नई दिल्ली - देशभर में चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए विभिन्न कदमों का असर अब खुदरा बाजार में दिखाई देने लगा है। सोमवार को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत लगातार चौथे दिन 60 रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे रही। हालांकि, त्योहारों के सीजन में बढ़ती मांग के कारण कुछ राज्यों में कीमतों पर दबाव अभी भी बना हुआ है।
59.57 रुपये प्रति किलो रही औसत कीमत
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को चीनी की औसत खुदरा कीमत 59.57 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। रविवार को यह कीमत 58.99 रुपये प्रति किलो थी। इससे एक दिन में औसत कीमत में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली। इससे पहले शुक्रवार को चीनी की औसत कीमत 60 रुपये प्रति किलो के स्तर से नीचे आई थी और इसके बाद लगातार तीन दिनों तक यह इसी स्तर के नीचे बनी रही।
21 अगस्त के मुकाबले अभी भी कीमत ज्यादा
आंकड़ों के मुताबिक, 21 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 58.23 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसी अवधि के दौरान केंद्र सरकार ने चीनी के आयात की अनुमति देने समेत कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए थे। हालांकि, मौजूदा औसत कीमत अभी भी 21 अगस्त के स्तर से ऊपर है। सोमवार को देश में चीनी की अधिकतम खुदरा कीमत 85 रुपये प्रति किलो रही, जबकि न्यूनतम कीमत 40 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई।

दक्षिण भारत में कीमतों का मिला-जुला रुख
दक्षिणी राज्यों में चीनी की कीमतों में अलग-अलग रुझान देखने को मिला। आंध्र प्रदेश में औसत खुदरा कीमत बढ़कर 55.56 रुपये प्रति किलो हो गई, जबकि 21 अगस्त को यह 49.58 रुपये थी। केरल में भी कीमत में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। यहां चीनी की औसत खुदरा कीमत 56.75 रुपये से बढ़कर 57.80 रुपये प्रति किलो हो गई। वहीं, तमिलनाडु और केरल में मामूली गिरावट का भी रुझान दर्ज किया गया।
महाराष्ट्र और यूपी में चीनी हुई सस्ती
देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली। महाराष्ट्र में औसत खुदरा कीमत 59 रुपये से घटकर 58.22 रुपये प्रति किलो हो गई। उत्तर प्रदेश में भी उपभोक्ताओं को मामूली राहत मिली। यहां चीनी की औसत खुदरा कीमत 59.64 रुपये से घटकर 57.88 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई।
त्योहारों की मांग से कीमतों पर दबाव
चीनी की कीमतों में हालिया नरमी के बावजूद त्योहारों के दौरान खपत बढ़ने से कुछ क्षेत्रों में दाम पर दबाव बना हुआ है। आने वाले दिनों में बाजार में मांग और आपूर्ति की स्थिति यह तय करेगी कि खुदरा कीमतों में और गिरावट आती है या फिर त्योहारों की मांग के कारण दाम दोबारा बढ़ते हैं।