नई दिल्ली। NEET प्रोटेस्ट के दौरान हुई हिंसा और छात्रों पर दर्ज एफआईआर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट किया कि छात्रों की आड़ में हिंसा या गंभीर अपराध करने वाले लोगों को किसी तरह की राहत नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने ज्यादती की है तो उसे भी संरक्षण नहीं मिलेगा।
एफआईआर और आरोपियों की होगी अलग-अलग जांच
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले यह देखा जाएगा कि कुल कितनी एफआईआर दर्ज हुई हैं और उनमें कितने लोगों का आपराधिक इतिहास है। अदालत ने यह भी पूछा कि मामलों को बंद करने या वापस लेने की प्रक्रिया क्या होगी।
सरकार बोली- छात्रों पर कार्रवाई नहीं चाहते
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार छात्रों पर कार्रवाई नहीं चाहती और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि प्रदर्शन के दौरान शामिल गंभीर अपराधी तत्वों को राहत नहीं दी जा सकती। सरकार ने बताया कि 2,738 लोगों की पहचान की गई है, जिनके खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हैं।
बल प्रयोग और फेस रिकॉग्निशन पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग, बिना वर्दी वाले लोगों की मौजूदगी और फेस रिकॉग्निशन तकनीक के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। सरकार ने जवाब दिया कि पहचान केवल फेस रिकॉग्निशन से नहीं, बल्कि फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर भी की गई है।
19 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने पर विचार किया जाएगा। समिति के कार्यक्षेत्र और प्रोटोकॉल पर भी फैसला होगा। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी और सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।