मध्य प्रदेश के दूरस्थ और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी वाले क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी NHM ने ‘यू कोट, वी पे’ व्यवस्था को आगे बढ़ाया है। इसके तहत डॉक्टर आवेदन करते समय अपनी विशेषज्ञता, पसंद के सरकारी अस्पताल और अपेक्षित मासिक पारिश्रमिक की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। भर्ती विज्ञापन में अस्पताल या स्वास्थ्य संस्था के अनुसार रिक्त पद और संबंधित संस्था का कोड जारी किया जाता है। एक ही अस्पताल और विशेषज्ञता के लिए आवेदन करने वाले पात्र डॉक्टरों में कम पारिश्रमिक कोट करने वाले उम्मीदवार को चयन में प्राथमिकता दिए जाने की व्यवस्था बताई गई है। हालांकि अंतिम नियुक्ति योग्यता, दस्तावेज सत्यापन, उपलब्ध बजट और संबंधित भर्ती विज्ञापन की शर्तों के अनुसार ही होगी।
क्या है ‘You Quote, We Pay’ योजना?
इस मॉडल का उद्देश्य उन सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध कराना है, जहां सामान्य वेतनमान पर चिकित्सक काम करने के इच्छुक नहीं मिलते। इसके अंतर्गत सरकार हर पद के लिए केवल एक निश्चित समान वेतन घोषित करने के बजाय पात्र डॉक्टरों से उनकी अपेक्षित राशि पूछती है। केंद्र सरकार भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राज्यों को विशेषज्ञ डॉक्टर आकर्षित करने के लिए Negotiable Salary यानी बातचीत के आधार पर पारिश्रमिक तय करने की अनुमति देती है। आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों में इस व्यवस्था को ‘You Quote, We Pay’ जैसे मॉडल के रूप में दर्ज किया गया है।
भर्ती प्रक्रिया ऐसे समझें
| चरण | प्रस्तावित प्रक्रिया |
|---|---|
| रिक्त पदों की जानकारी | अस्पताल और विशेषज्ञता के अनुसार पद प्रकाशित होंगे |
| संस्था की पहचान | प्रत्येक अस्पताल या स्वास्थ्य संस्था का कोड दिया जाएगा |
| डॉक्टर का आवेदन | पात्र डॉक्टर पसंद की संस्था और पद का चयन करेंगे |
| वेतन का प्रस्ताव | आवेदन में अपेक्षित अधिकतम मासिक पारिश्रमिक बताया जाएगा |
| तुलनात्मक चयन | समान पद के पात्र आवेदकों में कम राशि कोट करने वाले को प्राथमिकता |
| अंतिम नियुक्ति | योग्यता, दस्तावेज और आधिकारिक नियमों की जांच के बाद |
यह सामान्य नौकरी की ‘नीलामी’ नहीं
इस व्यवस्था को केवल “सबसे कम वेतन मांगने वाले को नौकरी” कहना अधूरा होगा। सबसे पहले उम्मीदवार के पास संबंधित विशेषज्ञता की निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल काउंसिल पंजीयन और विज्ञापन में मांगा गया अनुभव होना जरूरी है।
वेतन की तुलना समान अस्पताल और समान विशेषज्ञ पद के पात्र उम्मीदवारों के बीच किए जाने की बात है। अयोग्य व्यक्ति केवल कम वेतन बताकर चयनित नहीं हो सकता। नियुक्ति प्रक्रिया का अंतिम आधार NHM के मौजूदा विज्ञापन और चयन नियम होंगे।
किन विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती की तैयारी?
ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस व्यवस्था में मुख्य रूप से इन पदों को शामिल किया गया है:
- रेडियोलॉजिस्ट
- स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
- शिशु रोग विशेषज्ञ
- कुछ चिह्नित संजीवनी क्लीनिकों के चिकित्सा अधिकारी
अलग-अलग अस्पतालों में रिक्त पदों की संख्या और विशेषज्ञता अलग हो सकती है। इसलिए आवेदन करने वाले डॉक्टरों को NHM मध्य प्रदेश के आधिकारिक विज्ञापन में संस्थावार सूची, पद का कोड, योग्यता और पारिश्रमिक की अधिकतम सीमा जांचनी होगी।
क्या डॉक्टर मनचाही रकम मांग सकते हैं?
