करनाल - वृंदावन में संत एवं कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के दरबार में हरियाणा के करनाल की एक विवाहिता ने पति की कथित प्रताड़ना की दर्दनाक कहानी सुनाई। महिला ने आरोप लगाया कि उसका पति शराब पीकर आए दिन उसके साथ मारपीट करता है। इतना ही नहीं, वह जबरदस्ती उसे भी शराब पिलाने की कोशिश करता था। विरोध करने पर कथित तौर पर उसके सिर पर कैंची से हमला किया गया।
महिला ने बताया कि पति उसे जान से मारने की धमकी भी देता था। उसके मुताबिक, पति ने धमकाया था कि वह उसे मारकर शौचालय के कच्चे गड्ढे में दबा देगा। इन धमकियों से डरकर महिला घर से निकल आई और वृंदावन पहुंची, लेकिन उसके दो छोटे बच्चे घर पर ही रह गए।
शराब पिलाने से मना करने पर हमला करने का आरोप
महिला ने अनिरुद्धाचार्य के दरबार में अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उसका पति शराब का आदी है। शराब पीने के बाद वह उसके साथ मारपीट करता है और कई बार उसे भी शराब पीने के लिए मजबूर करने की कोशिश कर चुका है। महिला के अनुसार, जब उसने शराब पीने से इनकार किया तो पति ने कथित तौर पर उसके सिर पर कैंची मार दी। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति के व्यवहार से वह लगातार डर और तनाव में जी रही थी।
जान से मारने की धमकी का भी दावा
विवाहिता ने बताया कि पति उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देता था। महिला के मुताबिक, पति ने कथित तौर पर कहा था कि वह उसे जान से मारकर शौचालय के कच्चे गड्ढे में दबा देगा। इन धमकियों के बाद महिला इतनी डर गई कि उसे घर छोड़कर भागना पड़ा। हालांकि, उसके दो छोटे बच्चे घर पर ही छूट गए। बच्चों को लेकर भी महिला की चिंता सामने आई।
अनिरुद्धाचार्य ने बॉलीवुड पर साधा निशाना
महिला की बात सुनने के बाद अनिरुद्धाचार्य ने शराब को लेकर बॉलीवुड पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि फिल्मों और मनोरंजन की दुनिया में शराब को बढ़ावा देने से समाज पर गलत असर पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि शराब की वजह से समाज में कई तरह की समस्याएं और घरेलू विवाद बढ़ रहे हैं। अनिरुद्धाचार्य ने शराब के सेवन को परिवारों में होने वाली हिंसा और तनाव से जोड़ते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।
घटना ने घरेलू हिंसा पर फिर खड़े किए सवाल
महिला की आपबीती ने घरेलू हिंसा और नशे की लत से जुड़ी गंभीर समस्या को सामने ला दिया है। शराब की लत के कारण परिवारों में विवाद, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की घटनाएं सामने आती रहती हैं। हालांकि, महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में पीड़ित को पुलिस, महिला हेल्पलाइन और कानूनी सहायता के जरिए मदद मिलना जरूरी है। साथ ही, बच्चों की सुरक्षा और महिला की तत्काल सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।