वॉशिंगटन/बोस्टन, 15 सितंबर 2026 | अमेरिका में पढ़ाई कर रहे लाखों अंतरराष्ट्रीय छात्रों और रिसर्चर्स को बड़ी राहत मिली है। बोस्टन की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन के उस नए इमिग्रेशन नियम को लागू होने से फिलहाल रोक दिया है, जिसके तहत F-1 छात्रों और J-1 एक्सचेंज विजिटर्स के अमेरिका में रहने की अधिकतम अवधि सामान्य रूप से चार साल तक सीमित की जानी थी। यह नियम मंगलवार, 15 सितंबर 2026 से लागू होना था, लेकिन उससे एक दिन पहले US District Court for the District of Massachusetts के जज F. Dennis Saylor IV ने इसे रोक दिया। अब पुरानी “Duration of Status” (D/S) व्यवस्था फिलहाल जारी रहेगी।
भारतीय छात्रों को क्यों मिली बड़ी राहत?
अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र Undergraduate, Masters, PhD और Research Programmes में पढ़ाई करते हैं। चार साल की सीमा लागू होने पर खासतौर पर उन छात्रों के लिए परेशानी बढ़ सकती थी, जिनका कोर्स चार साल से ज्यादा चलता है। ऐसे छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए US Immigration Authorities से Extension of Stay की अनुमति लेनी पड़ती। अब अदालत की रोक के बाद फिलहाल ऐसा नया चार साल वाला Fixed Admission Period लागू नहीं होगा।
क्या थी पुरानी Duration of Status व्यवस्था?
अमेरिका में लंबे समय से F-1 International Students और J-1 Exchange Visitors के लिए Duration of Status यानी D/S व्यवस्था लागू है। इस व्यवस्था में छात्र को हर कुछ साल बाद केवल समय सीमा समाप्त होने के कारण अपना immigration status बढ़ाने के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होती, बशर्ते वह अपने अधिकृत academic programme और immigration rules का सही तरीके से पालन कर रहा हो। ट्रंप प्रशासन का नया नियम इसी सिस्टम को खत्म करके एक Fixed End Date लागू करना चाहता था।
चार साल के बाद लेनी पड़ती Immigration Approval
DHS के नए नियम में F और J कैटेगरी के लिए admission period academic programme की अवधि के आधार पर तय होना था, लेकिन सामान्य तौर पर इसे चार साल से ज्यादा नहीं रखा जाना था। चार साल के बाद पढ़ाई पूरी नहीं होने पर छात्र को अमेरिका में रहने के लिए Extension of Stay मांगना पड़ता। इसी तरह programme change, university transfer और कुछ मामलों में दूसरे academic programme में जाने के नियम भी ज्यादा सख्त किए गए थे।
PhD छात्रों पर पड़ सकता था सबसे ज्यादा असर
नए नियम का असर Graduate और Doctoral Students पर ज्यादा पड़ने की आशंका जताई गई थी। कई PhD programmes को पूरा करने में चार साल से ज्यादा समय लगता है। ऐसे में छात्रों को dissertation, laboratory research या अन्य academic requirements पूरी होने से पहले ही immigration extension प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इससे अमेरिका के Research Universities के लिए global talent को आकर्षित करना मुश्किल हो सकता है।
जज ने सरकार के तर्क को बताया 'बेहद कमजोर'
जज F. Dennis Saylor IV ने DHS की ओर से दिए गए National Security और Visa Fraud संबंधी तर्कों पर सवाल उठाए। Reuters के मुताबिक जज ने सरकार की justification को “exceptionally weak” बताया और कहा कि DHS ने कम बोझ वाले दूसरे विकल्पों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। अदालत ने यह भी माना कि दशकों से चली आ रही Duration of Status व्यवस्था के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों और शोधकर्ताओं ने अमेरिका में Science, Medicine और Technology के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
US Universities को भारी नुकसान की आशंका
अदालत ने कहा कि नया नियम लागू होने पर अमेरिकी universities के enrolment और finances पर गंभीर असर पड़ सकता है। जज Saylor ने लिखा कि Higher Education System और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को होने वाला नुकसान “catastrophic” हो सकता है। MIT और Harvard जैसे प्रमुख संस्थानों में graduate level पर बड़ी संख्या में international students पढ़ते हैं।
Journalists और Exchange Visitors पर भी था असर
नया नियम केवल छात्रों तक सीमित नहीं था। J-1 Exchange Visitors के लिए भी अधिकतम चार साल की fixed admission अवधि तय होनी थी। वहीं foreign journalists की I-category admission अवधि सामान्य तौर पर 240 दिन तक सीमित की जानी थी। इसलिए Higher Education groups के साथ पत्रकार संगठनों ने भी इस नियम को चुनौती दी थी।
किन संगठनों ने कोर्ट में दी चुनौती?
इस मामले में कई Higher-Education और Labour Organisations ने संयुक्त रूप से मुकदमा दायर किया। इनमें NAFSA: Association of International Educators, Presidents’ Alliance on Higher Education and Immigration, Association of Independent Colleges and Universities in Massachusetts, American Federation of Teachers और UAW से जुड़े संगठन शामिल हैं। मुकदमा 18 अगस्त 2026 को Massachusetts Federal Court में दायर किया गया था।
सरकार ने क्यों बनाया था नया नियम?
Department of Homeland Security का तर्क था कि पुरानी Duration of Status व्यवस्था का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार ने National Security, immigration compliance और ऐसे लोगों पर निगरानी बढ़ाने का हवाला दिया था जो लंबे समय तक अलग-अलग programmes में enrol होकर अमेरिका में बने रहते हैं। अदालत ने माना कि मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह समस्या-मुक्त नहीं है, लेकिन सरकार की ओर से पेश कारण इतने बड़े बदलाव को सही ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं दिखे। क्या अब 4-Year Rule पूरी तरह खत्म हो गया?
नहीं।
यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। कोर्ट के फैसले का मतलब यह नहीं है कि नियम हमेशा के लिए रद्द हो गया। अदालत ने फिलहाल नियम की effective date को रोक दिया है, जिससे मुकदमे पर आगे विचार होने तक पुरानी Duration of Status व्यवस्था जारी रहेगी। Plaintiffs की rule को स्थायी रूप से पूरी तरह खत्म कराने वाली मांग पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील भी कर सकता है।
फिलहाल Indian Students को क्या करना चाहिए?
अमेरिका में पढ़ रहे F-1 students के लिए फिलहाल मौजूदा D/S व्यवस्था जारी है। इसका मतलब यह है कि केवल 15 सितंबर आने की वजह से उन्हें चार साल वाली नई deadline के हिसाब से तत्काल extension filing करने की जरूरत नहीं है। हालांकि छात्रों को अपने I-20, SEVIS record, course load और F-1 compliance से जुड़े मौजूदा नियमों का पालन पहले की तरह करना होगा। किसी individual immigration case में university के Designated School Official यानी DSO या qualified immigration attorney की सलाह लेना बेहतर रहेगा।