कोलकाता: उत्तर 24 परगना जिले के बेलघरिया निवासी एक मध्यमवर्गीय दंपत्ति अपने साढ़े पांच महीने के मासूम बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए एक नामुमकिन सी दिखने वाली जंग लड़ रहे हैं। बच्चे को 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-1' (SMA Type-1) नाम की अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारी का पता चला है। इस बीमारी के स्थाई इलाज के लिए अमेरिका से आने वाली जीन थेरेपी 'ज़ोलगेनेस्मा' (Zolgensma) इंजेक्शन की आवश्यकता है, जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत लगभग ₹17 करोड़ है। इतनी भारी-भरकम राशि जुटाने में पूरी तरह असमर्थ माता कोयल और पिता सुप्रियो अपने मासूम बच्चे को गोद में लेकर मुख्यमंत्री के जनता दरबार में मदद की गुहार लगाने पहुंचे।
3 महीने की उम्र में बिगड़ी स्थिति: न गर्दन संभल रही, न हाथ-पैर चल रहे
शुरुआती लक्षणों से बीमारी का खुलासा: माता-पिता के अनुसार, जन्म के शुरुआती दो-तीन महीनों तक बच्चा सामान्य लग रहा था। लेकिन 3 से 4 महीने के होने पर जब सामान्य बच्चों की गर्दन सख्त होने लगती है और वे हाथ-पैर हिलाने लगते हैं, तब उनके बच्चे में कोई हलचल नहीं देखी गई। न्यूरो-पीडियाट्रिशियन की जांच में SMA-1 की पुष्टि: बच्चे के हाथ-पैर न हिला पाने और मांसपेशियों के शिथिल होने पर माता-पिता ने बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श किया। इसके बाद जब न्यूरो-पीडियाट्रिशियन के निर्देश पर जेनेटिक टेस्ट कराया गया, तो करीब 15-20 दिनों बाद आई रिपोर्ट में 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-1' (SMA-1) की पुष्टि हुई। वर्तमान में पीयरलेस अस्पताल में इलाज: बच्चे का प्राथमिक इलाज और ओरल सॉल्यूशन मेडिकेशन वर्तमान में पीयरलेस अस्पताल में डॉ. संयुक्ता डे की देखरेख में चल रहा है।
अमेरिका से आएगा ₹17 करोड़ का इंजेक्शन: सामान्य परिवार के लिए असंभव चुनौती
एकमात्र उम्मीद 'जीन थेरेपी': डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे को नया जीवन देने और मांसपेशियों की शक्ति लौटाने का एकमात्र उपाय यह एक बार लगने वाला जीन थेरेपी इंजेक्शन (ज़ोलगेनेस्मा) है, जो अमेरिका से मंगाया जाता है। ₹17 करोड़ की भारी लागत: पिता सुप्रियो ने रुंधे गले से बताया कि किसी भी आम और साधारण परिवार के लिए ₹17 करोड़ की रकम जुटाना कल्पना से भी परे है। समय रहते यह दवा न मिले, तो बीमारी फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर जानलेवा रूप ले सकती है।
जनता दरबार में सीएम ने दिया आश्वासन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बढ़ाया हाथ
जनता दरबार में मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद दंपत्ति ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें सांत्वना दी है और आश्वासन दिया है कि सरकार व प्रशासन की ओर से बच्चे की जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास और सहायता की जाएगी। सीएमओ डॉक्टर ने दान किया एक महीने का वेतन: इस मानवीय संकट के बीच एक प्रेरणादायक पहल भी देखने को मिली। जनता दरबार में उपस्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ इंस्पेक्टर) डॉ. गौतम दास ने अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बच्चे के इलाज के लिए अपना पूरे एक महीने का वेतन दान करने का ऐलान किया। माता-पिता ने उनके प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे अपने बच्चे के लिए बड़ा आशीर्वाद बताया। जनता और समाज से क्राउडफंडिंग की अपील: माता कोयल और पिता सुप्रियो ने मीडिया के माध्यम से राज्य और देशवासियों से हाथ जोड़कर अपील की है कि अगर समाज का हर नागरिक और सामर्थ्यवान व्यक्ति थोड़ा-थोड़ा योगदान दे, तो उनका साढ़े पांच महीने का बच्चा बच सकता है।