकार ने तर्क दिया कि इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली को संचालित करने में लागत आती है और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों की तरह UPI के लिए भी ऐसी लागत का प्रावधान जरूरी हो सकता है। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि इन तथ्यों को अदालत के समक्ष हलफनामे के जरिए प्रस्तुत किया जाए। वहीं जस्टिस बागची ने सवाल किया कि यदि यह टैक्स या फीस नहीं है, तो इसकी वसूली का प्रशासनिक आधार क्या है और इसके बदले कौन सी सेवा प्रदान की जा रही है।
क्या है UPI की नई चार्ज व्यवस्था?
NPCI की प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी UPI भुगतानों पर 0.4% MDR लागू किया जाना है। इसके अलावा 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम 300 रुपये की सीमा निर्धारित की गई है। हालांकि, यह व्यवस्था सभी UPI भुगतानों पर लागू नहीं होगी। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले सामान्य UPI भुगतान पर कोई चार्ज प्रस्तावित नहीं है। सरकार का कहना है कि करीब 96% व्यापारी लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।
छोटे दुकानदारों को चार्ज से छूट
प्रस्तावित व्यवस्था में छोटे व्यापारियों को भी राहत देने का प्रावधान बताया गया है। UPI QR के जरिए हर महीने एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को इस चार्ज से छूट दी जाएगी। इसके अलावा रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे कुछ आवश्यक क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन के लिए 5 रुपये का निश्चित चार्ज निर्धारित किया गया है।
याचिका में क्या चुनौती दी गई है?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी UPI भुगतानों पर MDR लागू करने के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि नई चार्ज व्यवस्था पर्याप्त कानूनी आधार, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लागू की जा रही है। याचिका में जनवरी 2020 से लागू शून्य-MDR व्यवस्था में बदलाव को भी चुनौती दी गई है। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का जवाब अभी अदालत के समक्ष आना बाकी है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल नई व्यवस्था पर अंतरिम रोक नहीं लगाई है। अदालत ने केंद्र सरकार, NPCI और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। इसका मतलब है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार 15 अक्टूबर से प्रस्तावित व्यवस्था पर फिलहाल अदालत की ओर से कोई रोक नहीं है। मामले की अगली सुनवाई संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत के आगे के निर्देशों के आधार पर होगी।