नई दिल्ली, 14 सितंबर 2026 | देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर परेशानी बढ़ा रहा है। बिहार में बाढ़ से 48 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं, जबकि उत्तराखंड में लगातार बारिश के कारण केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है। दूसरी ओर मध्यप्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भी बारिश का जोर बढ़ने की चेतावनी है। पश्चिमी मध्यप्रदेश में आज Very Heavy Rain की चेतावनी है, जबकि पूर्वी राजस्थान में कहीं-कहीं Heavy Rain के साथ गरज-चमक की संभावना है। उत्तराखंड में आज मुख्य चेतावनी गरज-चमक और तेज बारिश के दौर की है।
बिहार में 48 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की चपेट में
बिहार में गंगा और उसकी सहायक नदियों के बढ़े जलस्तर का असर बड़े इलाके में बना हुआ है। 13 सितंबर तक राज्य में 48 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए। इससे एक दिन पहले के सरकारी आकलन में 15 जिलों के 87 प्रखंडों और 575 ग्राम पंचायतों में करीब 47.92 लाख लोगों के प्रभावित होने की जानकारी थी। हालांकि कई नदियों का जलस्तर अब कुछ स्थानों पर घटना शुरू हुआ है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। तेजी से पानी उतरने पर कटाव और कमजोर तटबंधों की समस्या भी बढ़ सकती है।
भागलपुर में गंगा का असर, कई इलाके अब भी प्रभावित
भागलपुर जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। यहां गंगा का पानी निचले इलाकों और गांवों तक पहुंच चुका है। हाल के दिनों में बाढ़ के पानी में डूबने की घटनाएं भी सामने आई हैं। 10 सितंबर को कोयली खुटहा इलाके में पांच लोगों की डूबने से मौत हुई थी। भागलपुर में करीब 8 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ के असर में बताए गए हैं, हालांकि नदी का जलस्तर धीरे-धीरे नीचे जाने की सूचना भी है।
Rajmahal Cruise को लेकर ये है सही अपडेट
बाढ़ के कारण गंगा में जलस्तर बढ़ने से कोलकाता की ओर से आ रहा ABN Rajmahal Cruise भागलपुर में रोकना पड़ा था। मोकामा/सिमरिया पुल के नीचे पर्याप्त vertical clearance नहीं मिलने के कारण जहाज को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई थी। 9 सितंबर की रिपोर्ट में 9 विदेशी पर्यटकों को जहाज से उतारकर ट्रेन से पटना भेजे जाने की जानकारी थी। वहीं 10 सितंबर को एक अन्य अपडेट में 13 विदेशी पर्यटकों के साथ cruise को NDRF/SDRF की निगरानी में आगे बढ़ने की अनुमति मिलने की बात सामने आई। इसलिए “रविवार को 9 विदेशी समेत 11 पर्यटकों को निकाला गया” वाला आंकड़ा उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों से मेल नहीं खाता।
Kedarnath Route पर लगातार गिर रहा मलबा
उत्तराखंड में केदारनाथ पैदल मार्ग पिछले कुछ दिनों में बार-बार प्रभावित हुआ है। चीरबासा हेलीपैड के पास पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने के कारण 11 और 12 सितंबर को यात्रा रोकी गई थी। यात्रियों को सोनप्रयाग और गौरीकुंड में सुरक्षित स्थानों पर रोका गया। 12 सितंबर को मार्ग बहाल होने के बाद करीब 2,000 तीर्थयात्रियों को सोनप्रयाग से केदारनाथ के लिए रवाना किया गया था।
आज भी केदारनाथ-चारधाम क्षेत्र में सावधानी जरूरी
IMD की Char Dham warning के मुताबिक 14 सितंबर को भी कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक और अचानक तेज बारिश के दौर की संभावना है। ऐसे में पहाड़ी ढलानों पर मलबा गिरने, पत्थर आने और छोटे नालों के अचानक उफान का जोखिम बना रह सकता है। यात्रियों को स्थानीय प्रशासन और पुलिस के निर्देश के बिना बंद या संवेदनशील मार्ग पर आगे बढ़ने से बचना चाहिए।
MP में आज Very Heavy Rain का अलर्ट
मध्यप्रदेश में आज सबसे ज्यादा फोकस पश्चिमी हिस्से पर है। IMD के अनुसार West Madhya Pradesh में 14 सितंबर को कहीं-कहीं Very Heavy Rain के साथ thunderstorm और lightning की संभावना है। इंदौर के लिए आज heavy rain का पूर्वानुमान है। उज्जैन में गरज-चमक और बारिश की संभावना है, जबकि ग्वालियर में भी thunderstorm/lightning का अलर्ट बना हुआ है। इंदौर, धार, बड़वानी और आसपास के मालवा-निमाड़ क्षेत्र में मौजूदा सिस्टम के कारण बारिश की गतिविधियां तेज रहने की संभावना जताई गई है।
Rajasthan में 36 जिलों वाला दावा सही नहीं
राजस्थान को लेकर आज का आधिकारिक IMD अलर्ट पूरे राज्य में एक जैसा नहीं है। पूर्वी राजस्थान में Heavy Rain और गरज-चमक की चेतावनी है, जबकि पश्चिमी राजस्थान में मुख्य रूप से thunderstorm और lightning का अलर्ट है। एक दिन पहले की रिपोर्ट में करीब 29 जिलों में Yellow Alert बताया गया था। इसलिए “आज 36 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट” लिखने से बचना बेहतर है।
बंगाल की खाड़ी का Low Pressure System सक्रिय
उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तथा दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र प्रदेश तट के पास बने Low Pressure Area ने देश के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में मानसूनी गतिविधियों को फिर तेज किया है। IMD ने 11 सितंबर से इससे जुड़ा विशेष bulletin जारी किया था। इस सिस्टम के पश्चिम की ओर बढ़ने से मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश का असर बढ़ा है।
अगले 24 घंटे क्यों अहम?
पहाड़ी इलाकों में पहले से भीगी जमीन भूस्खलन का जोखिम बढ़ाती है, जबकि बिहार जैसे बाढ़ग्रस्त इलाकों में नई बारिश राहत कार्य और जल निकासी को प्रभावित कर सकती है। मध्यप्रदेश और पूर्वी राजस्थान में तेज बारिश से निचले इलाकों में जलभराव, नदी-नालों का स्तर बढ़ने और यातायात बाधित होने का खतरा है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और IMD के ताजा अलर्ट देखते रहना जरूरी है।