नई दिल्ली - भारतीय राजनीति में दल-बदल कोई नई बात नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े राजनीतिक दलों के बीच नेताओं के आने-जाने की एक अलग तस्वीर सामने रखते हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच के विश्लेषण के मुताबिक, 2022 से 2026 के बीच चुनाव जीतने के बाद कुल 111 मौजूदा सांसदों और विधायकों ने अपनी राजनीतिक पार्टी बदली। इनमें 26 लोकसभा सांसद, 7 राज्यसभा सांसद और 78 विधायक शामिल हैं।
BJP दूसरे नंबर पर, लेकिन सबसे आगे कौन?
आम तौर पर दल-बदल की चर्चा होते ही भारतीय जनता पार्टी यानी BJP का नाम प्रमुखता से सामने आता है। ADR के इस विश्लेषण में भी 29 सांसद-विधायक यानी करीब 26 प्रतिशत नेता BJP में शामिल हुए। इस आधार पर BJP इस सूची में दूसरे स्थान पर रही। लेकिन सबसे ज्यादा सांसद-विधायकों को अपने साथ जोड़ने वाली पार्टी BJP नहीं, बल्कि नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) रही। ADR के मुताबिक 111 दल-बदल करने वाले जनप्रतिनिधियों में से 32 यानी करीब 29 प्रतिशत NPF में शामिल हुए।
NPF में शामिल होने वाले 32 नेताओं का आंकड़ा
ADR के आंकड़ों के अनुसार NPF के बाद BJP में 29 और नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में 20 सांसद-विधायक शामिल हुए। वहीं कांग्रेस में 9 और शिवसेना में 8 जनप्रतिनिधियों के जाने का आंकड़ा सामने आया है। NPP में 6 और PPA में 4 नेताओं के शामिल होने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। इस तरह केवल NPF, BJP और NCPI में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या 81 रही, जो कुल 111 दल-बदल करने वाले सांसद-विधायकों का लगभग 73 प्रतिशत है।
NPF का आंकड़ा क्यों है खास?
ADR ने यह भी स्पष्ट किया है कि NPF के आंकड़े को केवल व्यक्तिगत दल-बदल के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। रिपोर्ट में बताया गया है कि NPF में शामिल होने वाले 32 प्रतिनिधियों का आंकड़ा मुख्य रूप से NDPP-NPF विलय से जुड़ा है। इसलिए इस संख्या में पार्टी विलय का प्रभाव भी शामिल है। ADR ने नेताओं के पार्टी बदलने के मामलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। इनमें व्यक्तिगत रूप से पार्टी छोड़ना और दूसरी पार्टी में जाना, पार्टी विलय, इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी में शामिल होने के बाद उपचुनाव जीतना और अयोग्य ठहराए जाने के बाद दूसरी पार्टी से उपचुनाव जीतना शामिल है।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा दल-बदल?
रिपोर्ट के मुताबिक 2022 से 2026 के बीच सांसदों और विधायकों के पार्टी बदलने के मामले 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सामने आए। नागालैंड 32 मामलों के साथ सबसे ऊपर रहा, जबकि पश्चिम बंगाल में 20 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद तेलंगाना में 9 तथा गोवा और पंजाब में 8-8 मामले सामने आए।
ADR ने यह भी कहा है कि देश में दल-बदल से जुड़े मामलों का कोई व्यवस्थित और आसानी से उपलब्ध आधिकारिक डेटाबेस नहीं है। इसलिए उसकी सूची को पूरी तरह अंतिम या संपूर्ण आंकड़ा नहीं माना जा सकता और कुछ मामले इसमें शामिल न होने की संभावना है। यानी 2022 से 2026 के बीच के आंकड़ों में NPF 32 नेताओं के साथ सबसे अधिक सांसद-विधायकों को अपने साथ जोड़ने वाली पार्टी रही, जबकि BJP 29 नेताओं के साथ दूसरे स्थान पर रही। हालांकि NPF का आंकड़ा बड़े पैमाने पर NDPP-NPF विलय से प्रभावित है, इसलिए इसे व्यक्तिगत दल-बदल के आंकड़े के रूप में सीधे पढ़ना सही नहीं होगा।