भोपाल - मध्य प्रदेश में मानसून सीजन अब तक उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। प्रदेश में अब तक औसतन 15.8 इंच (401.9 मिमी) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस समय तक 18.5 इंच (470.5 मिमी) वर्षा हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अब तक करीब 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसका असर खेती और जल स्रोतों पर भी दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार फिलहाल अगले दो दिनों तक प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
42 जिलों में सामान्य से कम बारिश, केवल 13 जिले कोटे से आगे
बारिश के आंकड़ों के अनुसार भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, सागर, रीवा, छिंदवाड़ा, ग्वालियर, नर्मदापुरम, विदिशा, मंदसौर, धार, रतलाम, शाजापुर, शिवपुरी समेत 42 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। वहीं सीहोर, इंदौर, देवास, राजगढ़, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, शहडोल, उमरिया और मऊगंज सहित 13 जिलों में औसत से अधिक बारिश हुई है। रविवार को सबसे अधिक बारिश सीहोर में रिकॉर्ड की गई, जबकि अधिकांश जिलों में हल्की बूंदाबांदी ही हुई।
मानसून टर्फ सक्रिय, लेकिन मजबूत सिस्टम नहीं
मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में मानसून ट्रफ और दो अन्य मौसमीय सिस्टम सक्रिय हैं, लेकिन वे पर्याप्त मजबूत नहीं हैं। इसी कारण पिछले दो दिनों से भारी बारिश का दौर थमा हुआ है और अगले दो दिनों तक भी इसी तरह हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी। हालांकि 4 अगस्त से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसके प्रभाव से 5 अगस्त से प्रदेश के पूर्वी और उत्तरी जिलों में भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
खेती पर असर, सोयाबीन के लिए फिलहाल अनुकूल मौसम
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इंदौर-उज्जैन संभाग में फिलहाल हो रही रुक-रुक कर बारिश सोयाबीन की फसल के लिए लाभदायक है। हालांकि धान की खेती वाले क्षेत्रों में अभी पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा है। दूसरी ओर खंडवा, खरगोन और बड़वानी जैसे इलाकों में पहले हुई भारी बारिश से खेतों में जलभराव होने के कारण कुछ फसलों को नुकसान भी हुआ है।
जून और जुलाई दोनों में बारिश रही कमजोर
मौसम विभाग के अनुसार जून महीने में प्रदेश में 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी वर्षा से स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन मानसून के दो बार ब्रेक लेने के कारण पूरे महीने का औसत फिर गिर गया। जुलाई भी सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बारिश के साथ समाप्त हुआ, जिससे पूरे मानसून सीजन का आंकड़ा अभी भी सामान्य से नीचे बना हुआ है।