भोपाल - दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से ठीक पहले कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद की गई। आदेश पर मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी के हस्ताक्षर हैं। हालांकि आधिकारिक आदेश में निलंबन का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे दतिया उपचुनाव के दौरान सामने आए भितरघात (क्रॉस वोटिंग और संगठन विरोधी गतिविधियों) के आरोपों से जोड़कर देखा जा रहा है।
उपचुनाव के दौरान खुलकर सामने आई थी कांग्रेस की अंदरूनी कलह
दतिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान कांग्रेस के भीतर मतभेद लगातार सुर्खियों में रहे। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने मतदान के बाद सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने चुनाव में पार्टी के बजाय भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने का काम किया। उन्होंने दावा किया था कि भारती पूरे चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रहे और पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। इस पूरे मामले की शिकायत कांग्रेस हाईकमान तक भी पहुंचाई गई थी, जिसके बाद संगठन स्तर पर रिपोर्ट तैयार की गई।
राजेंद्र भारती ने भी प्रत्याशी पर लगाए थे गंभीर आरोप
विवाद केवल एकतरफा नहीं रहा। चुनाव प्रचार के दौरान राजेंद्र भारती ने भी कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि घनश्याम सिंह भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के "रिमोट कंट्रोल" पर काम कर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच चली सार्वजनिक बयानबाजी ने कांग्रेस की गुटबाजी को खुलकर सामने ला दिया था और इसका असर चुनाव प्रचार पर भी देखने को मिला।
देर रात जारी हुआ निलंबन आदेश
रविवार देर रात जारी आदेश में कांग्रेस ने राजेंद्र भारती को तत्काल प्रभाव से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित करने की घोषणा की। आदेश की प्रतिलिपि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को भेजी गई है। इससे साफ संकेत मिला है कि कांग्रेस संगठन अनुशासन के मामलों में अब सख्त रुख अपनाने के मूड में है।
रिजल्ट से पहले बड़ा सियासी संदेश
दतिया उपचुनाव के नतीजों से ठीक पहले उठाए गए इस कदम को कांग्रेस का बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि चुनाव के दौरान संगठन विरोधी गतिविधियों, भितरघात और अनुशासनहीनता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब सबकी निगाहें उपचुनाव के परिणाम पर टिकी हैं, क्योंकि नतीजे न सिर्फ दतिया की राजनीति बल्कि मध्य प्रदेश कांग्रेस की आगे की रणनीति और संगठनात्मक फैसलों की दिशा भी तय कर सकते हैं।