मध्यप्रदेश में लंबे समय से कमजोर पड़ी सरकारी यात्री बस व्यवस्था को फिर से व्यवस्थित करने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में आयोजित यात्री समिट में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू करने की घोषणा की थी।15 सितंबर की कैबिनेट बैठक में भी मुख्यमंत्री ने इस योजना की शुरुआत को लेकर जानकारी दी। प्रस्तावित सेवा 25 सितंबर से शुरू की जाएगी।
55 जिलों में 1,036 रूट चिन्हित
नई परिवहन व्यवस्था के लिए प्रदेश के 55 जिलों में कुल 1,036 बस रूट चिन्हित किए गए हैं। इनमें अलग-अलग श्रेणियों के मार्ग शामिल हैं।
150 सिटी बस रूट
450 इंटरसिटी रूट
436 इंटरस्टेट रूट
इंदौर से अन्य शहरों को जोड़ने के लिए अकेले 23 मार्ग निर्धारित किए गए हैं।
सरकारी निगरानी, निजी ऑपरेटरों की भूमिका
पूरी व्यवस्था के संचालन की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के माध्यम से निभाई जाएगी। इस संस्था का गठन 3 जुलाई 2025 को किया गया था।
योजना के तहत बसों का प्रबंधन निजी ऑपरेटरों द्वारा किया जाएगा, जबकि परिवहन नेटवर्क की निगरानी सरकार के हाथ में रहेगी। इस तरह सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के जरिए यात्री परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी कर रही है।
इलेक्ट्रिक बसों और ग्रीन मोबिलिटी पर जोर
नई सेवा में पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक बसों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इससे सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के साथ ग्रीन मोबिलिटी को भी बढ़ावा देने का लक्ष्य है।परिवहन विभाग के प्रबंध निदेशक के अनुसार, यात्रियों की मांग के आधार पर बसों की समय-सारणी और रूट तय किए जाएंगे। ऑपरेटरों की जिम्मेदारी होगी कि निर्धारित रूट पर सही समय पर बस उपलब्ध रहे।
GPS और ITMS से होगी बसों की रियल-टाइम निगरानी
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाएगा। इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) और GPS के जरिए बसों की लोकेशन, गति और ड्राइवर के व्यवहार की रियल-टाइम निगरानी की जाएगी।यात्रियों की सुरक्षा को भी योजना में प्राथमिकता दी गई है। खासतौर पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए बसों में CCTV कैमरे और पैनिक बटन अनिवार्य किए जाएंगे।
आधुनिक बस टर्मिनल और डिपो बनाने की योजना
योजना के तीसरे प्रमुख हिस्से में परिवहन से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है। प्रदेश में आधुनिक बस टर्मिनल, डिपो और बस स्टॉप विकसित किए जाएंगे।इन सुविधाओं का निर्माण सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल पर किए जाने की योजना है। डिपो में यात्रियों के साथ-साथ बस चालकों और ऑपरेटरों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाएगा।
करीब दो दशक बाद सरकारी बस सेवा को नया रूप
वर्ष 2005 के बाद सरकारी बस व्यवस्था कमजोर होने के चलते प्रदेश में यात्री परिवहन का बड़ा हिस्सा निजी ऑपरेटरों पर निर्भर हो गया था। अब सरकार डाटा, आधुनिक तकनीक और PPP मॉडल के जरिए सार्वजनिक बस परिवहन को दोबारा व्यवस्थित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।नई व्यवस्था लागू होने के बाद यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी, निर्धारित समय पर बसों की उपलब्धता और आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।