जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अवमानना के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए दो वरिष्ठ IAS अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल और तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर को 21 सितंबर को कोर्ट में पेश करने की जिम्मेदारी भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर एसपी को सौंपी गई है।
कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने पर सख्ती
मामला सागर कलेक्टर कार्यालय में सेक्शन ऑफिसर शीला सेन के नियमितीकरण से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2025 को सरकार और सागर कलेक्टर को याचिकाकर्ता के दावे का 90 दिनों के भीतर निराकरण करने का आदेश दिया था। तय समयसीमा में आदेश का पालन नहीं होने पर शीला सेन ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।
नोटिस के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने आया कि दोनों अधिकारियों को नोटिस की तामील होने के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। सागर कलेक्टर की ओर से 3 दिसंबर 2025 को रजिस्ट्री को पत्र भेजकर तहसीलदार को संपर्क अधिकारी नियुक्त किए जाने की जानकारी दी गई थी।
इसके बावजूद कोर्ट में पेश होने के लिए अधिवक्ता की नियुक्ति नहीं की गई और न ही मामले में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की गई। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई।
'वारंट जारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं'
जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने कहा कि अवमानना याचिकाओं में पूरी तरह निष्क्रियता बरती गई। अदालत के अनुसार, निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं हुआ और नोटिस मिलने के बाद भी आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी स्थिति में प्रतिवादियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
21 सितंबर को कोर्ट में पेशी
हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों की पेशी सुनिश्चित करने के लिए भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर एसपी को वारंट की तामील की जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई के दौरान 21 सितंबर को कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोर्ट के आदेशों के पालन और अवमानना मामलों में सरकारी कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती को दर्शाता है।