लखनऊ - उत्तर प्रदेश सरकार ने गोवंश संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे अभियानों के तहत प्रदेश के 62 जिलों में बड़ी कार्रवाई की है। सरकार के मुताबिक, इन जिलों में कुल 39,721.541 हेक्टेयर गोचर भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। अब सरकार का जोर इन जमीनों को सुरक्षित रखने और गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए इनके प्रभावी इस्तेमाल पर है।
गोचर भूमि को सुरक्षित रखने पर जोर
अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि प्रदेश में सार्वजनिक और गोचर भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता है कि कब्जामुक्त कराई गई गोचर भूमि दोबारा अतिक्रमण की चपेट में न आए और इसका उपयोग गोवंश के संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने में किया जाए।
सरकार का मानना है कि गोचर भूमि की उपलब्धता बढ़ने से निराश्रित गोवंश के लिए संरक्षण व्यवस्था को बेहतर किया जा सकता है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
93,287 लाभार्थियों को सौंपे गए 1.67 लाख गोवंश
गोवंश संरक्षण के लिए प्रदेश में सीएम सहभागिता योजना भी संचालित की जा रही है। योजना के तहत निराश्रित गोवंश को इच्छुक और पात्र लाभार्थियों को सुपुर्द किया जाता है, ताकि उनकी देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित हो सके। अपर मुख्य सचिव के अनुसार, अब तक 93,287 लाभार्थियों को 1,67,658 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। इसके जरिए बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।
ग्रामीण परिवारों को भी मिलेगा आर्थिक सहारा
सीएम सहभागिता योजना का उद्देश्य केवल गोवंश को आश्रय उपलब्ध कराना ही नहीं है। इसके जरिए ग्रामीण परिवारों को पशुपालन से जोड़कर उनकी आजीविका को मजबूत करने की कोशिश भी की जा रही है। योजना के तहत गोवंश प्राप्त करने वाले लाभार्थी उनके चारा-पानी, देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी लेते हैं। इससे पशुओं को सुरक्षित वातावरण मिलने के साथ ग्रामीण परिवारों के लिए पशुपालन आय का अतिरिक्त साधन बन सकता है।
सड़कों पर निराश्रित गोवंश की समस्या कम करने की कोशिश
सरकार के अनुसार, योजना के माध्यम से सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर निराश्रित गोवंश की मौजूदगी से जुड़ी समस्या को कम करने का भी प्रयास किया जा रहा है। जनसहभागिता के जरिए गोवंश को सुरक्षित स्थान और नियमित देखभाल उपलब्ध कराने पर जोर है। सरकार का कहना है कि गोचर भूमि को कब्जामुक्त कराने और सीएम सहभागिता योजना जैसे प्रयासों को साथ लेकर चलने से गोवंश संरक्षण की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
गोवंश संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस
प्रदेश सरकार गोचर भूमि की सुरक्षा, निराश्रित गोवंश को आश्रय और ग्रामीण परिवारों को पशुपालन से जोड़ने को एक-दूसरे से जुड़ी पहल के रूप में देख रही है। सरकार के मुताबिक, इससे एक तरफ गोवंश के संरक्षण को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन गतिविधियों को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिल सकता है।