जब भी कोई खिलाड़ी ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन में गोल्ड मेडल जीतता है, तो आमतौर पर लोगों को यही लगता है कि यह मेडल पूरी तरह शुद्ध सोने से बना होगा। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। आज दिए जाने वाले गोल्ड मेडल में सोने की मात्रा बेहद कम होती है, जबकि इसका अधिकांश हिस्सा चांदी का बना होता है। यही वजह है कि "गोल्ड मेडल" नाम होने के बावजूद इसकी संरचना पूरी तरह सोने की नहीं होती। आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी।
गोल्ड मेडल में कितना सोना होता है?
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के नियमों के मुताबिक, आधुनिक ओलंपिक गोल्ड मेडल में कम से कम 92.5% चांदी होना अनिवार्य है। इसके ऊपर कम से कम 6 ग्राम शुद्ध सोने (24 कैरेट) की परत चढ़ाई जाती है। यानी जिस मेडल को गोल्ड मेडल कहा जाता है, उसमें वास्तव में केवल लगभग 6 ग्राम सोना होता है।
फिर गोल्ड मेडल किस धातु का बना होता है?
आधुनिक गोल्ड मेडल का अधिकांश हिस्सा स्टर्लिंग सिल्वर (Sterling Silver) से बनाया जाता है। आमतौर पर-
कुल वजन: लगभग 500 से 550 ग्राम
चांदी: लगभग 92.5%
ऊपर की परत: करीब 6 ग्राम शुद्ध सोना
यही कारण है कि मेडल देखने में पूरी तरह सोने जैसा दिखाई देता है, लेकिन वास्तव में उसका मुख्य हिस्सा चांदी का होता है।
पहले क्या पूरे सोने के बनते थे गोल्ड मेडल?
जी हां। आधुनिक ओलंपिक इतिहास में 1912 के स्टॉकहोम ओलंपिक तक विजेताओं को वास्तव में शुद्ध सोने से बने गोल्ड मेडल दिए जाते थे। लेकिन समय के साथ सोने की कीमतों में भारी वृद्धि हुई। इसके बाद आयोजकों के लिए पूरी तरह सोने के मेडल बनाना बेहद महंगा साबित होने लगा। इसी वजह से डिजाइन में बदलाव किया गया और चांदी पर सोने की परत चढ़ाने की व्यवस्था अपनाई गई, जो आज भी जारी है।
गोल्ड मेडल की असली कीमत कितनी होती है?
यदि केवल धातु की कीमत के आधार पर देखा जाए तो गोल्ड मेडल की कीमत पूरी तरह सोने के मेडल जितनी नहीं होती। इसकी वास्तविक धातु कीमत मुख्य रूप से दो चीजों पर निर्भर करती है-
उस समय सोने का बाजार भाव
चांदी की कीमत
हालांकि किसी खिलाड़ी के लिए इस मेडल का मूल्य उसकी धातु से कहीं अधिक होता है, क्योंकि यह वर्षों की मेहनत, संघर्ष और देश का प्रतिनिधित्व करने की उपलब्धि का प्रतीक होता है।
क्या कॉमनवेल्थ और अन्य खेलों में भी ऐसा ही होता है?
अधिकांश बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भी गोल्ड मेडल पूरी तरह सोने का नहीं होता। हर आयोजन की आयोजन समिति अपने डिजाइन और धातु संरचना का फैसला करती है, लेकिन लागत और टिकाऊपन को ध्यान में रखते हुए अधिकतर गोल्ड मेडल चांदी के आधार पर बनाए जाते हैं और उन पर सोने की परत चढ़ाई जाती है।
क्यों नहीं बनाए जाते पूरे सोने के मेडल?
इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं-
सोने की अत्यधिक कीमत
हजारों मेडल तैयार करने की लागत
सुरक्षा और परिवहन की चुनौती
चांदी पर सोने की परत से लगभग वही आकर्षक लुक मिल जाता है
इसी वजह से आधुनिक खेल प्रतियोगिताओं में यही मॉडल अपनाया जाता है।