नई दिल्ली - होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर हालिया हमलों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सप्लाई बाधित होने की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। सोमवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स करीब 3% बढ़कर 107.74 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी क्रूड फ्यूचर्स में 2.88% की तेजी आई और यह 102.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

होर्मुज में जहाज पर हमला, चालक दल को निकाला गया
ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज को प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया। हमले के बाद जहाज में आग लग गई, जिसके चलते चालक दल को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का बड़ा व्यवधान वैश्विक तेल बाजार पर तत्काल असर डाल सकता है।

सऊदी अरब में भी हूती हमले की खबर
सऊदी अरब की सरकारी मीडिया के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने देश के दक्षिणी जाजान प्रांत को निशाना बनाया। हमले में कुछ घरों और एक मस्जिद को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा हूतियों ने पड़ोसी प्रांत में मौजूद सऊदी सैन्य ठिकाने को भी निशाना बनाया। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण तेल उत्पादक देशों से सप्लाई को लेकर बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है।
ड्रोन हमले के बाद सऊदी तेल पाइपलाइन बंद
तेल सप्लाई को लेकर चिंता उस समय और बढ़ गई जब शुक्रवार को ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को बंद करना पड़ा। यह पाइपलाइन सऊदी अरब को होर्मुज जलडमरूमध्य से बचते हुए अपने तेल को दूसरे मार्ग से निर्यात करने में मदद करती है। पाइपलाइन में व्यवधान के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति के करीब 4% हिस्से पर असर पड़ने का खतरा जताया जा रहा है।
तेल की कीमतों पर सीधा असर
खाड़ी क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे हमलों और सप्लाई बाधित होने की आशंका का असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में करीब 8% की तेजी दर्ज की गई थी और जुलाई के बाद पहली बार भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गए थे। अगर होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र में तनाव आगे भी बढ़ता है और तेल परिवहन प्रभावित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी कीमतों का दबाव बढ़ सकता है।