डॉक्टर आवेदन में अपना अपेक्षित पारिश्रमिक बता सकते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सरकार बिना किसी सीमा के मांगी गई पूरी राशि देने के लिए बाध्य होगी।
पारिश्रमिक संबंधित पद के लिए स्वीकृत बजट, अधिकतम अनुमत सीमा, अस्पताल की श्रेणी और भर्ती नियमों के भीतर ही तय होगा। कम राशि कोट करना भी चयन की अकेली शर्त नहीं है। उम्मीदवार को संबंधित पद की सभी अनिवार्य योग्यताएं पूरी करनी होंगी।
मध्य प्रदेश में सितंबर 2025 में सामने आई इसी मॉडल की एक भर्ती व्यवस्था में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए मूल पारिश्रमिक और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन को मिलाकर अधिकतम राशि निर्धारित की गई थी। वर्तमान भर्ती में लागू वास्तविक सीमा के लिए नवीनतम आधिकारिक विज्ञापन को ही अंतिम माना जाना चाहिए।
योजना नई नहीं, अब दायरा बढ़ाने पर जोर
‘You Quote, We Pay’ मॉडल को मध्य प्रदेश में पहली बार अगस्त 2026 में शुरू किया गया बिल्कुल नया कार्यक्रम नहीं माना जाना चाहिए। NHM मध्य प्रदेश ने 2025 में भी सरकारी अस्पतालों और फर्स्ट रेफरल यूनिट्स में स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट और शिशु रोग विशेषज्ञों की कमी दूर करने के लिए इस तरह की भर्ती प्रक्रिया अपनाई थी। ताजा व्यवस्था को पहले से लागू मॉडल की निरंतरता या विस्तार के रूप में देखा जा सकता है। अब संस्थावार कोड, ऑनलाइन वेतन कोट और चयन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है।
दूरस्थ अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी क्यों बड़ी चुनौती?
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को सामान्य जांच, प्रसव संबंधी जटिलताओं, बच्चों की गंभीर बीमारियों और रेडियोलॉजी जांच के लिए जिला मुख्यालय या बड़े शहर जाना पड़ता है।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता सुरक्षित प्रसव और आपातकालीन सर्जरी के लिए महत्वपूर्ण होती है। शिशु रोग विशेषज्ञ नवजात और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज में आवश्यक हैं, जबकि रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में कई अस्पतालों में सोनोग्राफी और दूसरी जांच प्रभावित हो सकती हैं।
NHM के अंतर्गत केंद्र सरकार राज्यों को कठिन क्षेत्रों में चिकित्सकों के लिए अतिरिक्त भत्ता, रहने की सुविधा, प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन और बातचीत के आधार पर वेतन जैसे विकल्प अपनाने की अनुमति देती है।
मरीजों को क्या लाभ मिल सकता है?
व्यवस्था सफल रहने पर दूरस्थ सरकारी अस्पतालों में खाली विशेषज्ञ पद भरने में मदद मिल सकती है। इससे मरीजों को स्थानीय स्तर पर इलाज मिलने, रेफरल कम होने और जिला अस्पतालों पर दबाव घटने की संभावना है।
हालांकि योजना का वास्तविक असर केवल नियुक्ति संख्या से नहीं, बल्कि इन बातों से तय होगा:
- चयनित डॉक्टर कितने समय तक संबंधित अस्पताल में काम करते हैं
- अस्पताल में जरूरी उपकरण और सहायक स्टाफ उपलब्ध हैं या नहीं
- दवाओं, जांच और ऑपरेशन की सुविधाएं नियमित रूप से मिलती हैं या नहीं
- दूरस्थ क्षेत्र में डॉक्टरों के रहने और सुरक्षा की क्या व्यवस्था है
इसलिए पारिश्रमिक बढ़ाने के साथ कार्यस्थल, आवास, चिकित्सा उपकरण और प्रशासनिक सहयोग में सुधार भी जरूरी होगा।
मध्य प्रदेश में 14 मेडिकल कॉलेज स्वीकृत, छह आदिवासी जिलों में
आदिवासी क्षेत्रों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों की उपलब्धता से जुड़े सवालों के बीच केंद्र सरकार ने बताया है कि केंद्रीय प्रायोजित योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश के लिए कुल 14 सरकारी मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं।
इनमें छह मेडिकल कॉलेज आदिवासी बहुल जिलों में स्वीकृत किए गए हैं:
| क्रम | जिला |
|---|---|
| 1 | मंडला |
| 2 | शहडोल |
| 3 | छिंदवाड़ा |
| 4 | सिंगरौली |
| 5 | रतलाम |
| 6 | खंडवा, पूर्व निमाड़ |
यह विवरण केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 5 दिसंबर 2025 को लोकसभा में दिए गए एक लिखित उत्तर में दिया था। केंद्र की योजना में ऐसे जिलों को प्राथमिकता दी गई, जहां पहले से सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज उपलब्ध नहीं था।
‘छह नए मेडिकल कॉलेज खुलेंगे’ लिखना पूरी तरह सही नहीं
इस आंकड़े को वर्तमान में किए गए छह नए मेडिकल कॉलेजों के अलग ऐलान के रूप में प्रस्तुत करना भ्रामक हो सकता है। आधिकारिक संसदीय उत्तर में इन कॉलेजों को केंद्रीय योजना के अंतर्गत स्वीकृत मेडिकल कॉलेज बताया गया है।
स्वीकृति, निर्माण, प्रवेश शुरू होने और पूर्ण संचालन की स्थिति प्रत्येक जिले में अलग हो सकती है। इसलिए खबर में “छह आदिवासी जिलों में मेडिकल कॉलेज स्वीकृत” लिखना अधिक सटीक है। सभी छह कॉलेजों को अगस्त 2026 के बाद खुलने वाला नया संस्थान नहीं माना जा सकता।
मेडिकल कॉलेज खुलने से स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को कैसे मदद मिलती है?
