यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR शुल्क लगने की आशंका ने दिल्ली के प्रमुख बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। कनॉट प्लेस, खान मार्केट और चांदनी चौक जैसे बाजारों के दुकानदारों का कहना है कि यदि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क लागू होता है, तो इसका असर कारोबार और ग्राहकों दोनों पर पड़ सकता है। दुकानदारों को आशंका है कि ऐसी स्थिति में ग्राहकों से भुगतान से पहले पूछा जा सकता है कि वे नकद, कार्ड या यूपीआई से भुगतान करेंगे। यूपीआई चुनने पर बिल में अतिरिक्त शुल्क जोड़ने या सामान की कीमत बढ़ाने की स्थिति बन सकती है।
2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर असमंजस
एमडीआर को लेकर दिल्ली के थोक और खुदरा बाजारों में चर्चा तेज है। सरकार की ओर से जारी जानकारी में 2,000 रुपये तक के भुगतान पर एमडीआर नहीं लगाए जाने की बात कही गई है। हालांकि, 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान को लेकर बाजारों में अभी पूरी स्पष्टता नहीं है। व्यापारिक संगठनों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भुगतान की सीमा तय की गई है, तो इससे बड़े लेनदेन पर शुल्क लगाने की संभावना को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल दुकानदार और ग्राहक इस व्यवस्था से जुड़े नियमों और संभावित असर की जानकारी जुटा रहे हैं।
कनॉट प्लेस में 50 फीसदी से ज्यादा भुगतान 2,000 रुपये से अधिक
कनॉट प्लेस के दुकानदारों के संगठन नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) के महासचिव विक्रम बधवार ने कहा कि वर्ष 2020 से पहले तक दुकानों पर ग्राहकों से पूछा जाता था कि वे भुगतान नकद करेंगे या कार्ड से। कार्ड से भुगतान करने पर कई दुकानदार बिल में एमडीआर जोड़ देते थे। उन्होंने आशंका जताई कि यूपीआई पर शुल्क लागू होने की स्थिति में वही दौर दोबारा लौट सकता है। बधवार के अनुसार, कनॉट प्लेस के आउटलेट्स में 50 प्रतिशत से ज्यादा यूपीआई भुगतान 2,000 रुपये से अधिक के होते हैं। ऐसे में इस वर्ग के लेनदेन पर असर पड़ने की संभावना है। उनका कहना है कि दुकानदार पहले से ही सीमित मार्जिन पर काम करते हैं। ऐसे में वे हर भुगतान का शुल्क खुद वहन नहीं करना चाहेंगे।
खान मार्केट में 80 फीसदी भुगतान यूपीआई से
खान मार्केट के व्यापारियों ने भी संभावित एमडीआर को लेकर चिंता जाहिर की है। खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा के मुताबिक, बाजार में करीब 80 प्रतिशत भुगतान यूपीआई के जरिए होता है। इनमें लगभग 55 प्रतिशत लेनदेन 2,000 रुपये से अधिक के होते हैं। मेहरा ने कहा कि व्यापारी कार्ड भुगतान पर शुल्क हटाए जाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब यूपीआई को लेकर चिंता सामने आ गई है। उन्होंने कहा कि यूपीआई देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था और सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। उनका सुझाव है कि यूपीआई के संचालन और सुरक्षा से जुड़े खर्च का वहन सरकार को करना चाहिए, ताकि व्यापारियों और ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
चांदनी चौक के थोक बाजारों में भी चिंता
दिल्ली के प्रसिद्ध चांदनी चौक कपड़ा बाजार में भी संभावित शुल्क को लेकर चिंता है। क्लॉथ मार्केट के प्रधान गोपाल गर्ग के अनुसार, थोक बाजारों में यूपीआई से बड़े भुगतान किए जाते हैं। इसलिए इस व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। थोक कारोबार में एक ही लेनदेन की राशि अधिक होने के कारण शुल्क का असर भी बड़ा हो सकता है। व्यापारियों का कहना है कि यदि एमडीआर लागू किया गया, तो इससे कारोबार की लागत बढ़ सकती है।
व्यापारी संगठन ने जताया विरोध
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने संभावित एमडीआर का विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकार भले ही शुल्क दुकानदार से लेने की बात कहे, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर ही पड़ेगा। गोयल के मुताबिक, यदि 2,000 रुपये की खरीदारी पर दुकानदार को 1 प्रतिशत एमडीआर देना पड़ा, तो उसे 20 रुपये का नुकसान होगा। ऐसी स्थिति में दुकानदार या तो यह रकम ग्राहक से वसूल सकता है या फिर सामान की कीमत बढ़ा सकता है।
ग्राहकों पर पड़ सकता है असर
व्यापारियों के अनुसार, यूपीआई पर शुल्क लागू होने की स्थिति में ग्राहकों को भुगतान के विकल्पों पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। कुछ दुकानदार नकद भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं, जबकि कुछ यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क जोड़ सकते हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क किस तरह लागू होगा, इसकी दर क्या होगी और इसका भार किस पर पड़ेगा। ऐसे में बाजारों में फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है। व्यापारी संगठनों ने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने और छोटे-बड़े कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की मांग की है।