उज्जैन, 15 सितंबर 2026 | धार्मिक नगरी उज्जैन में गणेश चतुर्थी का पर्व आस्था और भक्ति के साथ मनाया गया। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर स्थित प्राचीन सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में विशेष पूजन-अभिषेक और महाआरती हुई। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही और मंदिर परिसर ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंजता रहा।
पंचामृत से अभिषेक, भव्य महाआरती
गणेश चतुर्थी के मौके पर भगवान सिद्धिविनायक का विधि-विधान से पंचामृत पूजन-अभिषेक किया गया। इसके बाद विशेष श्रृंगार और महाआरती हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पुत्र वैभव यादव भी मंदिर पहुंचे। उन्होंने भगवान गणेश का पूजन-अभिषेक किया और महाआरती में शामिल होकर आशीर्वाद लिया।
5 लाख मोदकों का लगा महाभोग
इस वर्ष आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण भगवान सिद्धिविनायक को लगाया गया 5 लाख मोदकों का महाभोग रहा। मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक इन मोदकों को आने वाले 12 दिनों तक श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।
2500 साल पुरानी प्रतिमा होने की धार्मिक मान्यता
मंदिर से जुड़ी स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां विराजमान भगवान सिद्धिविनायक की काले पाषाण की प्रतिमा करीब ढाई हजार वर्ष पुरानी मानी जाती है। यह भी मान्यता है कि राजा भर्तहरि के काल में महाकाल मंदिर के शिखर निर्माण के दौरान इस प्रतिमा की स्थापना की गई थी। हालांकि इस 2500 वर्ष पुराने होने के दावे को धार्मिक-स्थानीय परंपरा के रूप में ही लिखना उचित है, क्योंकि इसके समर्थन में स्पष्ट पुरातात्विक प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
बाबा महाकाल के दर्शन से पहले सिद्धिविनायक का महत्व
महाकाल मंदिर परिसर में स्थित सिद्धिविनायक गणेश मंदिर की अपनी अलग धार्मिक पहचान है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के साथ यहां भगवान गणेश का पूजन भी करते हैं। गणेश चतुर्थी जैसे विशेष अवसर पर यहां भक्तों की संख्या और बढ़ जाती है और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है।
रक्षा सूत्र को लेकर भी खास मान्यता
मंदिर में श्रद्धालुओं के बीच रक्षा सूत्र बंधवाने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता है कि यहां भगवान सिद्धिविनायक के समक्ष बंधवाया गया रक्षा सूत्र संकटों से रक्षा करता है। इसे आस्था और धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि किसी वैज्ञानिक या चिकित्सकीय गारंटी के रूप में।
गणेशोत्सव का उत्साह जारी
गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई गई और अब गणेशोत्सव के अगले दिनों में भी उज्जैन के मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में पूजा, आरती और सांस्कृतिक आयोजनों का सिलसिला जारी रहेगा। इस वर्ष गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के साथ 25 सितंबर को होगा।