रायपुर, 14 सितंबर 2026 | छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर चल रहे विवाद के बीच शिक्षकों से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। करीब 1.01 लाख शिक्षकों के उपलब्ध डेटा के विश्लेषण में 28,597 शिक्षकों के पास TET प्रमाणपत्र दर्ज है, जबकि 72,783 शिक्षकों के रिकॉर्ड में TET प्रमाणपत्र नहीं दिख रहा है। इन आंकड़ों के मुताबिक करीब सात में से पांच शिक्षकों के रिकॉर्ड में TET सर्टिफिकेट दर्ज नहीं है। हालांकि यहां एक जरूरी बात यह है कि डेटाबेस में प्रमाणपत्र दर्ज नहीं होना और शिक्षक का वास्तव में TET पास न होना हमेशा एक ही बात नहीं है। अंतिम स्थिति विभागीय दस्तावेज सत्यापन के बाद ही साफ होगी।
28,597 शिक्षकों के रिकॉर्ड में TET Certificate
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 28,597 शिक्षकों के रिकॉर्ड में TET प्रमाणपत्र मौजूद है। वहीं 72,783 शिक्षकों के रिकॉर्ड में TET सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं दिख रहा। दोनों आंकड़ों को मिलाकर कुल संख्या 1,01,380 शिक्षक होती है। यानी मामला केवल कुछ हजार शिक्षकों तक सीमित नहीं है। अगर विभागीय सत्यापन में यही तस्वीर बनी रहती है तो TET से जुड़ा फैसला प्रदेश के बड़े शिक्षक वर्ग को प्रभावित कर सकता है।
Bilaspur में सबसे ज्यादा 5,646 शिक्षक
जिलेवार डेटा में बिलासपुर सबसे ऊपर बताया जा रहा है। यहां 5,646 शिक्षकों के रिकॉर्ड में TET प्रमाणपत्र दर्ज नहीं है। इसके बाद दूसरे जिलों में भी बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक बताए गए हैं। शिक्षा विभाग की ओर से आंकड़ों की जांच और पात्रता से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन पर नजर रखी जा रही है।
क्या सभी 72 हजार शिक्षकों को अब TET देना ही होगा?
यहीं सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत है। यह कहना कि हर बिना-TET शिक्षक को अब परीक्षा देना ही पड़ेगा, पूरी तरह सही नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई 2026 को अपने फैसले में TET को in-service teachers के लिए भी जरूरी माना, लेकिन पुराने शिक्षकों के लिए अलग-अलग स्थिति तय की। जिन शिक्षकों की 1 सितंबर 2025 को पांच साल से ज्यादा सेवा बाकी थी, उन्हें TET पास करने के लिए समय दिया गया है और अंतिम समयसीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दी गई है।
5 साल या कम सेवा बाकी वालों को राहत
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पुराने शिक्षकों की 1 सितंबर 2025 को सेवानिवृत्ति में पांच साल या उससे कम समय बाकी था, वे TET पास किए बिना भी रिटायरमेंट तक सेवा जारी रख सकते हैं। लेकिन अगर वे Promotion चाहते हैं तो TET पास करना जरूरी होगा। इसलिए छत्तीसगढ़ में 72,783 का पूरा आंकड़ा सीधे “परीक्षा देने वाले शिक्षक” नहीं माना जा सकता। इसमें सेवा अवधि, नियुक्ति की तारीख, पद और लागू नियमों की अलग-अलग जांच करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों अनिवार्य माना TET?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि TET शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यताओं में शामिल है और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से इसे केवल नई भर्ती तक सीमित नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार ने भी संसद में स्पष्ट किया है कि राज्यों को TET नियमित रूप से, संभव हो तो साल में दो बार आयोजित करने का प्रयास करना चाहिए ताकि सेवारत शिक्षकों को निर्धारित समय में पात्रता पूरी करने का पर्याप्त मौका मिले।
TET को लेकर छत्तीसगढ़ में लगातार आंदोलन
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में शिक्षक संगठनों का विरोध भी तेज हुआ है। अगस्त में प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालयों पर ‘TET मुक्ति रैली’ आयोजित की गई थी। आंदोलित शिक्षकों की मांग है कि RTE/TET व्यवस्था लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को अनिवार्य परीक्षा से राहत दी जाए और उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। सितंबर में भी शिक्षक संगठनों ने 1 से 15 सितंबर तक जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देने और अपनी मांगों को आगे बढ़ाने का अभियान चलाया।
TET पास शिक्षक भी आंदोलन में, लेकिन मांग अलग
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ बिना TET वाले पुराने शिक्षक परीक्षा की अनिवार्यता का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ TET पास शिक्षक अपनी पदोन्नति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। 5 सितंबर को नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर बड़ी संख्या में TET qualified teachers ने ‘TET आधारित पदोन्नति न्याय सत्याग्रह’ किया। उनका कहना है कि पात्रता पूरी करने के बावजूद पदोन्नति प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है। यानी प्रदेश में TET विवाद के दो अलग पहलू हैं—एक वर्ग TET की अनिवार्यता से राहत चाहता है, जबकि दूसरा TET के आधार पर पदोन्नति चाहता है।
हाईकोर्ट में भी पहुंचा Promotion का मामला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में TET के कारण पदोन्नति रोके जाने से जुड़ा मामला भी पहुंच चुका है। 3 सितंबर को हाईकोर्ट ने एक मामले में अंतरिम राहत देते हुए कहा कि पदोन्नति प्रक्रिया के दौरान होने वाली नियुक्तियां संबंधित याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। इससे साफ है कि शिक्षक पात्रता और पदोन्नति का मामला केवल प्रशासनिक ही नहीं, न्यायिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो चुका है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
राज्य सरकार के सामने अब कई स्तर पर चुनौती है। सबसे पहले यह स्पष्ट करना होगा कि उपलब्ध रिकॉर्ड में कितने शिक्षक वास्तव में TET पास नहीं हैं और कितनों का सर्टिफिकेट केवल पोर्टल या डेटा में दर्ज नहीं है। इसके बाद नियुक्ति वर्ष, बची हुई सेवा और पदोन्नति की स्थिति के आधार पर यह तय करना होगा कि किन शिक्षकों पर सुप्रीम कोर्ट का TET संबंधी निर्देश लागू होगा। अगर बड़ी संख्या में शिक्षकों को परीक्षा देनी पड़ती है तो प्रदेश में पर्याप्त TET परीक्षा अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा।