मध्य प्रदेश में व्यापक और तेज बारिश का दौर फिलहाल कमजोर पड़ा है। सोमवार, 3 अगस्त को प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में बादल छाए रहे, जबकि कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। उस दिन राज्य में औसतन केवल 2.3 मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि सामान्य वर्षा 11.5 मिलीमीटर मानी जाती है। यानी एक दिन की बारिश सामान्य से करीब 80 प्रतिशत कम रही।
हालांकि, बारिश का यह कमजोर दौर ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 4 और 5 अगस्त को प्रदेश के दोनों मौसम उपखंडों में गरज-चमक और झोंकेदार हवाओं की संभावना जताई है। इसके बाद 6, 7 और 8 अगस्त को पूर्वी तथा पश्चिमी मध्य प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
5 अगस्त तक पूरी तरह शुष्क नहीं रहेगा मौसम
प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कमजोर जरूर हुई हैं, लेकिन 5 अगस्त तक मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की संभावना नहीं है। कई जिलों में बादलों के साथ स्थानीय स्तर पर हल्की बारिश, बूंदाबांदी और गरज-चमक हो सकती है। IMD के मुताबिक 4 और 5 अगस्त को पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में आकाशीय बिजली तथा झोंकेदार हवाओं का खतरा रहेगा। स्थानीय मौसम में तेजी से बदलाव हो सकता है, इसलिए खुले क्षेत्रों और खेतों में काम करने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
6 अगस्त से इन क्षेत्रों में बढ़ेगी बारिश
IMD की ताजा चेतावनी में 6 से 8 अगस्त के दौरान पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश—दोनों हिस्सों में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
| तारीख | पश्चिमी मध्य प्रदेश | पूर्वी मध्य प्रदेश |
|---|---|---|
| 4 अगस्त | गरज-चमक और झोंकेदार हवा | गरज-चमक और झोंकेदार हवा |
| 5 अगस्त | गरज-चमक और झोंकेदार हवा | गरज-चमक और झोंकेदार हवा |
| 6 अगस्त | कहीं-कहीं भारी बारिश और गरज-चमक | कहीं-कहीं भारी बारिश और गरज-चमक |
| 7 अगस्त | कहीं-कहीं भारी बारिश और गरज-चमक | कहीं-कहीं भारी बारिश और गरज-चमक |
| 8 अगस्त | कहीं-कहीं भारी बारिश | कहीं-कहीं भारी बारिश |
| 9-10 अगस्त | कोई उपखंड स्तरीय चेतावनी नहीं | कोई उपखंड स्तरीय चेतावनी नहीं |
“कोई चेतावनी नहीं” का अर्थ यह नहीं है कि बारिश बिल्कुल नहीं होगी। इसका मतलब केवल यह है कि उस अवधि के लिए भारी बारिश या गंभीर मौसम की उपखंड स्तरीय चेतावनी जारी नहीं की गई है।
क्या केवल पश्चिमी विक्षोभ से सक्रिय होगा मानसून?
बारिश की वापसी को केवल पश्चिमी विक्षोभ से जोड़ना पूरी तरह सटीक नहीं होगा। मौसम केंद्र भोपाल की नवीनतम उपलब्ध सिनॉप्टिक रिपोर्ट में मानसूनी द्रोणिका, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के आसपास बने चक्रवाती परिसंचरण तथा जम्मू संभाग पर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का उल्लेख किया गया है।
IMD ने 6 से 8 अगस्त की भारी बारिश का पूर्वानुमान जरूर दिया है, लेकिन इसे किसी एक पश्चिमी विक्षोभ का सीधा परिणाम नहीं बताया। इसलिए खबर में “विभिन्न मौसमी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से बारिश बढ़ेगी” लिखना अधिक तथ्यपरक रहेगा। राष्ट्रीय पूर्वानुमान में भी 6 से 8 अगस्त के बीच दोनों मध्य प्रदेश उपखंडों में भारी वर्षा की संभावना दर्ज है।
प्रदेश में अब तक 403.8 मिलीमीटर बारिश
