जयपुर, 15 सितंबर 2026 | राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। सोमवार देर रात तक घोषित 10,235 वार्डों के नतीजों में बीजेपी ने 4,179 वार्ड, जबकि कांग्रेस ने 3,613 वार्ड जीते। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी बड़ा प्रदर्शन करते हुए 2,273 वार्ड अपने नाम किए और कई नगर निकायों में सत्ता गठन की चाबी अपने हाथ में ले ली। प्रदेश के 10 नगर निगमों में बीजेपी ने जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को बीकानेर नगर निगम में बहुमत मिला, जबकि भरतपुर में निर्दलीय प्रत्याशियों ने दोनों प्रमुख दलों को पीछे छोड़ दिया।
PM मोदी बोले- ‘झूठ की गूंज’ पर सत्य की जीत
चुनाव परिणामों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के मतदाताओं का आभार जताया। उन्होंने बीजेपी के प्रदर्शन को “झूठ की गूंज” पर सत्य की जीत बताया और कहा कि जनादेश ने डबल इंजन सरकार की सुशासन और विकास की नीतियों में लोगों का भरोसा दिखाया है। प्रधानमंत्री ने जीतने वाले उम्मीदवारों और पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि इस नतीजे से राजस्थान को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प और मजबूत होगा।
BJP 4179, Congress 3613; निर्दलीयों का भी बड़ा प्रदर्शन
राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्टों में सोमवार रात तक पार्टीवार स्थिति इस तरह रही:
- BJP: 4,179 वार्ड
- Congress: 3,613 वार्ड
- Independents: 2,273 वार्ड
- RLP: 63
- AAP: 42
- CPI(M): 38
- BSP: 19
- Bharat Adivasi Party: 8
- उस समय कुल 10,244 में से 10,235 वार्डों के नतीजे घोषित हो चुके थे।
इन 4 नगर निगमों में BJP को स्पष्ट बहुमत
बीजेपी ने उदयपुर की 80 में से 53, भीलवाड़ा की 70 में से 45 और कोटा की 100 में से 53 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। जयपुर में भी पार्टी बहुमत के आंकड़े तक पहुंची। कांग्रेस ने बीकानेर में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं अजमेर और पाली समेत कुछ अन्य शहरी निकायों में कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन किया।
CM भजनलाल के भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा
इन चुनावों का सबसे चौंकाने वाला परिणाम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर से आया। नगर निगम के 65 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने 36 सीटें जीतकर अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। यहां बीजेपी को 20 और कांग्रेस को 7 वार्ड मिले, जबकि BSP और RLP ने एक-एक सीट जीती। इस नतीजे ने यह भी साफ किया कि पूरे प्रदेश में बीजेपी बढ़त में रही, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण शहरों में स्थानीय उम्मीदवारों और निर्दलीयों का प्रभाव बेहद मजबूत रहा।
जोधपुर में BJP-Congress 44-44
जोधपुर नगर निगम में मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा। यहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने 44-44 वार्ड जीते, जबकि 10 निर्दलीय विजयी रहे। ऐसे में बोर्ड गठन में निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यही स्थिति राजस्थान के कई नगर परिषद और नगर पालिकाओं में भी दिखाई दे रही है, जहां किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण निर्दलीय सत्ता गठन में निर्णायक बन सकते हैं।
CM भजनलाल शर्मा बोले- जनता ने विकास पर मुहर लगाई
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने चुनाव नतीजों को राज्य सरकार के कामकाज और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भरोसे की जीत बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ने पिछले करीब ढाई साल के दौरान सरकार की विकास और जनकल्याण नीतियों पर अपनी मुहर लगाई है।
BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने बताया ऐतिहासिक जनादेश
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी राजस्थान के लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि परिणाम प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और बीजेपी की जनकल्याण, विकास तथा सुशासन की नीतियों में जनता के विश्वास को दर्शाते हैं। पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि मतदाताओं ने भ्रम और नकारात्मक राजनीति को दरकिनार किया है।
कांग्रेस ने परिसीमन पर उठाए सवाल
दूसरी ओर राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने परिणामों को लेकर परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि वोट शेयर में मामूली अंतर होने के बावजूद वार्डों के नतीजों में बीजेपी को ज्यादा फायदा मिला। यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है; इसे निर्वाचन आयोग का निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
309 Urban Local Bodies में हुआ था चुनाव
राजस्थान में इस बार कुल 309 शहरी स्थानीय निकायों के लिए मतदान कराया गया था। इसमें 10 नगर निगम और बड़ी संख्या में नगर परिषद व नगर पालिकाएं शामिल थीं। मतदान 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में हुआ और मतगणना 14 सितंबर को की गई। इन चुनावों को 2028 के राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए अहम राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।
BJP आगे, लेकिन Independents बने दूसरी बड़ी कहानी
चुनाव परिणामों की पहली तस्वीर बीजेपी की राज्यव्यापी बढ़त की है, लेकिन दूसरी बड़ी कहानी निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन है। भरतपुर और हनुमानगढ़ जैसे निकायों में निर्दलीयों ने अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा हासिल किया, जबकि अजमेर, पाली, अलवर और जोधपुर समेत कई जगह बोर्ड गठन में उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है। इसलिए इन चुनावों को केवल बीजेपी-कांग्रेस मुकाबले के रूप में देखना अधूरी तस्वीर होगी।