उत्तराखंड - देवभूमि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है। पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में स्थित श्री सिद्धबली धाम भगवान हनुमान को समर्पित प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां हनुमानजी की पूजा पिंडी स्वरूप में की जाती है। शांत और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह धाम श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।
मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी सिद्धबली धाम का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से कोटद्वार आने पर इस पवित्र धाम के दर्शन करने की अपील की।
सीएम धामी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी पोस्ट में सिद्धबली धाम को भगवान हनुमान की भक्ति और कृपा का पवित्र केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित इस धाम में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। उन्होंने पौड़ी गढ़वाल आने वाले लोगों से सिद्धबली धाम के दर्शन करने की अपील भी की।

क्यों कहलाया ‘सिद्धबली’?
सिद्धबली धाम के नाम को लेकर स्थानीय स्तर पर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर एक सिद्ध बाबा ने तपस्या की थी। कहा जाता है कि तपस्या के दौरान उन्हें भगवान हनुमान के दर्शन हुए। इसके बाद यहां बजरंगबली की स्थापना की गई और स्थान का नाम ‘सिद्धबली’ पड़ गया। हालांकि, ये बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं, इनके ऐतिहासिक प्रमाण के तौर पर स्पष्ट अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं।

गुरु गोरखनाथ से जुड़ी है एक और कथा
सिद्धबली धाम से जुड़ी एक अन्य प्रचलित कथा गुरु गोरखनाथ और भगवान हनुमान से संबंधित है। मान्यता के अनुसार, गुरु गोरखनाथ अपने गुरु मत्स्येंद्रनाथ की तलाश में जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में भगवान हनुमान ने उनका मार्ग रोक लिया।
कथा के अनुसार, दोनों के बीच लंबे समय तक युद्ध हुआ, लेकिन कोई भी एक-दूसरे को पराजित नहीं कर सका। इसके बाद हनुमानजी ने अपना वास्तविक स्वरूप प्रकट किया और गुरु गोरखनाथ से वरदान मांगने को कहा। मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ ने उनसे इसी स्थान पर सदैव विराजमान रहने का आग्रह किया।
तपस्या से भी जुड़ी है मान्यता
एक अन्य स्थानीय मत के अनुसार, गुरु गोरखनाथ ने अपने अनुयायियों के साथ इस क्षेत्र में लंबे समय तक तपस्या की थी। इसी वजह से यह स्थान ‘सिद्ध’ कहलाया। हनुमानजी से जुड़ी मान्यता के साथ इसे जोड़कर धाम का नाम ‘सिद्धबली’ बताया जाता है। इन कथाओं को स्थानीय धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के रूप में देखा जाता है। इनके अलग-अलग संस्करण भी प्रचलित हैं।
करीब 400 साल पुराना माना जाता है धाम
स्थानीय मान्यता के अनुसार सिद्धबली धाम करीब 400 वर्ष पुराना माना जाता है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि करने वाला स्पष्ट अभिलेखीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए मंदिर की प्राचीनता से जुड़ी इस अवधि को ऐतिहासिक तथ्य के बजाय स्थानीय मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आज सिद्धबली धाम कोटद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मंदिर की धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ यहां का प्राकृतिक वातावरण भी लोगों को आकर्षित करता है।