नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026 | UPI से रोजाना चाय-सब्जी से लेकर हजारों रुपए के बिल का भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकेंगे। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने 14 सितंबर को जारी गजट अधिसूचना S.O. 5067(E) में ₹2,000 तक के UPI भुगतान को no-charge electronic payment mode के रूप में अधिसूचित किया है। अधिसूचना में RuPay-powered Debit Card को भी संरक्षित भुगतान माध्यम बनाया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है—क्या ₹2,000 से ज्यादा UPI करने पर अब पैसे कटेंगे? जवाब है- अभी नहीं।
₹2,000 तक UPI Payment पूरी तरह No-Charge
नई अधिसूचना में स्पष्ट कहा गया है कि बैंक या system provider ₹2,000 तक के UPI भुगतान में पैसा भेजने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकते। यानी अगर आप दुकान पर ₹500, ₹1,500 या ₹2,000 का भुगतान UPI से करते हैं, तो इस अधिसूचना के दायरे में उस भुगतान के लिए transaction charge नहीं लगाया जा सकता।
RuPay Debit Card पर क्या नियम है?
यहां एक अहम अंतर समझना जरूरी है। गजट में दो अलग भुगतान माध्यम लिखे गए हैं—RuPay-powered Debit Card और UPI transactions up to ₹2,000।
अधिसूचना के शब्दों में ₹2,000 की सीमा UPI के साथ लिखी गई है, जबकि RuPay Debit Card को अलग श्रेणी में रखा गया है। इसलिए इसे “RuPay Debit Card पर भी केवल ₹2,000 तक छूट” कहना अधिसूचना की भाषा को सही तरह नहीं दर्शाता। ₹2,000 से ज्यादा UPI Payment पर अब Charge लगेगा?
नहीं, अभी ऐसा कोई आदेश नहीं है।
14 सितंबर की अधिसूचना यह नहीं कहती कि ₹2,001 या उससे ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर तुरंत शुल्क वसूला जाएगा। यह केवल ₹2,000 तक के भुगतान को कानूनी रूप से ऐसी श्रेणी में रखती है, जिस पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर चार्ज नहीं लगा सकते। ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर भविष्य में merchant charge/MDR लागू किया जाएगा या नहीं, उसकी दर क्या होगी और किन कारोबारियों पर लागू होगा—इस पर अभी अलग अंतिम आदेश नहीं आया है।
आम UPI User को पैसे देने पड़ेंगे?
सरकार ने अगस्त में इस मामले पर अलग से स्पष्ट किया था कि UPI इस्तेमाल करने वाले सामान्य उपभोक्ता से transaction charge लेने की योजना नहीं है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक Person-to-Person यानी P2P UPI transactions भी free बने रहेंगे। अगर भविष्य में MDR लागू होता है तो इसे सीमित श्रेणी के merchant transactions, वह भी तय threshold से ऊपर, पर लागू किए जाने की संभावना है। इसलिए दोस्त या परिवार को ₹5,000, ₹10,000 या दूसरी रकम UPI से भेजते ही शुल्क लग जाएगा—ऐसा निष्कर्ष फिलहाल गलत होगा।
फिर ₹2,000 की सीमा क्यों रखी गई?
यही नई अधिसूचना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगस्त 2026 में Parliament ने Payment and Settlement Systems Act में बदलाव करके केंद्र सरकार को यह तय करने का अधिकार दिया था कि कौन से electronic payment modes no-charge protection के दायरे में रहेंगे। अब 14 सितंबर की notification ने ₹2,000 तक के UPI भुगतान को स्पष्ट रूप से protected category में रखा है। इससे भविष्य में बड़े merchant payments पर MDR की अलग व्यवस्था बनाने का कानूनी रास्ता खुल सकता है। लेकिन कानूनी रास्ता खुलना और फीस लागू हो जाना दो अलग बातें हैं।
MDR क्या होता है?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो merchant द्वारा digital payment स्वीकार करने पर payment ecosystem से जुड़ी संस्थाओं को दिया जा सकता है। आम तौर पर इसका संबंध merchant side से होता है, न कि ग्राहक द्वारा हर भुगतान पर अलग fee देने से। सरकार ने भी अगस्त में कहा था कि अगर UPI पर MDR लाया जाता है, तो वह सीमित merchant transactions पर nominal rate से लागू होगा और debit-credit card MDR की तुलना में काफी कम रखा जाएगा।
UPI से दोस्त को ₹10,000 भेजा तो क्या Charge लगेगा?
फिलहाल सरकार के सार्वजनिक स्पष्टीकरण के मुताबिक P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति UPI ट्रांजैक्शन free रहेगा। इसलिए किसी दोस्त, परिवार के सदस्य या दूसरे व्यक्ति को बैंक खाते से UPI के जरिए ₹10,000 भेजने पर इस नई अधिसूचना के कारण अपने-आप कोई शुल्क लागू नहीं हो गया है।
दुकान पर ₹5,000 का UPI Payment किया तो?
फिलहाल ग्राहक से कोई नया transaction charge लागू होने की घोषणा नहीं हुई है। हालांकि ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI transactions अब उस स्पष्ट statutory no-charge protection में नहीं हैं, जो ₹2,000 तक के payments को दी गई है। भविष्य में सरकार अलग MDR framework जारी करती है तो उसका असर merchant side पर हो सकता है। जब तक ऐसा अलग आदेश नहीं आता, ₹2,000 से ऊपर भुगतान पर चार्ज लागू मान लेना सही नहीं है।
UPI कैसे काम करता है?
UPI यानी Unified Payments Interface ऐसा real-time payment system है, जिसके जरिए अलग-अलग बैंकों के खातों के बीच मोबाइल से तत्काल पैसा भेजा और प्राप्त किया जा सकता है। यूजर UPI App में अपना बैंक अकाउंट लिंक कर UPI ID, QR Code या दूसरे supported identifiers के जरिए भुगतान कर सकता है। हर बार account number और IFSC भरने की जरूरत नहीं पड़ती। UPI 24 घंटे और साल के 365 दिन इस्तेमाल किया जा सकता है।
मोबाइल नंबर और UPI ID में फर्क
आपकी मूल कॉपी में mobile number, email ID और Aadhaar number को सीधे UPI ID कहा गया है। इसे थोड़ा सुधारना जरूरी है। UPI ID आमतौर पर name@bank या इसी तरह का Virtual Payment Address होता है। इसके अलावा UPI में mobile number/UPI Number और QR जैसे माध्यम भी payment routing के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं। आधार नंबर को सामान्य रूप से “UPI ID” कहना सही नहीं होगा। NPCI UPI को bank accounts से जुड़ा instant payment system बताता है, जिसमें virtual address और QR आधारित payments प्रमुख सुविधाएं हैं।
UPI कितना बड़ा हो चुका है?
UPI अब भारत के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले payment systems में शामिल है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में करीब 24.51 अरब UPI transactions हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹29.82 लाख करोड़ था। इतने बड़े scale को देखते हुए UPI की long-term sustainability, cybersecurity और payment infrastructure की लागत पर भी लगातार चर्चा हो रही है।
अभी आम लोगों को क्या करना चाहिए?
UPI यूजर को फिलहाल अपने भुगतान के तरीके में कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है। ₹2,000 तक के UPI payments को स्पष्ट no-charge protection मिली है और सरकार ने consumers तथा P2P transactions को free रखने की बात कही है। ₹2,000 से ऊपर की रकम पर कोई नया charge दिखाने वाला message या social media post मिले तो भुगतान करने से पहले बैंक, NPCI या आधिकारिक सरकारी सूचना से उसकी पुष्टि करें।