जबलपुर, 16 सितंबर 2026 | मध्यप्रदेश में राज्यपाल की नियुक्ति और कार्यकाल को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की डिवीजन बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिका में मांग की गई है कि नए राज्यपाल की नियुक्ति होने तक मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को राज्यपाल का कार्यभार सौंपा जाए। यह याचिका जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एम.ए. खान और अन्य की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 8 जुलाई 2021 को पदभार संभाला था और उनकी पांच साल की अवधि जुलाई 2026 में पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद नया राज्यपाल नियुक्त नहीं हुआ है।
याचिका में क्या मांग की गई?
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 153, 154 और 155 का हवाला देते हुए राज्यपाल पद से जुड़ी संवैधानिक व्यवस्था पर सवाल उठाया है। उनकी मांग है कि जब तक नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं होती, तब तक मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को कार्यवाहक राज्यपाल का प्रभार दिया जाए। याचिका में यह भी कहा गया कि पूर्व में कुछ परिस्थितियों में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
केंद्र सरकार ने Article 156 का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ने याचिका का जवाब दिया। केंद्र ने संविधान के अनुच्छेद 156 का हवाला देते हुए कहा कि पांच साल की निर्धारित अवधि पूरी होने के बावजूद राज्यपाल तब तक अपने पद पर बने रह सकते हैं, जब तक उनका उत्तराधिकारी पदभार ग्रहण नहीं कर लेता।
संविधान के अनुच्छेद 156(3) में पांच साल की अवधि का प्रावधान है, लेकिन इसी अनुच्छेद के proviso में साफ तौर पर कहा गया है कि कार्यकाल की अवधि समाप्त हो जाने के बावजूद राज्यपाल उत्तराधिकारी के पदभार ग्रहण करने तक पद पर बने रहेंगे।
पांच साल पूरा होना और पद खाली होना अलग बातें
इस मामले में यही संवैधानिक बिंदु सबसे महत्वपूर्ण है। मंगुभाई पटेल ने जुलाई 2021 में मध्यप्रदेश के राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण किया था और उनकी पांच साल की सामान्य अवधि जुलाई 2026 में पूरी हुई। लेकिन संविधान पांच साल पूरे होते ही राज्यपाल का पद स्वतः खाली हो जाने की व्यवस्था नहीं करता। अनुच्छेद 156 का proviso उत्तराधिकारी के पद संभालने तक मौजूदा राज्यपाल को पद पर बने रहने की अनुमति देता है। इसलिए “कार्यकाल खत्म होते ही राज्यपाल का पद असंवैधानिक रूप से खाली हो गया” जैसी भाषा अभी तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगी। अंतिम कानूनी निष्कर्ष हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।
Article 160 क्या कहता है?
संविधान का अनुच्छेद 160 कहता है कि अगर राज्यपाल के कार्यों के निर्वहन से जुड़ी ऐसी कोई परिस्थिति सामने आती है, जिसका प्रावधान संविधान के इस अध्याय में नहीं है, तो राष्ट्रपति आवश्यक व्यवस्था कर सकते हैं।
लेकिन मौजूदा मामले में केंद्र का तर्क है कि पांच वर्ष बाद उत्तराधिकारी आने तक पद पर बने रहने की स्थिति पहले से ही अनुच्छेद 156 में स्पष्ट रूप से दी गई है।
अब हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार
दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद डिवीजन बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत यह तय करेगी कि याचिकाकर्ताओं की मांग पर कोई संवैधानिक निर्देश देने की जरूरत है या अनुच्छेद 156 के तहत मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है। फैसला सुरक्षित रखने का मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने किसी पक्ष के तर्क को स्वीकार या खारिज कर दिया है। आदेश सुनाए जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
मौजूदा MP High Court Chief Justice कौन हैं?
इस बीच जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे 10 सितंबर 2026 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ले चुके हैं। दिलचस्प रूप से उन्हें राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने ही पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। हालांकि यह अलग संवैधानिक प्रक्रिया है और इससे लंबित जनहित याचिका के गुण-दोष पर कोई स्वतः निष्कर्ष नहीं निकलता।