नई दिल्ली। स्मार्टफोन और आईपैड पर घंटों स्क्रॉलिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल ने भारत में इंटरनेट खपत को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। दूरसंचार क्षेत्र के सर्किलवार आंकड़ों के मुताबिक, इंटरनेट डेटा इस्तेमाल के मामले में बिहार देशभर में सबसे आगे निकल गया है। खास बात यह है कि बिहार में टेली-डेंसिटी यानी आबादी के अनुपात में मोबाइल कनेक्शन की संख्या देश में सबसे कम है। इसके बावजूद राज्य में रोजाना डेटा खपत सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। इससे संकेत मिलता है कि जिन लोगों तक इंटरनेट की पहुंच है, वे वीडियो, रील्स और सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं।
बिहार में रोजाना 49.1 पेटाबाइट डेटा खपत
दूरसंचार क्षेत्र के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में हर दिन करीब 49.1 पेटाबाइट डेटा खर्च हो रहा है। यह लगभग 4.91 करोड़ जीबी के बराबर है।
डेटा खपत के मामले में बिहार के बाद ये क्षेत्र सबसे आगे हैं:
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स्थान |
राज्य/क्षेत्र |
रोजाना डेटा खपत |
|---|---|---|
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1 |
बिहार |
49.1 पेटाबाइट |
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2 |
महाराष्ट्र |
48.7 पेटाबाइट |
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3 |
उत्तर प्रदेश-पूर्वी क्षेत्र |
42.31 पेटाबाइट |
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4 |
गुजरात |
42.2 पेटाबाइट |
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5 |
मध्य प्रदेश |
41.3 पेटाबाइट |
आंकड़ों से पता चलता है कि इंटरनेट उपयोग अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों और राज्यों में भी वीडियो और सोशल मीडिया की खपत तेजी से बढ़ रही है।
YouTube बना भारतीय यूजर्स की पहली पसंद
देशभर में इंटरनेट डेटा खर्च करने के मामले में YouTube सबसे आगे है। कुल डेटा खपत में YouTube की हिस्सेदारी करीब 24.3 प्रतिशत बताई गई है। यानी भारत में खर्च होने वाले इंटरनेट डेटा का लगभग एक चौथाई हिस्सा YouTube पर वीडियो देखने में इस्तेमाल हो रहा है।
इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का नंबर आता है:
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YouTube: 24.3 प्रतिशत
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Instagram: 21.7 प्रतिशत
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Facebook: 17.5 प्रतिशत
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Google सर्च और अन्य ऑनलाइन गतिविधियां: 5.2 प्रतिशत
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WhatsApp: 3.5 प्रतिशत
Instagram की हिस्सेदारी बताती है कि रील्स और शॉर्ट वीडियो देखने का चलन लगातार बढ़ रहा है। Facebook पर भी वीडियो, फोटो और रील्स देखने में बड़ी मात्रा में डेटा खर्च हो रहा है।
वीडियो स्ट्रीमिंग से सबसे ज्यादा डेटा खर्च
इंटरनेट डेटा तेजी से खत्म होने की सबसे बड़ी वजह वीडियो स्ट्रीमिंग मानी जा रही है। YouTube, Netflix और अन्य OTT प्लेटफॉर्म पर हाई क्वालिटी वीडियो देखने से काफी डेटा खर्च होता है।
डेटा खपत बढ़ाने वाली प्रमुख गतिविधियां इस प्रकार हैं:
1. वीडियो स्ट्रीमिंग
HD और Full HD वीडियो देखने पर सामान्य वीडियो की तुलना में ज्यादा डेटा खर्च होता है। लगातार वीडियो चलने पर मोबाइल डेटा तेजी से खत्म हो सकता है।
2. सोशल मीडिया और रील्स
Instagram, Facebook और अन्य प्लेटफॉर्म पर रील्स, शॉर्ट वीडियो और फोटो स्क्रॉल करने से लगातार डेटा खर्च होता रहता है। ऑटो-प्ले फीचर इस खपत को और बढ़ा देता है।
