विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर केंद्र सरकार ने देशभर में उद्योगों और संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए EPF को लेकर अहम फैसला लिया है।केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक मौजूदा PF नियमों के तहत वेतन सीमा ₹15,000 प्रति माह थी। यह सीमा वर्ष 2014 में तय की गई थी और सितंबर 2014 में इसमें बदलाव किया गया था।अब सरकार ने इसे बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया है।
51 लाख कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
सरकार के अनुसार नई PF कटौती सीमा ₹25,000 प्रति माह होगी। इससे ₹15,000 से ₹25,000 वेतन पाने वाले करीब 51 लाख कर्मचारी नए PF नियमों के दायरे में आएंगे।सरकार का अनुमान है कि इस फैसले के कारण हर साल लगभग ₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च होगा।वहीं पांच साल की अवधि में अनुमानित खर्च करीब ₹56,696 करोड़ रहने का अनुमान है।
प्रधानमंत्री ने 16 सितंबर को दी मंजूरी
केंद्रीय मंत्री के अनुसार इस बदलाव की लंबे समय से मांग की जा रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 सितंबर 2026 को प्रस्ताव को मंजूरी दी।इससे पहले विभिन्न मंत्रालयों के बीच प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई थी। व्यय वित्त समिति (Expenditure Finance Committee) ने 16 जून 2026 को हुई बैठक में इसकी सिफारिश की थी।
कर्मचारियों को मिलेंगे तीन प्रमुख सामाजिक सुरक्षा लाभ
वेतन सीमा बढ़ने के बाद नए दायरे में आने वाले कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई लाभ मिलेंगे।
1. EPF के जरिए नियमित बचत
कर्मचारियों को Employee Provident Fund (EPF) के तहत नियमित बचत की सुविधा मिलेगी, जिससे लंबी अवधि में वित्तीय सुरक्षा बनाने में मदद मिलेगी।
2. EPS से पेंशन सुरक्षा
कर्मचारी Employee Pension Scheme (EPS) के जरिए रिटायरमेंट के बाद पेंशन सुरक्षा के दायरे में आएंगे।
3. EDLI के तहत बीमा सुरक्षा
इसके अलावा Employees' Deposit Linked Insurance (EDLI) योजना के तहत बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध होगी।सरकार के अनुसार पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान व्यवस्था को भी मौजूदा वेतन स्तरों के अनुरूप बनाने में यह बदलाव मदद करेगा।
सरकार ने सामाजिक सुरक्षा को बताया जरूरी
सरकार का कहना है कि औपचारिक रोजगार केवल वेतन मिलने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके साथ सुनिश्चित और पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा भी जुड़ी होनी चाहिए।सरकार के मुताबिक EPF वेतन सीमा बढ़ाने से कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार होगा। साथ ही नियोक्ताओं के लिए भी इसका असर कार्यबल की स्थिरता और कर्मचारियों को बनाए रखने के लिहाज से बताया गया है।
कंपनियों और कर्मचारियों के बीच भरोसा बढ़ाने पर जोर
श्रम मंत्रालय के अनुसार व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज से कंपनियों और कर्मचारियों के बीच विश्वास मजबूत हो सकता है।सरकार के आंकड़ों के मुताबिक वार्षिक सरकारी व्यय बढ़कर करीब ₹11,339 करोड़ हो जाएगा, जबकि वर्तमान बजटीय सहायता लगभग ₹10,250 करोड़ है।
EPFO से जुड़े करोड़ों सदस्य
वर्तमान में EPFO देश की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक का संचालन करता है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार EPFO के तहत करीब 7.98 करोड़ contributing members और 7.68 लाख से अधिक संस्थान जुड़े हैं।वहीं कर्मचारी पेंशन योजना के तहत करीब 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिल रहा है।
सरकार का कहना है कि भारत की विकास यात्रा में देश का कार्यबल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बढ़ती आय, रोजगार के अवसर और औपचारिक क्षेत्र के विस्तार के साथ सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का विस्तार भी जरूरी है। EPFO की वेतन सीमा को ₹25,000 तक बढ़ाने का निर्णय इसी दिशा में उठाया गया कदम है।