भोपाल/श्योपुर, 14 सितंबर 2026 | भारत में चीतों की आबादी को स्थायी और सुरक्षित बनाने के लिए Project Cheetah अब कूनो नेशनल पार्क से आगे विस्तार की ओर बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (पूर्व नौरादेही) को भी चीतों के अगले संभावित ठिकाने के रूप में तैयार किया जा रहा है। NTCA की आधिकारिक Project Cheetah वेबसाइट पर भी Kuno के साथ Gandhi Sagar landscape और आगे के विस्तार को परियोजना की रणनीति का हिस्सा बताया गया है। हालांकि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में दक्षिण अफ्रीका से एक और 12 चीतों की खेप अक्टूबर-दिसंबर के बीच कूनो लाए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन 14 सितंबर तक केंद्र सरकार, NTCA या पर्यावरण मंत्रालय की ओर से ऐसी नई खेप और तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं मिली है।
फरवरी 2026 में Botswana से आए थे 9 चीते
Project Cheetah के तहत तीसरी अंतरराष्ट्रीय खेप 28 फरवरी 2026 को Botswana से आई थी। इसमें 6 मादा और 3 नर समेत कुल 9 चीते कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे। इनके आने के बाद उस समय देश में चीतों की संख्या 48 पहुंची थी। इससे पहले सितंबर 2022 में Namibia से 8 और फरवरी 2023 में South Africa से 12 चीते भारत लाए गए थे।
48 नहीं, बाद में बढ़कर 52 हुई संख्या
आपकी कॉपी में देशभर में कुल 48 चीते बताए गए हैं, लेकिन यह फरवरी 2026 का आंकड़ा है। इसके बाद कूनो में नए शावकों के जन्म से संख्या बढ़ी। जून 2026 के राष्ट्रपति दौरे के दौरान अधिकारियों ने देश में 52 चीते होने की जानकारी दी थी। इनमें:
- कूनो नेशनल पार्क – 49 चीते
- गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य – 3 चीते
शामिल थे। यही फिलहाल मुझे मिला सबसे नया स्पष्ट सरकारी/आधिकारिक सार्वजनिक आंकड़ा है।
गांधी सागर में पहले से रह रहे 3 चीते
कूनो के बाद गांधी सागर Wildlife Sanctuary देश में चीतों का दूसरा स्थापित ठिकाना बन चुका है। यहां चीतों के लिए लगभग 64 वर्ग किलोमीटर का predator-proof enclosure विकसित किया गया है। इसमें चीतल और दूसरी prey species बढ़ाकर पर्याप्त शिकार आधार तैयार किया गया है। तीन चीते यहां पहले से मौजूद हैं और अब भविष्य में और चीतों को भेजने की योजना पर काम चल रहा है।
गांधी सागर में नई मादा भेजने की तैयारी
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक गांधी सागर में प्रजनन बढ़ाने के लिए कूनो से एक और मादा चीता भेजने पर विचार चल रहा है। निर्वा या वीरा में से किसी एक को वहां स्थानांतरित किए जाने की संभावना बताई गई है। इस संबंध में बड़ा फैसला Project Cheetah की वर्षगांठ के आसपास सामने आ सकता है। हालांकि अंतिम नाम और शिफ्टिंग तारीख अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं हुई है।
नौरादेही में भी तैयार हुआ Cheetah Boma
सागर के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे पहले नौरादेही अभयारण्य के नाम से जाना जाता था, में भी चीतों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। यहां करीब 438 हेक्टेयर का soft-release boma तैयार किया गया है। कुछ चीतों को कूनो से यहां लाने की योजना केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रही थी। यह क्षेत्र खास इसलिए भी है क्योंकि यहां पहले से बाघ और तेंदुए मौजूद हैं।
17 हजार वर्ग KM का Cheetah Landscape लक्ष्य
Project Cheetah का लंबी अवधि का लक्ष्य केवल कुछ बाड़ों में चीते रखना नहीं है। सरकार एक बड़े Kuno–Gandhi Sagar metapopulation landscape पर काम कर रही है, जो मध्यप्रदेश और राजस्थान के हजारों वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को जोड़ता है। सरकार का लक्ष्य 2032 तक करीब 60 से 70 चीतों की self-sustaining population विकसित करना है।
Kuno के चीते अब लंबी दूरी तय कर रहे
कूनो के कई चीते अब पार्क की सीमा से बाहर भी निकल रहे हैं। उनकी निगरानी के लिए विशेष टीमें दिन-रात tracking कर रही हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक कुछ चीते मध्यप्रदेश के कई जिलों और राजस्थान की ओर भी लंबी दूरी तय कर रहे हैं। यह behaviour free-ranging cheetah population के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इससे monitoring चुनौतीपूर्ण भी हो गई है।