लखनऊ - उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का मुद्दा लगातार चर्चा में है। कांग्रेस की ओर से गठबंधन में कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 28 सितंबर को कहा कि पार्टी 403 सीटों वाली विधानसभा में 150 से कम सीटों पर चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं है और सीट शेयरिंग पर फैसला अक्टूबर में होने की संभावना है।
कांग्रेस की मांग पर सपा सांसद की सलाह
कांग्रेस की इस मांग के बीच समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने सीटों की संख्या के बजाय जमीनी स्थिति को आधार बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को व्यावहारिक रुख अपनाते हुए उन विधानसभा सीटों पर फोकस करना चाहिए, जहां उसका संगठन और चुनावी स्थिति मजबूत है। रामजी लाल सुमन के मुताबिक, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में सपा और कांग्रेस के लिए मिलकर चुनाव लड़ना महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों दल बातचीत के जरिए सीटों के बंटवारे का ऐसा फॉर्मूला तैयार कर लेंगे, जिस पर आपसी सहमति बन सके।
अखिलेश यादव भी दे चुके हैं जीत की संभावना का संकेत
सीट शेयरिंग को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन जारी रहेगा। उन्होंने सीटों की संख्या को अकेला आधार बनाने के बजाय संबंधित विधानसभा क्षेत्र में चुनाव जीतने की संभावना को महत्व देने की बात कही थी। अखिलेश यादव के इस रुख का मतलब यह है कि सीटों के बंटवारे में दोनों पार्टियां अपने-अपने संगठन, पिछले चुनावी प्रदर्शन और संबंधित सीट पर संभावनाओं को ध्यान में रख सकती हैं। दोनों दल उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों को लेकर अलग-अलग स्तर पर आकलन कर रहे हैं।
150 सीटों पर कांग्रेस का दावा
कांग्रेस की ओर से हाल के दिनों में सीटों को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। सितंबर में कुछ रिपोर्टों में 125 से 135 सीटों की संभावित मांग का उल्लेख था, जबकि अब प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सार्वजनिक तौर पर 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ने की बात कही है। कांग्रेस ने यह भी कहा है कि उसके पास राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संभावित उम्मीदवारों का आधार मौजूद है। हालांकि गठबंधन की स्थिति में कितनी सीटें कांग्रेस को मिलेंगी और कितनी सपा या अन्य सहयोगियों के हिस्से में जाएंगी, इस पर अंतिम सहमति अभी बाकी है।
अक्टूबर में तस्वीर हो सकती है साफ
सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अक्टूबर में आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। अंतिम समझौते के लिए दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी भी जरूरी होगी। फिलहाल सपा और कांग्रेस की ओर से गठबंधन को लेकर सकारात्मक संकेत दिए जा रहे हैं, लेकिन सीटों की संख्या पर दोनों पक्षों की स्थिति अलग-अलग दिखाई दे रही है। ऐसे में आने वाले दौर की बातचीत यह तय करेगी कि 2027 के चुनाव में दोनों दल किस सीट बंटवारे के फॉर्मूले पर सहमत होते हैं।