मुंबई - चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी SIR को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है और इसे ‘वोट चोरी’ से जोड़ रही है। अब शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक को लेकर सवाल उठाते हुए बिहार और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के आंकड़ों का हवाला दिया। निरुपम ने पूछा कि अगर बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं तो दावे और आपत्तियां दर्ज कराने वाले लोगों की संख्या इतनी कम क्यों रही।
‘SIR वैधानिक प्रक्रिया’, निरुपम ने गिनाए कारण
संजय निरुपम ने कहा कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूचियों को अपडेट और शुद्ध करना है। उनके मुताबिक इस प्रक्रिया के तहत ऐसे नामों की पहचान की जा रही है जो मृत मतदाताओं, स्थानांतरित हो चुके लोगों, दोहरी प्रविष्टियों या अन्य पात्रता संबंधी समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं। निरुपम ने दावा किया कि जो लोग देश के नागरिक नहीं हैं या जिनका नाम एक से अधिक मतदाता सूचियों में दर्ज है, ऐसे नामों को भी जांच के बाद हटाने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ वाले आरोप पर सवाल उठाया।
बिहार के आंकड़ों का दिया हवाला
शिवसेना प्रवक्ता ने बिहार में SIR के दौरान हटाए गए नामों और दावे-आपत्ति प्रक्रिया का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि करीब 67 लाख नामों को लेकर आपत्तियां सामने आईं, लेकिन इनमें से सिर्फ लगभग 33 हजार लोगों ने दावा किया। निरुपम का तर्क था कि यदि कांग्रेस या आरजेडी यह मानती है कि बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए, तो प्रभावित मतदाताओं को सामने आकर दावे और अपील करनी चाहिए थी। हालांकि, इन आंकड़ों और SIR की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
पश्चिम बंगाल का भी उठाया मुद्दा
निरुपम ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए करीब 40 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया और इसे अवैध बांग्लादेशी मतदाताओं से जोड़ते हुए कांग्रेस से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसे मतदाता कांग्रेस के वोट बैंक थे। यह आरोप निरुपम के राजनीतिक बयान का हिस्सा है। मतदाता सूची में किसी व्यक्ति की नागरिकता या पात्रता से जुड़े मामलों का निर्धारण संबंधित कानूनी और चुनावी प्रक्रिया के तहत होता है। पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े मामलों पर बड़ी संख्या में अपीलें भी सामने आई हैं। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 18 सितंबर तक राज्य में करीब 38.20 लाख अपीलें दाखिल हुई थीं, जिनमें से 1.02 लाख का निपटारा किया गया था।
कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच जारी विवाद
SIR को लेकर कांग्रेस चुनाव आयोग पर पारदर्शिता और मतदाता नामों के हटाए जाने को लेकर सवाल उठाती रही है। हालिया विवाद के बीच चुनाव आयोग ने भी प्रक्रिया को लेकर कई कदमों की घोषणा की है, जिनमें कुछ राज्यों में घर-घर जाकर सत्यापन और मतदाताओं की मदद के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं शामिल हैं। वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। दूसरी ओर, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी बहस अभी जारी है।
‘वोट चोरी’ के आरोप पर सियासत तेज
SIR को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़ रहे हैं। संजय निरुपम ने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि हटाए गए नामों में बड़ी संख्या वास्तविक मतदाताओं की थी, तो उनके दावे और आपत्तियों का आंकड़ा क्या बताता है। वहीं, कांग्रेस इस पूरी प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है। ऐसे में SIR अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।