उत्तरप्रदेश में मानसून की विदाई का दौर शुरू हो गया है। मुजफ्फरनगर और अलीगढ़ समेत पश्चिमी यूपी के कुछ हिस्सों से मानसून पूरी तरह वापस लौट चुका है। मानसून की वापसी के साथ प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश पर भी ब्रेक लगने लगा है और मौसम साफ होने लगा है।मंगलवार सुबह से लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी समेत प्रदेश के कई हिस्सों में धूप खिली। हालांकि, मौसम विभाग की ओर से प्रदेश के 17 जिलों में हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
लगातार बारिश से 8 नदियां उफान पर
मानसून की विदाई शुरू होने के बावजूद प्रदेश के कई इलाकों में बारिश का असर अभी भी दिखाई दे रहा है। लगातार हुई बारिश के चलते 8 नदियां उफान पर हैं। कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जबकि अनेक रास्ते जलमग्न हो चुके हैं।कानपुर में पांडु नदी का पानी सड़कों पर बह रहा है। कई स्थानों पर करीब 8 फीट तक पानी भर गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बिठूर में ट्रैक्टर से पहुंचे विधायक
कानपुर के बिठूर क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा ट्रैक्टर से पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर इलाके की स्थिति का जायजा लिया।जलभराव के कारण प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन भी प्रभावित हुआ है और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कुशीनगर में गंडक नदी से 1,400 परिवार प्रभावित
कुशीनगर में गंडक (नारायणी) नदी में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। इसके चलते 2 गांवों के करीब 1,400 परिवार प्रभावित हुए हैं।वहीं गोंडा में छोटे पुलों के ऊपर से पानी बह रहा है। यहां 18 गांव बाढ़ से घिर गए हैं। जानकारी के मुताबिक घाघरा नदी में 5-6 घर भी बह चुके हैं।
सीतापुर में खतरे के निशान से ऊपर नदियों का जलस्तर
सीतापुर में सरायन और पिरई नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए लोग अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं।कई परिवार ट्रैक्टर और जेसीबी की मदद से जरूरी सामान को सुरक्षित जगहों तक ले जा रहे हैं।
मानसून की विदाई के बीच बाढ़ की चुनौती
प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों से मानसून की विदाई शुरू होने और मौसम साफ होने के बावजूद कई जिलों में नदियों के बढ़े जलस्तर ने परेशानी बढ़ा रखी है। एक तरफ 17 जिलों में हल्की बारिश का अलर्ट है, वहीं दूसरी ओर बाढ़ प्रभावित इलाकों में जलस्तर और जलभराव की स्थिति पर नजर बनी हुई है।