सरकारी मेडिकल कॉलेज केवल डॉक्टरों की पढ़ाई का संस्थान नहीं होता। उसके साथ आमतौर पर शिक्षण अस्पताल भी जुड़ा रहता है, जहां विशेषज्ञ विभाग, जांच, ऑपरेशन और गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधाएं विकसित की जाती हैं।
आदिवासी और दूरस्थ जिलों में मेडिकल कॉलेजों से तीन स्तरों पर सहायता मिल सकती है:
- स्थानीय मरीजों को जिला स्तर पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो सकता है।
- नए डॉक्टरों और विशेषज्ञों के प्रशिक्षण की क्षमता बढ़ सकती है।
- आसपास के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए रेफरल नेटवर्क मजबूत हो सकता है।
इसके बावजूद भवन स्वीकृत होने मात्र से डॉक्टरों की कमी समाप्त नहीं होती। फैकल्टी भर्ती, उपकरण, नर्सिंग स्टाफ, छात्र प्रवेश और अस्पताल संचालन की नियमित निगरानी भी जरूरी है।
सांसद अनिता नागर सिंह चौहान ने उठाया स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा
ताजा मीडिया रिपोर्टों के अनुसार रतलाम-झाबुआ-आलीराजपुर क्षेत्र की सांसद अनिता नागर सिंह चौहान ने लोकसभा में आदिवासी क्षेत्रों में डॉक्टरों और अस्पतालों की उपलब्धता से संबंधित मुद्दा उठाया। अनिता नागर सिंह चौहान वर्तमान में रतलाम संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं।
हालांकि 14 मेडिकल कॉलेज और छह आदिवासी जिलों वाला आंकड़ा स्वतंत्र रूप से जिस आधिकारिक संसदीय उत्तर में उपलब्ध है, वह 5 दिसंबर 2025 को सांसद गजेंद्र सिंह पटेल के प्रश्न के जवाब में दिया गया था। इसलिए दोनों संसदीय संदर्भों को एक ही प्रश्न मानकर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
डॉक्टर आवेदन से पहले किन बातों की जांच करें?
आवेदन करने वाले डॉक्टर केवल सोशल मीडिया पोस्ट या निजी वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर वेतन कोट न करें। आधिकारिक विज्ञापन में इन विवरणों को ध्यान से देखना जरूरी है:
- संस्था और पद का सही कोड
- विशेषज्ञता की शैक्षणिक योग्यता
- मेडिकल काउंसिल पंजीयन की शर्त
- अनुभव और आयु सीमा
- पारिश्रमिक की अधिकतम स्वीकृत सीमा
- अनुबंध की अवधि
- प्रदर्शन आधारित भुगतान की शर्त
- ग्रामीण या कठिन क्षेत्र में निवास की अनिवार्यता
- अनुबंध समाप्त करने और स्थानांतरण के नियम
आवेदन जमा करने से पहले वेतन राशि और चुने गए अस्पताल का नाम दोबारा जांचना चाहिए, क्योंकि ऑनलाइन कोट में बाद में बदलाव की अनुमति विज्ञापन के अनुसार सीमित हो सकती है।
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| मॉडल का नाम | You Quote, We Pay |
| संचालन | राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्य प्रदेश |
| उद्देश्य | दूरस्थ अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति |
| आवेदन | ऑनलाइन |
| रिक्तियां | संस्था और विशेषज्ञता के अनुसार |
| डॉक्टर क्या बताएंगे? | अपेक्षित मासिक पारिश्रमिक |
| चयन में प्राथमिकता | पात्र उम्मीदवारों में कम पारिश्रमिक कोट |
| प्रमुख पद | रेडियोलॉजिस्ट, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ |
| अतिरिक्त दायरा | कुछ चिह्नित संजीवनी क्लीनिक |
| अंतिम चयन | योग्यता, दस्तावेज और विज्ञापन की शर्तों के अनुसार |