रायपुर, 15 सितंबर 2026 | छत्तीसगढ़ की राजनीति में सोमवार को एक अलग तस्वीर देखने को मिली। प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर लंबे समय से एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रायपुर प्रेस क्लब में आमने-सामने बैठकर खुली बहस करते नजर आए। करीब 80 मिनट चली इस बहस में दोनों नेताओं ने फाइलें, पत्र और अपने-अपने आंकड़े सामने रखे और एक-दूसरे के दावों पर सवाल उठाए। बहस का सबसे बड़ा मुद्दा यही रहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान कितने पीएम आवास स्वीकृत और पूरे हुए, विष्णुदेव साय सरकार के आने के बाद कितने मकान बने और अलग-अलग समय पर केंद्र से मिली मंजूरियों को किस तरह गिना जाना चाहिए।
विजय शर्मा का दावा- हमारी सरकार में 11.75 लाख से ज्यादा आवास पूरे
बहस की शुरुआत में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने दावा किया कि मौजूदा बीजेपी सरकार के कार्यकाल में 11.75 लाख से ज्यादा पीएम आवास पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पांच साल में करीब तीन लाख आवास ही पूरे हुए। विजय शर्मा ने 25 सितंबर 2023 की आवास स्वीकृतियों और तत्कालीन सरकार के दौरान लाभार्थियों तक राशि पहुंचने के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। विजय शर्मा ने कहा कि पीएम आवास को लेकर बीजेपी ने ‘मोर आवास-मोर अधिकार’ आंदोलन चलाया था और साय सरकार ने सत्ता में आने के बाद पहली कैबिनेट में 18 लाख आवासों से जुड़ा निर्णय लिया। केंद्र सरकार की आधिकारिक सूचनाओं में भी यह दर्ज है कि विष्णुदेव साय सरकार की पहली कैबिनेट ने 18 लाख घरों के निर्माण को मंजूरी देने का फैसला किया था।
भूपेश बोले- 18 लाख कहा था तो बाकी घर कहां हैं?
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विजय शर्मा के आंकड़ों पर पलटवार किया। उन्होंने सवाल किया कि जब बीजेपी सरकार पहली कैबिनेट में 18 लाख आवास की बात करती है और बाद में केंद्र से अलग-अलग चरणों में नई स्वीकृतियां मिली हैं, तो इन सभी आंकड़ों का हिसाब स्पष्ट क्यों नहीं किया जा रहा। बघेल ने बहस के दौरान दावा किया कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अलग-अलग घोषणाओं को जोड़ने पर स्वीकृत आवासों की संख्या काफी ज्यादा हो जाती है। उन्होंने सरकार से पूछा कि अलग-अलग घोषणाओं और वास्तविक लाभार्थियों की संख्या में अंतर क्यों दिखाई देता है।
13 मई को मिले थे 3 लाख 700 अतिरिक्त आवास
इस बहस में भूपेश बघेल ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुरानी घोषणाओं का भी जिक्र किया। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक 13 मई 2025 को शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को 3 लाख 700 यानी 3,00,700 पीएम आवास की स्वीकृति का पत्र सौंपा था। उस दिन अंबिकापुर में ‘मोर आवास-मोर अधिकार’ कार्यक्रम भी आयोजित हुआ था।
11 सितंबर को फिर मिले 3.65 लाख अतिरिक्त घर
हाल ही में 11 सितंबर 2026 को भी केंद्र की ओर से छत्तीसगढ़ के लिए 3.65 लाख अतिरिक्त PMAY-G घरों की घोषणा की गई। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सक्ती में आयोजित कार्यक्रम में यह घोषणा की थी। उसी कार्यक्रम में करीब दो लाख नए बने पीएम आवासों का गृह प्रवेश कराया गया। केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 1,600 से ज्यादा पीएम आवास पूरे हो रहे हैं। यही अलग-अलग चरणों में मिली स्वीकृतियां सोमवार की राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बनी रहीं।
'केंद्र ने Portal बंद किया था'- भूपेश बघेल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांग्रेस सरकार के दौरान आवासों की संख्या कम रहने के सवाल पर कोरोना काल का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय राज्यों की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और केंद्र सरकार की ओर से पीएम आवास का पोर्टल भी बंद किया गया था। विजय शर्मा ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि केंद्र का पोर्टल बंद नहीं किया गया था और कोरोना काल में भी केंद्र से पैसे आते रहे। यानी पोर्टल बंद होने के मुद्दे पर दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के बिल्कुल उलट दावे किए।
84 हजार आवास को लेकर भी भिड़े दोनों नेता
विजय शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री से पूछा कि तत्कालीन सरकार ने 84 हजार आवासों को लेकर क्या प्रक्रिया अपनाई थी और उन्हें किस पोर्टल पर भेजा गया था। वहीं भूपेश बघेल ने इसे गलत तरीके से तथ्य पेश करने का आरोप लगाते हुए बीजेपी सरकार से अपने कार्यकाल के आंकड़ों का पूरा हिसाब रखने को कहा। बहस के दौरान दोनों नेताओं के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई। विजय शर्मा ने कहा कि सामने रखे दस्तावेजों के आधार पर ही बात होनी चाहिए, जबकि बघेल लगातार अलग-अलग केंद्रीय स्वीकृतियों को जोड़कर सरकार से स्पष्टीकरण मांगते रहे।
T.S. सिंहदेव के इस्तीफे का मुद्दा भी उठा
विजय शर्मा ने कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव के विभाग छोड़ने का मामला भी उठाया। उन्होंने इसे पीएम आवास योजना में तत्कालीन सरकार की स्थिति से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। हाल ही में केंद्र सरकार ने भी अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि उस समय टीएस सिंहदेव ने आवास योजना को लेकर नाराजगी जताई थी।
सरकारी आंकड़ा क्या कहता है?
