ईटानगर/कुरुंग कुमे, 3 अगस्त 2026 | नेशनल डेस्क: सीमा सड़क संगठन यानी Border Roads Organisation—BRO ने अरुणाचल प्रदेश के दूरस्थ कुरुंग कुमे जिले में 200 फीट लंबा बेली ब्रिज तैयार कर हुरी गांव का महत्वपूर्ण सड़क संपर्क बहाल कर दिया है। करीब 61 मीटर लंबे इस पुल के शुरू होने से स्थानीय लोगों, आवश्यक वस्तुओं, मशीनों और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही फिर सुचारु हो सकेगी। BRO के ताजा बयान के अनुसार पुराना पुल 11 जुलाई की रात अचानक आई बाढ़ में बह गया था। इसके बाद हुरी क्षेत्र का मुख्य संपर्क टूट गया और आवश्यक सामान, स्वास्थ्य सेवाओं तथा स्थानीय निवासियों की आवाजाही प्रभावित हुई।
प्रोजेक्ट अरुणांक ने मिशन मोड में पूरा किया काम
नए पुल का निर्माण BRO के प्रोजेक्ट अरुणांक के अंतर्गत किया गया। कार्य में 756 बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स के अधीन 85 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी की टीम शामिल रही। लगातार बारिश और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद कर्मचारियों ने दिन-रात काम किया। नदी का तेज प्रवाह और कमजोर जमीन पुल की नींव तथा दोनों तरफ के संपर्क मार्ग तैयार करने में बड़ी चुनौती बने रहे।
बार-बार हुए भूस्खलन से बढ़ीं मुश्किलें
हुरी का इलाका दूरस्थ होने के कारण पुल निर्माण के लिए सामग्री, भारी मशीनों और दूसरे संसाधनों को मौके तक पहुंचाना आसान नहीं था। काम के दौरान नए भूस्खलन होने से मलबा रास्तों पर आता रहा और निर्माण गतिविधियां बार-बार प्रभावित हुईं। BRO की टीम ने प्रतिकूल मौसम में काम जारी रखते हुए पुल के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ा और उसे नदी के ऊपर स्थापित किया। अधिकारियों के मुताबिक तकनीकी योजना और टीमों के बीच समन्वय के कारण यह काम कम समय में पूरा किया जा सका।
केवल पुल नहीं बनाया, क्षतिग्रस्त सड़कें भी सुधारीं
संपर्क बहाल करने के अभियान में सिर्फ बेली ब्रिज का निर्माण शामिल नहीं था। BRO ने आसपास आए मिट्टी और पत्थरों के मलबे को हटाया, बारिश से खराब हुई सड़कों की मरम्मत की और पुल तक पहुंचने वाले मार्गों को मजबूत बनाया। इस काम का उद्देश्य लोगों के साथ निर्माण मशीनों, आपातकालीन वाहनों और आवश्यक सामग्री की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था।
पहले अस्थायी रास्ता, अब मजबूत बेली ब्रिज
फ्लैश फ्लड के तुरंत बाद जिला प्रशासन, BRO और स्थानीय लोगों ने मिलकर हल्के यातायात तथा आपातकालीन आवाजाही के लिए अस्थायी लकड़ी का रास्ता तैयार किया था। इससे पैदल यात्रियों, राहत सामग्री और हल्के वाहनों के लिए सीमित संपर्क शुरू हो गया था। इसके बाद 200 फीट लंबे स्टील बेली ब्रिज पर तेजी से काम किया गया। 31 जुलाई तक पुल का मुख्य स्टील ढांचा स्थापित हो चुका था और संपर्क मार्गों का शेष कार्य चल रहा था। 2 अगस्त को BRO ने पुल के माध्यम से महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी बहाल होने की जानकारी दी। इसलिए यह कहना अधिक सटीक होगा कि फ्लैश फ्लड के बाद पहले आपातकालीन अस्थायी संपर्क शुरू किया गया और अब नए बेली ब्रिज के जरिए नियमित सड़क संपर्क को अधिक व्यापक रूप से बहाल किया गया है।
भारत-चीन LAC के करीब स्थित है हुरी गांव
हुरी गांव कुरुंग कुमे जिले के दामिन सर्किल में स्थित एक दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्र है। यह इलाका वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी Line of Actual Control—LAC के करीब होने के कारण सामरिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। पुल स्थानीय आबादी के साथ सुरक्षा बलों और जरूरी उपकरणों की आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण है। BRO के प्रोजेक्ट अरुणांक ने पहले भी 278 किलोमीटर लंबे हापोली–सरली–हुरी मार्ग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह सड़क कुरुंग कुमे के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में से एक को संपर्क उपलब्ध कराती है। प्रोजेक्ट अरुणांक ने अरुणाचल प्रदेश में दूरस्थ घाटियों और अग्रिम क्षेत्रों को जोड़ने वाले सैकड़ों किलोमीटर मार्ग तथा प्रमुख पुल विकसित किए हैं।
स्थानीय लोगों को क्या लाभ मिलेगा?
