Washington: अमेरिका में 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी के बीच सार्वजनिक किए गए खुफिया दस्तावेजों ने अल-कायदा और उसके सरगना ओसामा बिन लादेन की आतंकी साजिशों को लेकर कई अहम जानकारियां सामने रखी हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने 11 सितंबर 2026 को 9/11 से जुड़े 71 President’s Daily Brief दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इनमें 1998 से लेकर 2001 तक के कई खुफिया आकलन शामिल हैं। इसी संग्रह में 28 अगस्त 1998 की एक ब्रीफिंग भी शामिल है, जिसका शीर्षक “Bin Ladin Terrorist Network Still a Threat” है। CIA के अनुसार उस दौर में बिन लादेन का नेटवर्क लगातार आतंकी हमलों की क्षमता और मंशा रखता था।
9/11 से पहले ही अल-कायदा की नजर भारत पर थी?
1998 की इस खुफिया ब्रीफिंग में बिन लादेन के नेटवर्क से जुड़े संभावित आतंकी खतरों का आकलन किया गया था। रिपोर्ट उस समय की अमेरिकी चिंताओं को दर्शाती है, जब अल-कायदा का नेटवर्क अलग-अलग देशों में अमेरिकी और अन्य पश्चिमी हितों को निशाना बनाने की क्षमता विकसित कर रहा था। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सार्वजनिक CIA दस्तावेज में भारत में किसी खास जगह या किसी निश्चित हमले की योजना का विवरण सामने नहीं आता। इसलिए इसे भारत में किसी विशिष्ट हमले की पक्की योजना के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
1998 में ही CIA ने बिन लादेन के नेटवर्क को बताया था बड़ा खतरा
CIA की हालिया रिलीज में 1998 के कई दस्तावेज शामिल हैं। इनमें जून 1998 का “Potential Targets for Anti-US Attacks by Bin Ladin”, जुलाई का “Reports That Bin Ladin is Planning Attacks Inside the US” और 28 अगस्त का “Bin Ladin Terrorist Network Still a Threat” शामिल हैं। इससे पता चलता है कि 9/11 से काफी पहले ही अमेरिकी खुफिया एजेंसियां बिन लादेन की गतिविधियों और उसके नेटवर्क की हमले करने की क्षमता पर लगातार नजर रख रही थीं।
अफ्रीका दूतावास धमाकों के बाद बढ़ी थी चिंता
7 अगस्त 1998 को केन्या के नैरोबी और तंजानिया के दार एस सलाम स्थित अमेरिकी दूतावासों पर बम धमाके हुए थे। इन हमलों में कुल 224 लोगों की मौत हुई थी। CIA के अनुसार इन हमलों ने बिन लादेन और अल-कायदा को अमेरिकी जनता के सामने एक बड़े आतंकी खतरे के रूप में ला दिया। इन्हीं हमलों के बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के लिए बिन लादेन का नेटवर्क और उसकी अंतरराष्ट्रीय गतिविधियां और बड़ा फोकस बन गईं।
भारत में 2001 का संसद हमला और बढ़ा आतंकी खतरा
1998 की CIA ब्रीफिंग में भारत में किसी विशिष्ट हमले का स्थान या तारीख नहीं बताई गई थी। लेकिन इसके कुछ वर्षों बाद भारत ने 13 दिसंबर 2001 को संसद परिसर पर आतंकी हमला झेला। यह हमला 9/11 के लगभग तीन महीने बाद हुआ था। संसद परिसर पर हुए हमले में सुरक्षा कर्मियों समेत नौ लोगों की जान गई थी और पांच हमलावर मारे गए थे। हालांकि, उपलब्ध 1998 CIA दस्तावेज को सीधे 2001 के संसद हमले की पूर्व सूचना या उसकी योजना से जोड़ना उचित नहीं होगा।
बिन लादेन पर 2000 में भी CIA की नजर थी
CIA की जारी की गई सूची में 27 जून 2000 की एक रिपोर्ट “Pakistan pressing Bin Ladin network” भी शामिल है। इससे पता चलता है कि उस समय अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान में बिन लादेन के नेटवर्क को लेकर लगातार आकलन कर रही थीं। इसके बाद भी CIA की रिपोर्टों में बिन लादेन की गतिविधियों, उसके नेटवर्क और संभावित आतंकी हमलों को लेकर लगातार चेतावनियां दर्ज होती रहीं।
आखिर पाकिस्तान में कहां मिला था ओसामा बिन लादेन?
9/11 के बाद भी बिन लादेन लंबे समय तक अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहा। CIA के अनुसार एक अहम कूरियर की पहचान और उसकी गतिविधियों को ट्रैक करने के बाद अमेरिकी एजेंसियां पाकिस्तान के एबटाबाद स्थित एक परिसर तक पहुंचीं। इसके बाद 2 मई 2011 को अमेरिकी सैन्य अभियान में बिन लादेन मारा गया। CIA के मुताबिक इस अभियान तक पहुंचने में वर्षों तक चले खुफिया संग्रह और विश्लेषण की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
9/11 से पहले की चेतावनियों की पूरी टाइमलाइन भी हुई सार्वजनिक
CIA की नई रिलीज सिर्फ एक दस्तावेज तक सीमित नहीं है। 71 सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में 1998 से लेकर सितंबर 2001 तक की कई महत्वपूर्ण ब्रीफिंग शामिल हैं। इनमें अगस्त 2001 की “Bin Ladin Determined To Strike in US”, 28 अगस्त 2001 की “Bin Ladin Operations Are Expert and Flexible” और 12 सितंबर 2001 की “Situation Report: Bin Ladin's Tracks” जैसी रिपोर्टें भी शामिल हैं। CIA के मुताबिक यह रिलीज 9/11 से संबंधित उसके President’s Daily Brief दस्तावेजों का अब तक का सबसे बड़ा सार्वजनिक डिक्लासिफिकेशन है। कुल मिलाकर 100 से ज्यादा पन्नों की CIA विश्लेषण सामग्री पहली बार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई गई है।