अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में पुजारियों के बाद अब कर्मचारियों के लिए भी ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी की जा रही है। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट की ओर से कर्मचारियों के लिए नई नीति तैयार की जा रही है। इसमें कर्मचारियों के पहनावे, आचरण और व्यवहार से जुड़े नियम तय किए जा सकते हैं। प्रस्तावित नीति में मंदिर में काम करने वाले नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ सेवा प्रदाता एजेंसियों के कर्मचारियों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। इसका उद्देश्य मंदिर परिसर में काम करने वाले सभी कर्मचारियों की पहचान आसान बनाना और व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखना है।
कर्मचारियों के पहनावे के नियम होंगे तय
नई कर्मचारी नीति के तहत मंदिर में तैनात कर्मचारियों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड बनाया जा सकता है। इससे श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में काम करने वाले कर्मचारियों की पहचान करने में आसानी होगी। ड्रेस कोड के अलावा कर्मचारियों के आचरण और व्यवहार को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जाने की संभावना है। इसमें श्रद्धालुओं से बातचीत, मंदिर परिसर में अनुशासन और ड्यूटी के दौरान व्यवहार जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।
सेवा प्रदाता एजेंसियों के कर्मचारी भी दायरे में
श्रीराम मंदिर में अलग-अलग सेवाओं के लिए काम करने वाली एजेंसियों के कर्मचारी भी प्रस्तावित नीति के दायरे में आ सकते हैं। इससे मंदिर परिसर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक समान व्यवस्था लागू करने में मदद मिलेगी। ट्रस्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर की गरिमा और धार्मिक वातावरण के अनुरूप सभी कर्मचारी निर्धारित नियमों का पालन करें।
सीईओ को मिल सकती है नीति तैयार करने की जिम्मेदारी
नई कर्मचारी नीति तैयार करने की जिम्मेदारी मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को दिए जाने की संभावना है। नीति में ड्रेस कोड के साथ कर्मचारियों के अनुशासन, आचरण और व्यवहार से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए जा सकते हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय ट्रस्ट की आगामी बैठक में लिया जा सकता है। बैठक में प्रस्तावित नीति पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी मिलने की संभावना है।
आगामी बैठक में लग सकती है मुहर
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट की आगामी बैठक में कर्मचारियों के लिए तैयार की जा रही नई नीति पर विचार किया जाएगा। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो मंदिर में काम करने वाले कर्मचारियों और सेवा प्रदाता एजेंसियों के स्टाफ के लिए ड्रेस कोड और आचरण संबंधी नियम लागू किए जा सकते हैं। इस व्यवस्था से मंदिर परिसर में कर्मचारियों की पहचान, अनुशासन और कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।