पुल के शुरू होने से हुरी और आसपास के क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की नियमित आपूर्ति आसान होने की उम्मीद है। बीमार लोगों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने, विद्यार्थियों की आवाजाही और दैनिक रोजगार से जुड़े कामों में भी राहत मिलेगी। स्थानीय निवासियों ने संपर्क बहाल होने पर BRO का आभार जताया है। उनका कहना है कि सड़क मार्ग बंद होने से राशन, चिकित्सा सहायता, शिक्षा और आजीविका से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं।
बेली ब्रिज क्या होता है?
बेली ब्रिज पहले से तैयार स्टील के हिस्सों से बनाया जाने वाला मॉड्यूलर पुल होता है। इसके अलग-अलग पैनल और अन्य हिस्से मौके पर जोड़कर अपेक्षाकृत कम समय में पुल तैयार किया जा सकता है। यही कारण है कि बाढ़, भूस्खलन या युद्ध जैसी परिस्थितियों में स्थायी पुल क्षतिग्रस्त होने पर बेली ब्रिज का इस्तेमाल तेजी से संपर्क बहाल करने के लिए किया जाता है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार BRO आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मॉड्यूलर और बेली ब्रिज स्थापित कर नागरिक तथा सैन्य आवाजाही बहाल करता है। हालांकि हुरी में बने नए पुल की निर्धारित भार क्षमता से संबंधित स्पष्ट तकनीकी विवरण ताजा सार्वजनिक बयान में नहीं दिया गया है। इसलिए उसकी क्षमता को लेकर अनुमान प्रकाशित करना उचित नहीं होगा।
हुरी पुल से जुड़ा घटनाक्रम
| समय | प्रमुख घटनाक्रम |
|---|---|
| 11 जुलाई की रात | BRO के नवीनतम बयान के अनुसार फ्लैश फ्लड में पुराना पुल बहा |
| मध्य जुलाई | हल्की आवाजाही और राहत कार्यों के लिए अस्थायी लकड़ी का रास्ता तैयार |
| 31 जुलाई | नए स्टील पुल का मुख्य ढांचा स्थापित; संपर्क मार्ग पर काम जारी |
| 2 अगस्त | 200 फीट बेली ब्रिज से महत्वपूर्ण सड़क संपर्क बहाल होने की घोषणा |
घटनाक्रम अलग-अलग समय पर जारी प्रशासनिक और मीडिया अपडेट पर आधारित है।
BRO की पहल एक नजर में
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | हुरी गांव, कुरुंग कुमे जिला, अरुणाचल प्रदेश |
| प्रशासनिक क्षेत्र | दामिन सर्किल |
| नए पुल की लंबाई | 200 फीट, करीब 61 मीटर |
| पुल का प्रकार | बेली ब्रिज |
| निर्माण एजेंसी | सीमा सड़क संगठन |
| संबंधित परियोजना | प्रोजेक्ट अरुणांक |
| कार्यरत इकाइयां | 85 RCC और 756 BRTF |
| पुराना पुल क्यों टूटा | फ्लैश फ्लड |
| प्रमुख चुनौतियां | भारी बारिश, तेज नदी प्रवाह, अस्थिर जमीन और भूस्खलन |
| अन्य कार्य | मलबा हटाना, सड़क मरम्मत और संपर्क मार्ग मजबूत करना |
| महत्व | स्थानीय आबादी, आपात सेवाएं और सीमावर्ती कनेक्टिविटी |
FAQ: हुरी बेली ब्रिज से जुड़े प्रमुख सवाल
BRO ने हुरी में कितने लंबे पुल का निर्माण किया है?
BRO ने 200 फीट यानी करीब 61 मीटर लंबा बेली ब्रिज तैयार किया है।
पुराना पुल कब बहा था?
BRO के 2 अगस्त के नवीनतम बयान में पुराना पुल 11 जुलाई की रात आई फ्लैश फ्लड में बहने की जानकारी दी गई है। हालांकि, घटना के तुरंत बाद की कुछ स्थानीय रिपोर्टों में मुख्य फ्लैश फ्लड की तारीख 13 जुलाई बताई गई थी।
हुरी गांव कहां स्थित है?
हुरी अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे जिले के दामिन सर्किल में स्थित एक दूरस्थ सीमावर्ती गांव है। यह इलाका भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब है।
पुल किसने बनाया?
पुल का निर्माण प्रोजेक्ट अरुणांक के अंतर्गत 85 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी और 756 बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स की टीम ने किया।
निर्माण में क्या कठिनाइयां आईं?
भारी बारिश, नदी का तेज बहाव, अस्थिर जमीन, संसाधनों की सीमित उपलब्धता और बार-बार हुए भूस्खलन ने पुल तथा संपर्क मार्गों का काम कठिन बनाया।
क्या फ्लैश फ्लड के बाद कोई रास्ता उपलब्ध नहीं था?
शुरुआती तौर पर मुख्य संपर्क टूट गया था। बाद में हल्के यातायात और आपातकालीन सहायता के लिए अस्थायी लकड़ी का रास्ता तैयार किया गया। अब नया बेली ब्रिज स्थापित कर व्यापक सड़क संपर्क बहाल किया गया है।