3. डाउनलोडिंग और ऑटो-अपडेट
बड़ी फाइलें डाउनलोड करना, वीडियो सेव करना और ऐप्स को ऑटो-अपडेट पर छोड़ना भी डेटा खपत बढ़ाता है। कई बार यूजर्स को पता भी नहीं चलता कि बैकग्राउंड में डेटा खर्च हो रहा है।
भारतीय स्मार्टफोन यूजर हर महीने 37 जीबी डेटा खर्च कर रहा
एरिक्सन की जून 2026 की मोबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एक स्मार्टफोन यूजर औसतन हर महीने करीब 37 जीबी मोबाइल डेटा इस्तेमाल कर रहा है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि अगले पांच वर्षों में यह आंकड़ा बढ़कर 70 जीबी प्रति माह तक पहुंच सकता है। सस्ते 5G स्मार्टफोन, बेहतर नेटवर्क कवरेज और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस यानी FWA सेवाओं की बढ़ती मांग को इसके पीछे बड़ी वजह माना जा रहा है।
2031 तक 5G सब्सक्रिप्शन 110 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 5G का विस्तार आने वाले वर्षों में और तेज हो सकता है। वर्ष 2031 तक देश में 5G सब्सक्रिप्शन की संख्या 110 करोड़ से ज्यादा पहुंचने का अनुमान है। यह कुल मोबाइल सब्सक्रिप्शन का करीब 81 प्रतिशत हो सकता है। वर्ष 2025 के अंत तक भारत में 5G सब्सक्रिप्शन लगभग 43 करोड़ था, जो कुल मोबाइल सब्सक्रिप्शन का करीब 35 प्रतिशत था। वहीं, 4G सब्सक्राइबरों की संख्या 2025 के करीब 57 करोड़ से घटकर 2031 तक लगभग 16 करोड़ रह जाने का अनुमान है। इसकी वजह यूजर्स का धीरे-धीरे 5G नेटवर्क की ओर बढ़ना बताया जा रहा है।
जुलाई 2026 में ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर 1094.48 मिलियन
TRAI के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में भारत में कुल ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबरों की संख्या बढ़कर 1094.48 मिलियन हो गई। इसी दौरान 5G फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस यानी FWA सब्सक्राइबरों की संख्या भी बढ़ी। जून 2026 में FWA सब्सक्राइबर करीब 12.94 मिलियन थे, जो जुलाई में बढ़कर 13.21 मिलियन हो गए। इससे पता चलता है कि मोबाइल इंटरनेट के साथ-साथ घरों और ऑफिसों में वायरलेस ब्रॉडबैंड सेवाओं का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।
जुलाई में करीब 1.6 करोड़ लोगों ने कराया मोबाइल नंबर पोर्ट
जुलाई 2026 में करीब 15.98 मिलियन यानी लगभग 1.6 करोड़ मोबाइल यूजर्स ने मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी यानी MNP के लिए आवेदन किया। MNP के बढ़ते इस्तेमाल से संकेत मिलता है कि ग्राहक बेहतर नेटवर्क, तेज इंटरनेट और बेहतर डेटा सेवाओं के लिए अपना मोबाइल ऑपरेटर बदलने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।
इंटरनेट अब सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं, मनोरंजन का बड़ा माध्यम
इन आंकड़ों से साफ है कि भारत में इंटरनेट अब केवल कॉलिंग, मैसेजिंग या जरूरी ऑनलाइन कामों तक सीमित नहीं है। वीडियो स्ट्रीमिंग, रील्स, सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म डेटा खपत के बड़े कारण बन चुके हैं। बिहार का डेटा खपत में सबसे आगे रहना इस बदलाव का उदाहरण है। कम टेली-डेंसिटी के बावजूद राज्य में इंटरनेट इस्तेमाल की अधिकता बताती है कि इंटरनेट पहुंच रखने वाले यूजर्स डिजिटल मनोरंजन का बड़े स्तर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में 5G नेटवर्क के विस्तार, सस्ते स्मार्टफोन और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ डेटा खपत और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में YouTube, Instagram और अन्य वीडियो प्लेटफॉर्म इंटरनेट इस्तेमाल के प्रमुख केंद्र बने रह सकते हैं।