भोपाल: मध्यप्रदेश का मालवा अंचल अगले तीन दिनों तक प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश की राजनीति में भी चर्चा का केंद्र बनने जा रहा है। 17 से 19 सितंबर 2026 के बीच इंदौर और उज्जैन में भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और कांग्रेस से जुड़े कई बड़े कार्यक्रम आयोजित होने हैं। इन कार्यक्रमों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी रहेगी। लगातार तीन दिनों तक होने वाले इन दौरों ने मध्यप्रदेश की सियासत को गर्म कर दिया है। एक ओर भाजपा संगठन और सरकार से जुड़े कार्यक्रम होंगे, दूसरी ओर संघ की ओर से युवाओं और वैचारिक संवाद पर जोर रहेगा। इसके अगले ही दिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी छात्रों और युवाओं के बीच अपनी बात रखेंगे। ऐसे में इन तीन दिनों को राजनीतिक और वैचारिक गतिविधियों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
17 सितंबर को मध्यप्रदेश आएंगे भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन
तीन दिवसीय राजनीतिक घटनाक्रम की शुरुआत 17 सितंबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के मध्यप्रदेश दौरे से होगी। उनके इंदौर, मंदसौर और उज्जैन में अलग-अलग कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। नितिन नवीन सबसे पहले इंदौर में आयोजित स्वामित्व योजना से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद उनका मंदसौर जाने का कार्यक्रम है, जहां वे गांधी सागर अभयारण्य में चीतों को छोड़ने से जुड़े आयोजन में हिस्सा लेंगे। मंदसौर के बाद भाजपा अध्यक्ष उज्जैन पहुंचेंगे। यहां उनके दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण क्षिप्रा नदी के रामघाट पर आयोजित होने वाला भव्य दीपोत्सव रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर रामघाट पर करीब 25 लाख दीप प्रज्वलित करने की तैयारी की जा रही है। इस आयोजन को सेवा संकल्प अभियान से भी जोड़ा गया है। बड़े स्तर पर होने वाले इस दीपोत्सव के जरिए धार्मिक आस्था, जनभागीदारी और संगठनात्मक सक्रियता का संदेश देने की तैयारी है।
रामघाट पर दीपोत्सव से बनेगा धार्मिक और राजनीतिक माहौल
उज्जैन में क्षिप्रा नदी के रामघाट पर होने वाला दीपोत्सव इस पूरे दौरे का प्रमुख आकर्षण रहेगा। बड़ी संख्या में दीप जलाने के आयोजन से शहर में धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल बनेगा। भाजपा इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जुड़े सेवा और जनभागीदारी अभियान के रूप में देख रही है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की भागीदारी की संभावना है। भाजपा अध्यक्ष की मौजूदगी के कारण यह कार्यक्रम संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
17 और 18 सितंबर को उज्जैन में रहेंगे मोहन भागवत
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के दौरे के साथ ही आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत भी 17 और 18 सितंबर को उज्जैन में मौजूद रहेंगे। 17 सितंबर को उज्जैन पहुंचने के बाद वे संघ के प्रमुख पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों से संवाद करेंगे। इस दौरान संगठन की गतिविधियों, सामाजिक सरोकारों और आगामी कार्यक्रमों को लेकर चर्चा हो सकती है। संघ प्रमुख का दौरा संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर के पदाधिकारियों के साथ संवाद का अवसर मिलेगा।
युवा धर्म संसद में युवाओं को संबोधित करेंगे भागवत
18 सितंबर को डॉ. मोहन भागवत देवास रोड स्थित गीता भवन में आयोजित युवा धर्म संसद में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में वे युवाओं को संबोधित करेंगे। युवा धर्म संसद के जरिए युवाओं को भारतीय संस्कृति, सामाजिक जिम्मेदारी, राष्ट्र निर्माण और वैचारिक विषयों से जोड़ने पर जोर दिए जाने की संभावना है। संघ लंबे समय से युवाओं के बीच संवाद और वैचारिक जागरूकता को महत्व देता रहा है। ऐसे में भागवत का यह कार्यक्रम उज्जैन के राजनीतिक और सामाजिक वातावरण में खास प्रभाव छोड़ सकता है।
नितिन नवीन और मोहन भागवत की संभावित मुलाकात पर भी नजर
