BRICS Summit: भारत में आयोजित दो दिवसीय BRICS शिखर सम्मेलन का आज समापन हो रहा है। सम्मेलन में दुनिया के कई प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि शामिल हुए। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान विभिन्न देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और साझा वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन से इतर कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन मुलाकातों में आर्थिक सहयोग, आपसी हितों और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन के अंत में ‘दिल्ली घोषणापत्र’ भी जारी किया गया। लेकिन BRICS सम्मेलन के साथ एक और बात ने राजनीतिक गलियारों का ध्यान खींचा। भारत की भूमिका और सम्मेलन के नतीजों को लेकर सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के कुछ नेताओं ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
BRICS में भारत की भूमिका पर रविशंकर प्रसाद का बड़ा दावा
बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने BRICS सम्मेलन को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों पर पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान BRICS में भारत की स्थिति कमजोर थी, जबकि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज इस समूह में एक ‘ब्राइट स्पॉट’ के तौर पर उभरा है। रविशंकर प्रसाद ने भारत की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए IMF की रिपोर्ट का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को स्वीकार किया है और सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग तथा ट्रेड समेत कई क्षेत्रों में भारत की प्रगति को रेखांकित किया है।
सलमान खुर्शीद ने भी रखी भारत की भूमिका पर राय
कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भी BRICS में भारत की भूमिका को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी अध्यक्षता के दौरान ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, जिसमें अलग-अलग देश साझा मुद्दों पर साथ आ सकें। खुर्शीद ने आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर वैश्विक सहमति बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उनकी प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब BRICS के मंच पर वैश्विक चुनौतियों और सदस्य देशों के बीच सहयोग को लेकर चर्चा हो रही है।
मायावती ने ‘दिल्ली घोषणापत्र’ को बताया कूटनीतिक उपलब्धि
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने भी BRICS सम्मेलन को लेकर मोदी सरकार की तारीफ की है। उन्होंने दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में जारी ‘दिल्ली घोषणापत्र’ को सूझबूझ भरी कूटनीतिक उपलब्धि बताया। मायावती के मुताबिक BRICS देशों का घोषणापत्र पर सर्वसम्मति से सहमत होना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान को लेकर बढ़े तनाव और टैरिफ जैसी गंभीर आर्थिक चुनौतियों के बीच सदस्य देशों का साझा घोषणापत्र जारी करना आपसी समझ और कूटनीतिक प्रयास का संकेत है।
‘दिल्ली घोषणापत्र’ पर क्यों टिकी हैं दुनिया की नजरें?
BRICS शिखर सम्मेलन के समापन पर जारी किया गया दिल्ली घोषणापत्र समूह के साझा मुद्दों और प्राथमिकताओं को सामने रखता है। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर व्यापार, युद्ध, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक अनिश्चितता जैसे मुद्दे चर्चा में हैं, BRICS का संयुक्त रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की अध्यक्षता में हुए सम्मेलन में इन मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में चर्चा हुई।
PM मोदी ने कई नेताओं के साथ की द्विपक्षीय बैठकें
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। इन बैठकों में भारत के आर्थिक हितों, व्यापार, सहयोग और रणनीतिक संबंधों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। भारत के लिए BRICS का मंच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए देश वैश्विक दक्षिण, उभरती अर्थव्यवस्थाओं और प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संवाद को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है।
BRICS सम्मेलन पर एक मंच पर दिखी अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
BRICS सम्मेलन को लेकर बीजेपी ने जहां इसे भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और आर्थिक ताकत से जोड़ा, वहीं विपक्ष की ओर से भी सम्मेलन की उपलब्धियों और भारत की भूमिका पर सकारात्मक टिप्पणियां सामने आईं। रविशंकर प्रसाद ने जहां कांग्रेस के पुराने कार्यकाल और मौजूदा सरकार की तुलना करते हुए मोदी सरकार को श्रेय दिया, वहीं सलमान खुर्शीद और मायावती ने भारत की भूमिका तथा दिल्ली घोषणापत्र के महत्व पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। यही वजह है कि BRICS Summit अब केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके प्रभाव को लेकर देश की राजनीति में भी चर्चा तेज हो गई है।