IMD के 3 अगस्त तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान औसतन 403.8 मिलीमीटर बारिश हुई है। इस तारीख तक सामान्य वर्षा 482 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। इस प्रकार प्रदेश में सामान्य से 16 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि IMD की वर्गीकरण व्यवस्था में सामान्य से 19 प्रतिशत कम से 19 प्रतिशत अधिक वर्षा को “सामान्य” श्रेणी में रखा जाता है। इसलिए राज्य का 16 प्रतिशत का अंतर तकनीकी रूप से अभी सामान्य श्रेणी में है, लेकिन वास्तविक औसत सामान्य आंकड़े से नीचे बना हुआ है।
| क्षेत्र | वास्तविक वर्षा | सामान्य वर्षा | अंतर | IMD श्रेणी |
|---|---|---|---|---|
| मध्य प्रदेश | 403.8 मिमी | 482.0 मिमी | -16% | सामान्य |
| पश्चिमी मध्य प्रदेश | 390.7 मिमी | 446.1 मिमी | -12% | सामान्य |
| पूर्वी मध्य प्रदेश | 420.9 मिमी | 528.9 मिमी | -20% | कम वर्षा |
पूर्वी मध्य प्रदेश का वर्षा अंतर 20 प्रतिशत तक पहुंचने के कारण यह उपखंड अब कम वर्षा वाली श्रेणी में है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में वर्षा सामान्य से 12 प्रतिशत कम है, लेकिन वह IMD की सामान्य श्रेणी में बना हुआ है।
पूर्वी मध्य प्रदेश में कई जिले बारिश से पीछे
पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी सबसे अधिक रीवा जिले में दर्ज की गई है। 3 अगस्त तक रीवा में सामान्य से करीब 65 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी। इसके बाद मैहर में 44 प्रतिशत, सिंगरौली में 35 प्रतिशत, टीकमगढ़ में 34 प्रतिशत, सागर में 32 प्रतिशत और मंडला में 31 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
सीधी में वर्षा सामान्य से 30 प्रतिशत, नरसिंहपुर में 28 प्रतिशत, छतरपुर और पन्ना में 26-26 प्रतिशत तथा जबलपुर में 25 प्रतिशत कम रही। वहीं अनूपपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडोरी, सिवनी, शहडोल और उमरिया फिलहाल सामान्य श्रेणी में हैं, भले ही इनमें से अधिकतर जिलों में वास्तविक बारिश सामान्य आंकड़े से कुछ कम है।
इसलिए पूर्वी मध्य प्रदेश के सभी जिलों को कम वर्षा वाला बताना सही नहीं होगा। उपखंड स्तर पर बारिश 20 प्रतिशत कम जरूर है, लेकिन जिलावार स्थिति अलग-अलग है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई जिलों में बड़ा अंतर
पश्चिमी मध्य प्रदेश में सबसे अधिक वर्षा की कमी मुरैना में दर्ज हुई, जहां सामान्य से 50 प्रतिशत कम बारिश हुई। दतिया में 49 प्रतिशत, नर्मदापुरम में 38 प्रतिशत, अलीराजपुर में 32 प्रतिशत, शिवपुरी में 30 प्रतिशत और शाजापुर व श्योपुर में 28-28 प्रतिशत कम बारिश हुई।
विदिशा में 26 प्रतिशत, अशोकनगर में 24 प्रतिशत, धार में 21 प्रतिशत और रतलाम में 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। भोपाल में बारिश सामान्य से तीन प्रतिशत, ग्वालियर में आठ प्रतिशत और उज्जैन में 10 प्रतिशत कम है, जो फिलहाल IMD की सामान्य श्रेणी में आते हैं।
केवल तीन जिले ‘अधिक वर्षा’ की आधिकारिक श्रेणी में
3 अगस्त तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पश्चिमी मध्य प्रदेश के तीन जिले स्पष्ट रूप से अधिक वर्षा वाली श्रेणी में हैं:
- बुरहानपुर: सामान्य से 51 प्रतिशत अधिक बारिश
- खरगोन: सामान्य से 23 प्रतिशत अधिक बारिश
- देवास: सामान्य से 21 प्रतिशत अधिक बारिश
बड़वानी और खंडवा में सामान्य से आठ प्रतिशत, इंदौर में तीन प्रतिशत तथा भिंड में सामान्य के बराबर वर्षा हुई है। इन जिलों में वास्तविक आंकड़ा सामान्य से ऊपर या बराबर है, लेकिन IMD की तकनीकी श्रेणी में इन्हें “सामान्य वर्षा” वाला जिला माना गया है।
खरगोन का देजला-देवाड़ा जलाशय हुआ ओवरफ्लो
प्रदेश के औसत वर्षा आंकड़ों में कमी के बावजूद कुछ स्थानीय क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है। खरगोन जिले का देजला-देवाड़ा जलाशय पूरी क्षमता तक भरने के बाद स्पिलवे से ओवरफ्लो होना शुरू हो गया है।
स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक रविवार रात से जलाशय का पानी स्पिलवे से बह रहा है। बांध से लगभग आठ से नौ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई को सहायता मिलती है। खरगोन जिला प्रशासन के आधिकारिक विवरण में भी देजला-देवाड़ा को कुंदा नदी पर बना बड़ा सिंचाई जलाशय बताया गया है।
सोमवार को सीधी-सिंगरौली में हुई भारी बारिश
भले ही प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश कमजोर रही, लेकिन सोमवार को सीधी और सिंगरौली जिलों में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई।
सीधी जिले के सिहावल में 96 मिलीमीटर, सिंगरौली के चित्रांगी में 88.3 मिलीमीटर और रतलाम में 65 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। इससे स्पष्ट है कि प्रदेशव्यापी गतिविधियां कमजोर होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर तेज बारिश की घटनाएं जारी हैं।
किसानों को 6 अगस्त से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
भारी बारिश की संभावना को देखते हुए किसान खेतों में जल निकासी की व्यवस्था जांच लें। निचले खेतों में पानी जमा होने से सोयाबीन, मक्का, कपास, दाल और सब्जी की फसलों की जड़ों को नुकसान हो सकता है।
बारिश या गरज-चमक के समय खाद, कीटनाशक और खरपतवारनाशक का छिड़काव टालना चाहिए। खुले खेत में आकाशीय बिजली चमकने पर पेड़, बिजली के खंभे और धातु की मशीनों से दूर रहना जरूरी है। कटी फसल, बीज, उर्वरक और कृषि उपकरणों को तिरपाल से सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।
अगले पांच दिनों में क्या बदल सकता है?
बारिश का वास्तविक वितरण जिले और तहसील के अनुसार अलग हो सकता है। “कहीं-कहीं भारी बारिश” का अर्थ यह नहीं है कि पूरे प्रदेश में एक साथ मूसलाधार बारिश होगी।
कुछ जिलों में केवल बादल और बूंदाबांदी हो सकती है, जबकि किसी दूसरे जिले में कम समय में तेज बारिश दर्ज हो सकती है। इसलिए जिला स्तरीय नाउकास्ट, बिजली चेतावनी और स्थानीय प्रशासन के अपडेट को प्राथमिकता देना चाहिए।
FAQ: मध्य प्रदेश के मौसम से जुड़े प्रमुख सवाल
मध्य प्रदेश में तेज बारिश कब से शुरू हो सकती है?
IMD ने 6 से 8 अगस्त के बीच पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
क्या 5 अगस्त तक बारिश बिल्कुल नहीं होगी?
नहीं। 4 और 5 अगस्त को कहीं-कहीं हल्की बारिश, गरज-चमक और झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। व्यापक भारी बारिश की गतिविधि 6 अगस्त से बढ़ने का अनुमान है।
मध्य प्रदेश में सामान्य से कितनी कम बारिश हुई है?
3 अगस्त तक प्रदेश में 403.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 482 मिलीमीटर है। यानी बारिश सामान्य से 16 प्रतिशत कम है।
पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहां ज्यादा कमी है?
पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से 20 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 12 प्रतिशत कम है। पूर्वी हिस्सा तकनीकी रूप से कम वर्षा की श्रेणी में है।
सबसे कम बारिश किस जिले में हुई है?
प्रतिशत अंतर के आधार पर रीवा में सामान्य से 65 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में मुरैना 50 प्रतिशत और दतिया 49 प्रतिशत की कमी के साथ सबसे पीछे हैं।
क्या बारिश केवल पश्चिमी विक्षोभ के कारण बढ़ेगी?
IMD ने किसी एक सिस्टम को अकेला कारण नहीं बताया है। मानसूनी द्रोणिका, अलग-अलग चक्रवाती परिसंचरण और पश्चिमी विक्षोभ समेत कई मौसमी प्रणालियां सक्रिय हैं।