नई दिल्ली - देश के कई हिस्सों में आम लोगों की रसोई का बजट लगातार प्रभावित हो रहा है। चीनी, प्याज और टमाटर जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम पहले से ऊंचे बने हुए हैं। अब लहसुन और अदरक की कीमतों में तेज उछाल ने घरेलू खर्च का दबाव और बढ़ा दिया है। बीते कुछ हफ्तों में मंडियों में लहसुन के भाव करीब दोगुने होने की बात सामने आ रही है।

लहसुन-अदरक के भाव में बड़ा उछाल
रसोई में लगभग रोज इस्तेमाल होने वाले लहसुन और अदरक की कीमतों में अचानक तेजी आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ बाजारों में लहसुन के भाव कुछ ही हफ्तों में करीब 200 रुपये से बढ़कर 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। अदरक भी महंगाई की इस लहर से अछूता नहीं है। अगस्त में जहां अदरक करीब 150 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रहा था, वहीं अब इसका औसत भाव लगभग 300 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। यानी अदरक की कीमत में भी करीब दोगुना उछाल देखने को मिला है।

प्याज की कीमत भी बनी चिंता
लहसुन और अदरक से पहले प्याज के बढ़ते दामों ने लोगों की परेशानी बढ़ाई थी। कई खुदरा बाजारों में प्याज अभी भी 70 रुपये प्रति किलो से ऊपर बिकने की जानकारी सामने आ रही है। प्याज की कीमतों में तेजी का सीधा असर आम परिवारों के मासिक रसोई बजट पर पड़ रहा है। हालांकि, आने वाले समय में प्याज के दामों में राहत की उम्मीद जताई जा रही है। इसकी वजह नई खरीफ प्याज की फसल की आवक है।

टमाटर का भाव करीब 40 रुपये किलो
टमाटर की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव जारी है। मौजूदा समय में कई बाजारों में टमाटर का औसत खुदरा भाव करीब 40 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। प्याज और अन्य सब्जियों के मुकाबले यह कीमत कम जरूर है, लेकिन रोजमर्रा की खरीदारी में इसका भी असर दिखाई दे रहा है।
अक्टूबर से मिल सकती है प्याज में राहत
बाजार विशेषज्ञों और उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अक्टूबर से खरीफ प्याज की कटाई शुरू होने के बाद बाजार में इसकी आपूर्ति बढ़ सकती है। नई फसल की आवक बढ़ने पर प्याज की कीमतों में नरमी आने की संभावना जताई जा रही है। सरकार की ओर से भी आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर नजर रखी जा रही है और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, लहसुन और अदरक के मामले में आगे कीमतें किस दिशा में जाती हैं, यह मंडियों में आवक और मांग पर निर्भर करेगा। फिलहाल रोजमर्रा की रसोई में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी चीजों के महंगे होने से आम उपभोक्ताओं के सामने घरेलू बजट संभालने की चुनौती बनी हुई है।