मुंबई: हिंदी दिवस के अवसर पर आज से महाराष्ट्र के नवी मुंबई में छठा अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन शुरू हो रहा है। गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की ओर से 14 और 15 सितंबर को आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में हिंदी को राजभाषा, जनभाषा और संपर्क भाषा के रूप में और मजबूत बनाने के साथ-साथ सभी भारतीय भाषाओं के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा होगी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे और वर्ष 2025-26 के राजभाषा गौरव एवं राजभाषा कीर्ति पुरस्कार प्रदान करेंगे।
नवी मुंबई में आज से छठा अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन
हिंदी दिवस 2026 के अवसर पर गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की ओर से 14 और 15 सितंबर को महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित सिडको एग्जीबिशन सेंटर में हिंदी दिवस एवं छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का संयुक्त आयोजन किया जा रहा है। दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में हिंदी के वर्तमान स्वरूप, उसके विस्तार और बदलते तकनीकी दौर में उसकी भूमिका पर मंथन किया जाएगा।
सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के विद्वान, साहित्यकार, शिक्षाविद, सांसद और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी हिस्सा लेंगे। चर्चा का प्रमुख केंद्र हिंदी को राजभाषा के साथ-साथ जनभाषा और संपर्क भाषा के रूप में और प्रभावी बनाना होगा। इसके साथ ही दूसरी भारतीय भाषाओं के साथ हिंदी के बेहतर तालमेल और समन्वय पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
अमित शाह करेंगे उद्घाटन, दिए जाएंगे राजभाषा पुरस्कार
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे। इस दौरान वर्ष 2025-26 के लिए राजभाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को ‘राजभाषा गौरव’ और ‘राजभाषा कीर्ति’ पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
सम्मेलन का उद्देश्य सरकारी कामकाज में राजभाषा के प्रभावी इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ हिंदी को आधुनिक ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान से जोड़ना भी है। डिजिटल युग में भारतीय भाषाओं की बढ़ती भूमिका को देखते हुए भाषा और तकनीक के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया जाएगा।
14 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी दिवस?
आज देशभर में हिंदी दिवस भी मनाया जा रहा है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी ऐतिहासिक अवसर की स्मृति में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।
वर्तमान में हिंदी 52 करोड़ से अधिक लोगों की पहली भाषा है और यह दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है। हिंदी का प्रभाव साहित्य और पत्रकारिता से लेकर सिनेमा, टेलीविजन, शिक्षा, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया तक लगातार बढ़ा है।

ओम बिरला ने हिंदी की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हिंदी दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि साहित्य और पत्रकारिता से लेकर सिनेमा, टेलीविजन, शिक्षा और डिजिटल जगत तक हिंदी लाखों लोगों के लिए अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि इंटरनेट, सोशल मीडिया, डिजिटल शिक्षा, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में भारतीय भाषाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। हिंदी अब ज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और आधुनिक अभिव्यक्ति की प्रभावी भाषा के रूप में भी अपनी जगह बना रही है।
अमित शाह ने हिंदी के साथ भारतीय भाषाओं को मजबूत करने पर दिया जोर
हिंदी दिवस पर अमित शाह ने कहा कि हिंदी जनसंचार, सुशासन और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि सभी भारतीय भाषाओं के साथ आगे बढ़ते हुए हिंदी अब प्रौद्योगिकी और अनुसंधान की भाषा के रूप में भी उभर रही है।
गृह मंत्री ने नागरिकों से हिंदी के साथ-साथ सभी भारतीय भाषाओं को सशक्त बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने हिंदी को समृद्ध बनाने में योगदान देने वाली सभी विभूतियों को भी नमन किया।
राजनाथ सिंह बोले- हिंदी भारत की संस्कृति और जीवन-मूल्यों की अभिव्यक्ति
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंदी दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, सभ्यता और जीवन-मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि हिंदी देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोने का काम करती है। राजनाथ सिंह ने हिंदी के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लेने के साथ ज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्रों में भी हिंदी को और मजबूत बनाने का आह्वान किया।
हिंदी के साथ सभी भारतीय भाषाओं के विकास पर फोकस
छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य हिंदी के विकास के साथ देश की सभी भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाना है। सम्मेलन में इस बात पर चर्चा होगी कि हिंदी को राजभाषा, जनभाषा और संपर्क भाषा के रूप में मजबूत करते हुए दूसरी भारतीय भाषाओं के साथ उसका समन्वय कैसे बढ़ाया जाए।
तकनीक, डिजिटल शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अनुसंधान के बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय भाषाओं के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं। ऐसे में सम्मेलन को हिंदी और भारतीय भाषाओं को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान तथा तकनीकी दुनिया से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच के तौर पर देखा जा रहा है।