मुंबई: घरेलू शेयर बाजार के लिए सप्ताह का पहला कारोबारी दिन सोमवार, 28 सितंबर, निवेशकों के लिए बेहद कमजोर रहा। बाजार खुलते ही सेंसेक्स में तेज गिरावट देखने को मिली और शुरुआती कारोबार में यह 850 अंकों से ज्यादा नीचे चला गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है।
बाजार खुलते ही सेंसेक्स में तेज गिरावट
सोमवार सुबह 9:15 बजे कारोबार शुरू होने के बाद भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव तेजी से बढ़ा। महज दो मिनट के भीतर सुबह 9:17 बजे सेंसेक्स करीब 512 अंक टूटकर 73,383.70 के स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद गिरावट और गहरी हुई। सुबह करीब 9:40 बजे तक सेंसेक्स 870 अंक तक फिसल गया। इससे निवेशकों के बीच बाजार को लेकर चिंता बढ़ गई। बाजार खुलने से पहले ही कमजोर संकेत मिल रहे थे। सोमवार सुबह GIFT Nifty करीब 23,111 अंक के आसपास कारोबार कर रहा था, जिससे घरेलू बाजार में कमजोर शुरुआत के संकेत मिल गए थे।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बढ़ाई चिंता
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी शामिल हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.1% बढ़कर 106.49 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इस महीने अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 18% की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं, अमेरिकी क्रूड फ्यूचर्स 1.5% की तेजी के साथ 93.84 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे आयात लागत और व्यापक आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी वैश्विक अनिश्चितता
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हरमुज जलडमरूमध्य से जुड़ा विवाद भी तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में यहां तनाव बढ़ने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। तेल कीमतों में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों में जोखिम को लेकर सतर्कता बढ़ी है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव
भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली का भी दबाव बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने करीब 3,694 करोड़ रुपये (385.54 मिलियन डॉलर) के भारतीय शेयर बेचे। सितंबर में अब तक विदेशी निवेशकों की निकासी करीब 1.8 अरब डॉलर बताई गई है। वहीं, पूरे साल की बात करें तो विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से निकासी करीब 25.86 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी बाजार की धारणा पर दबाव डाल रही है और इससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है।
शुक्रवार की तेजी पर फिरा पानी
सोमवार की गिरावट ने पिछले कारोबारी सत्र में आई तेजी को काफी हद तक कमजोर कर दिया। शुक्रवार को सेंसेक्स 315.20 अंक चढ़कर 73,895.74 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी में भी 77.40 अंकों की बढ़त दर्ज की गई थी। शुक्रवार को बैंकिंग, ऑटो और गैस से जुड़े शेयरों में खरीदारी देखने को मिली थी। एक्सिस बैंक करीब 2.82% चढ़ा, जबकि महिंद्रा, एशियन पेंट्स और बजाज फाइनेंस जैसे शेयरों में भी तेजी रही थी। हालांकि, सोमवार की कमजोर शुरुआत के बाद निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है।
आगे भी उतार-चढ़ाव की संभावना
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कई कारक फिलहाल भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे माहौल में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा रह सकता है। निवेशकों के लिए वैश्विक बाजारों के संकेतों और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश संबंधी निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।