17 और 18 सितंबर को नितिन नवीन और मोहन भागवत का उज्जैन में एक ही समय मौजूद रहना राजनीतिक और संगठनात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं की मुलाकात की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन भाजपा और संघ से जुड़े कार्यक्रमों के एक साथ होने के कारण राजनीतिक हलकों में इसको लेकर चर्चा तेज है। यदि दोनों नेताओं की मुलाकात होती है, तो इसे संगठनात्मक समन्वय और आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से अहम माना जा सकता है।
19 सितंबर को राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम
तीन दिनों के इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक पड़ाव 19 सितंबर को इंदौर में देखने को मिलेगा। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। कांग्रेस इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों, युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाने की तैयारी में है। राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस संगठन की तैयारियां तेज हो गई हैं। पार्टी की कोशिश है कि युवाओं के बीच रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रिया और अवसरों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी जाए। राहुल गांधी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब इसके ठीक पहले भाजपा अध्यक्ष और आरएसएस प्रमुख के बड़े कार्यक्रम इंदौर-उज्जैन में आयोजित हो रहे हैं। इसलिए कांग्रेस का यह आयोजन राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बीजेपी और कांग्रेस के बीच युवाओं को लेकर बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
मालवा में होने वाले इन कार्यक्रमों को केवल अलग-अलग दौरे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषण के स्तर पर यह घटनाक्रम युवाओं और छात्रों के बीच प्रभाव बढ़ाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
- 17 सितंबर: भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के जरिए संगठन और सरकार से जुड़े कार्यक्रमों का संदेश
- 17-18 सितंबर: मोहन भागवत के जरिए संघ का वैचारिक और युवा संवाद
- 19 सितंबर: राहुल गांधी के जरिए कांग्रेस का छात्र-युवा केंद्रित राजनीतिक संदेश
लगातार तीन दिनों तक होने वाली इन गतिविधियों से भाजपा, संघ और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विमर्श तेज होने की संभावना है। खासतौर पर युवाओं से जुड़े मुद्दों पर दोनों प्रमुख राजनीतिक दल अपनी-अपनी प्राथमिकताएं सामने रख सकते हैं।
इंदौर-उज्जैन बनेंगे सियासी गतिविधियों का केंद्र
17 से 19 सितंबर तक इंदौर और उज्जैन में बड़े नेताओं की मौजूदगी के कारण मालवा अंचल प्रदेश की राजनीति का प्रमुख केंद्र रहेगा। भाजपा अध्यक्ष का दौरा जहां संगठनात्मक और सरकारी कार्यक्रमों से जुड़ा है, वहीं मोहन भागवत का कार्यक्रम वैचारिक और सामाजिक संवाद पर केंद्रित रहेगा। इसके बाद राहुल गांधी का छात्र सम्मेलन कांग्रेस के राजनीतिक एजेंडे को सामने रखेगा। ऐसे में इन तीन दिनों में धार्मिक आयोजन, संगठनात्मक बैठक, युवा संवाद और राजनीतिक कार्यक्रम—सभी एक साथ देखने को मिलेंगे।
किसका संदेश छोड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
मध्यप्रदेश की राजनीति में मालवा क्षेत्र का अपना खास महत्व है। इंदौर और उज्जैन न केवल धार्मिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी प्रभावशाली क्षेत्र माने जाते हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन तीन दिनों में कौन सा कार्यक्रम सबसे ज्यादा चर्चा बटोरता है। क्या भाजपा अध्यक्ष का दीपोत्सव और संगठनात्मक दौरा राजनीतिक संदेश को मजबूत करेगा? क्या मोहन भागवत का युवा धर्म संसद के जरिए वैचारिक प्रभाव बढ़ेगा? या फिर राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम युवाओं के बीच कांग्रेस की पकड़ मजबूत करने में सफल रहेगा? फिलहाल इतना तय है कि 17 से 19 सितंबर तक इंदौर और उज्जैन में होने वाले ये कार्यक्रम मध्यप्रदेश की सियासत में नई हलचल पैदा करने वाले हैं।