New Delhi | केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तीन-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के विद्यार्थियों को राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को भी कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों की तरह इस नीति के तहत समान छूट दी जाए। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं। अदालत ने केंद्र सरकार और CBSE से कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए भी मौजूदा संक्रमणकालीन व्यवस्था लागू करने को कहा है।
क्या है तीन-भाषा नीति?
CBSE ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप अपने पाठ्यक्रम में तीन भाषाओं के अध्ययन की व्यवस्था लागू की है। इसके तहत विद्यार्थियों को दो भारतीय भाषाओं सहित तीन भाषाओं का अध्ययन करना है। इस नीति को लेकर कक्षा 6 के मौजूदा विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से इसलिए विवाद हुआ क्योंकि नई व्यवस्था इसी शैक्षणिक सत्र से लागू की जा रही थी। अभिभावकों और विद्यार्थियों की ओर से अचानक भाषा संयोजन बदलने तथा तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलने से जुड़ी चिंताएं अदालत के सामने रखी गई थीं।
कक्षा 6 के छात्रों को क्या मिलेगी राहत?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों को वही छूट मिलेगी जो पहले से कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों को दी गई है। इसका अर्थ है कि विद्यार्थियों को तीसरी भाषा का अध्ययन करना होगा, लेकिन इस भाषा को लेकर कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में उन्हें उसी तरह की बाध्यता का सामना नहीं करना होगा। CBSE की व्यवस्था के अनुसार तीसरी भाषा का मूल्यांकन आंतरिक स्तर पर किया जाएगा और इसके आधार पर विद्यार्थी को कक्षा 10 में पास या फेल करने की स्थिति नहीं बनेगी।
केंद्र सरकार ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया कि अधिकांश CBSE स्कूल नई तीन-भाषा व्यवस्था के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार 28,819 CBSE स्कूलों में करीब 99 प्रतिशत स्कूलों में आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, जबकि लगभग 1.2 प्रतिशत स्कूलों में अभी कुछ सुविधाओं की जरूरत है। केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि मौजूदा कक्षा 6 को इस वर्ष छूट देने से नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को कक्षा 7 और 8 में अपेक्षित भाषा-अध्ययन की निरंतरता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, अदालत ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को भी समान राहत देने का निर्देश दिया।
17 सितंबर को भी कोर्ट ने दिया था सुझाव
इससे पहले 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए इस शैक्षणिक वर्ष में कुछ राहत देने पर विचार करने को कहा था। अदालत ने विद्यार्थियों को अचानक नई भाषा व्यवस्था में लाने से होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों पर विचार करने को कहा था। अब 28 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने कक्षा 6 के विद्यार्थियों को कक्षा 7 के छात्रों के समान छूट देने का निर्देश दिया है। तीन-भाषा नीति से जुड़े व्यापक मुद्दे पर आगे भी सुनवाई जारी रहेगी।
छात्रों और अभिभावकों के लिए क्या बदलेगा?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों को नई भाषा व्यवस्था के अचानक लागू होने से जुड़े दबाव से राहत मिलेगी। साथ ही CBSE को स्कूलों में भाषा शिक्षण से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं और संसाधनों को व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। यह राहत मौजूदा कक्षा 6 के बैच के लिए है। भविष्य में तीन-भाषा नीति के सामान्य कार्यान्वयन और उससे जुड़े नियमों पर CBSE तथा अदालत की आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।