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। राजनीतिक बहस में दोनों नेता अपने-अपने कार्यकाल और अलग-अलग स्वीकृति चरणों के आंकड़े गिना रहे थे, जबकि केंद्र का PMAY-G डेटा योजना शुरू होने से अब तक का cumulative यानी कुल आंकड़ा देता है।
लोकसभा में 21 जुलाई 2026 को दिए गए आधिकारिक जवाब के मुताबिक उस समय तक छत्तीसगढ़ के लिए PMAY-G में:
- कुल Target: 26,42,224
- राज्य द्वारा Sanctioned: 24,51,294
- Completed Houses: 20,16,970
- Target के मुकाबले बाकी: 6,25,254
थे।
ये आंकड़े 21 जुलाई 2026 तक के हैं। इसके बाद सितंबर में 3.65 लाख अतिरिक्त आवास की घोषणा हुई है, इसलिए आज की स्थिति इससे आगे बढ़ चुकी है।
इसलिए 18 लाख, 28 लाख और 46 लाख की गिनती में हो रहा भ्रम
बहस की सबसे बड़ी उलझन यही है कि अलग-अलग नेता Target, State Cabinet approval, Central sanction, beneficiary sanction और completed houses को एक ही तरह का आंकड़ा मानकर जोड़ते दिखाई दिए।
उदाहरण के लिए पहली कैबिनेट का “18 लाख आवास” राज्य सरकार के निर्णय से जुड़ा आंकड़ा है। वहीं 13 मई 2025 के 3,00,700 और 11 सितंबर 2026 के 3.65 लाख आंकड़े अलग केंद्रीय स्वीकृति/घोषणा से जुड़े हैं। इनके बीच लाभार्थियों की सूची या पहले से स्वीकृत लक्ष्य में overlap है या नहीं, यह मूल sanction orders के आधार पर ही स्पष्ट किया जा सकता है। इसलिए “कुल 46 लाख आवास स्वीकृत हो गए” वाले भूपेश बघेल के दावे को फिलहाल राजनीतिक दावा ही लिखना अधिक सटीक होगा, न कि सत्यापित सरकारी कुल।
प्रेस क्लब के बाहर समर्थकों में भी नोकझोंक
दोनों नेताओं की बहस को देखने के लिए बीजेपी और कांग्रेस समर्थक भी बड़ी संख्या में प्रेस क्लब के आसपास पहुंचे थे। बाहर दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी और तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति संभालने के लिए पुलिस को बीच में आना पड़ा।
चुनौती से शुरू होकर प्रेस क्लब तक पहुंची बहस
पीएम आवास के आंकड़ों को लेकर विजय शर्मा और भूपेश बघेल के बीच पिछले कई सप्ताह से बयानबाजी चल रही थी। विजय शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री को सार्वजनिक बहस की चुनौती दी थी। भूपेश बघेल ने इसे स्वीकार करते हुए तारीख और जगह तय करने को कहा। बाद में 15 सितंबर को रायपुर प्रेस क्लब में बहस तय हुई और सोमवार को दोनों नेता आमने-सामने पहुंचे।
किसकी जीत हुई?
करीब 80 मिनट की बहस के बावजूद यह तय करना आसान नहीं है कि “कौन जीता”, क्योंकि दोनों पक्ष अलग-अलग समयावधि और अलग तरह की स्वीकृतियों के आंकड़े लेकर पहुंचे थे। इतना जरूर है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय बाद किसी बड़े सरकारी मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के दो प्रमुख नेता कैमरों के सामने बैठकर सीधे सवाल-जवाब करते दिखाई दिए। अब असली तस्वीर तभी साफ हो सकती है जब राज्य सरकार PMAY-G के वर्षवार Target, Central Sanction, State Sanction, Completed Houses और Expenditure का एक consolidated data sheet सार्वजनिक करे।